सूरत-वापी के बीच वर्ष २०२७ में शुरू होगी देश की पहली बुलेट ट्रेन की ट्रायल
अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर मई-जून २०२७ में ट्रायल रन आयोजित करने की योजना है.
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, सुबह 12:26 · अपडेट सुबह 12:35 · 2 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रेलवे द्वारा देश की पहली बुलेट ट्रेन की ट्रायल शुरू करने की दिशा में काम चल रहा है। अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर स्थित १०० किलोमीटर लंबे सूरत और वापी सेगमेंट पर यह ट्रायल रन आयोजित किया जाएगा।
इस रिपोर्ट के अनुसार, सूरत-वापी पट्टे पर बी२८ ट्रेन की ट्रायल मई से जून २०२७ के दौरान शुरू होने की योजना है। इस ट्रायल के सफल होने के बाद इसी सेक्शन पर अगस्त २०२७ में व्यावसायिक सेवाएं शुरू होने की उम्मीद की गई है।
इस पहली बुलेट ट्रेन की विशेषताओं और यात्रियों के लिए उसकी सुविधाओं के बारे में भी विवरण सामने आए हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, भारत की यह पहली बुलेट ट्रेन औ२८० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। इस ट्रेन में कुल ८ कोच होंगे और इसमें ५५७ यात्री बैठ सकेंगे।
इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय रेलवे द्वारा हाई स्पीड रेल कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। सूरत और वापी के बीच के इस महत्वपूर्ण १०० किलोमीटर के ट्रैक पर होने वाली ट्रायल देश के रेलवे इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
मई और जून २०२७ में निर्धारित इस ट्रायल रन की अवधि के तुरंत बाद यानी अगस्त २०२७ में यात्रियों के लिए कमर्शियल सेवाओं का शुभारंभ किया जाएगा, जिससे दोनों शहरों के बीच की यात्रा अधिक तेज और सुविधाजनक बनेगी ऐसी आशा है।
गया एयरपोर्ट पर 10 किलो गांजे के साथ दो महिलाएं पकड़ी गईं
थाईलैंड से आई दोनों महिलाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग ₹10 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं।
પાણીપુરી વેચનારની ૧.૨ લાખની માસિક કમાણી જાણીને આઈઆઈટીના સ્નાતકો ચોંકી ગયા
ચાર આઉટલેટ્સ ચલાવતા વેપારીની કુલ માસિક નફાની રકમ ૪.૫ લાખ રૂપિયાથી વધુ હોવાનો દાવો
सुअरों में कृत्रिम गर्भाधान के लिए सरकार ने वीर्य उत्पादन के नए मानक जारी किए
पूर्वोत्तर भारत में आनुवंशिक सुधार और पशुपालकों की आजीविका बढ़ाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए