मणिपुर में जातीय तनाव के बीच 1,000 पंगल छात्र स्कूल नहीं जा पा रहे हैं
थौबल जिले के दो गांवों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद शिक्षा बाधित
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 4:44 · अपडेट शाम 4:52 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
मणिपुर के थौबल जिले में मैतेई बहुल क्षेत्र में रहने वाले लगभग 1,000 पंगल (मुस्लिम) छात्र पिछले 16 दिनों से स्कूलों में नहीं जा पा रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति मैतेई समुदाय के खंगाबोक गांव और पंगल समुदाय के संगाईयुमफाम गांव के बीच तनाव के कारण उत्पन्न हुई है। 18 अक्टूबर को एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद दोनों गांवों के बीच संबंध बिगड़ गए हैं।
घटना की शुरुआत 18 अक्टूबर को हुई थी, जब दोनों गांवों को अलग करने वाले एक मैदान में संगीत कार्यक्रम के दौरान पत्थरबाजी हुई थी। इस झड़प के दौरान खंगाबोक के निवासी राकेश लाइशराम की हत्या कर दी गई और उसके बाद आगजनी की घटनाएं हुईं। इस हिंसा के बाद दोनों समुदायों के लोग अपने-अपने क्षेत्रों में लौट गए हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से लाइसेंस वाले हथियार वापस ले लिए हैं और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को तैनात किया गया है।
संगाईयुमफाम के लगभग 25,000 पंगल समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) के संयोजक अताउर रहमान ने बताया कि डर इतना बढ़ गया है कि अन्य क्षेत्रों के पंगल छात्रों ने भी कक्षाओं में जाना बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक से लेकर हाईस्कूल तक के लगभग 1,000 छात्र 18 अक्टूबर से स्कूल नहीं गए हैं, जिनमें केवल संगाईयुमफाम गांव के ही 700 बच्चे शामिल हैं। इन छात्रों के लिए ऑनलाइन क्लास की कोई व्यवस्था भी नहीं की गई है।
रहमान के अनुसार, खंगाबोक में नौ स्कूल हैं जहां सभी समुदायों के बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन वर्तमान में कोई भी एक-दूसरे के गांव में प्रवेश नहीं कर रहा है। उन्होंने सरकार से सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की है ताकि बच्चे फिर से अपनी पढ़ाई शुरू कर सकें। दूसरी ओर, खंगाबोक JAC के सह-संयोजक थोकचोम किरण ने स्पष्ट किया है कि उनके गांव के लोगों ने पंगल बच्चों को नहीं रोका है, बल्कि तनाव के कारण बच्चे और वयस्क स्वयं दूर रहे हैं।
दोनों गांवों ने अपनी अलग-अलग जॉइंट एक्शन कमेटियां (JACs) बनाई हैं और उनकी मांगें अलग हैं। खंगाबोक JAC न्याय और हत्यारे की पहचान करने की मांग कर रहा है। किरण ने बताया कि संगाईयुमफाम के निवासियों ने अभी तक माफी नहीं मांगी है और न ही लाइशराम को गोली मारने वाले व्यक्ति को सौंपा है, इसलिए शांति बैठक नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि लाइशराम स्थानीय स्पोर्ट्स स्टार थे और 6 नवंबर तक गांव में शोक मनाया जाएगा, जिसके बाद आगे के कदम उठाए जाएंगे।
वहीं, संगाईयुमफाम JAC संपत्तियों के विनाश और आगजनी की घटनाओं के लिए मुआवजे की मांग कर रहा है। उनका दावा है कि हत्यारा उनके गांव का नहीं है। दोनों JAC के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह और राज्य के गृह मंत्री से मुलाकात की है। मुख्यमंत्री द्वारा 28 अक्टूबर को दोनों गांवों का दौरा करने के बावजूद, अभी तक शांति बैठक आयोजित नहीं हुई है। हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय से प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
संगाईयुमफाम क्षेत्र के अधिकांश स्कूल मैतेई बहुल क्षेत्र में स्थित हैं। पंगल गांव में केवल दो स्कूल हैं, जिनमें एक मिडिल स्कूल शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि पंगल क्षेत्र में कोई मैतेई छात्र पढ़ाई नहीं करता है। वर्तमान में मैतेई और पंगल के बीच यह तनाव केवल खंगाबोक और संगाईयुमफाम गांवों तक सीमित है।
मणिपुर में पिछले तीन वर्षों से जारी जातीय हिंसा में लगभग 350 लोगों की मौत हुई है और 60,000 के करीब लोग विस्थापित हुए हैं।
પંજાબમાં કર્મભૂમિ એક્સપ્રેસના ૪ ડબ્બાઓમાં ભીષણ આગ, મુસાફરોએ જીવ બચાવવા ટ્રેનમાંથી કૂદકો માર્યો
અમૃતસરથી ન્યૂ જલપાઈગુડી જઈ રહેલી ટ્રેનમાં પેન્ટ્રીથી આગ શરૂ થયાના અંદાજિત સમાચાર, ૮ ટ્રેનોના રૂટ ડાયવર્ટ કરાયા
ખ્રિસ્તી સમુદાયના હુમલાઓના મુદ્દે આરએસએસ નેતા સાથે બેઠક યોજાઈ
બંગિયા ક્રિસ્તીય પરિસેબાના પ્રતિનિધિઓએ ચર્ચ અને પ્રાર્થના સભાઓ પર થયેલા હુમલાઓ અંગે ચિંતા વ્યક્ત કરી
स्कूलों में शौचालय की सुविधा के अभाव का बेटियों की शिक्षा पर बुरा असर
स्वच्छ और निजी शौचालय न होने के कारण मासिक धर्म के दौरान लड़कियां स्कूल जाने से बचती हैं।