लंबे समय तक रहने वाले मुंह के छाले ओरल कैंसर का बड़ा खतरा बन सकते हैं
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि मुंह में तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाले छाले कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, दोपहर 2:37 · 4 मिनट का पाठ
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अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, मुंह में छाले होने की तकलीफ बहुत ही आम है और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कोई भी व्यक्ति इसका शिकार बन सकता है। गलती से गाल या जीभ कट जाना, सख्त ब्रिसल वाले ब्रश का इस्तेमाल करना या फिर कुछ मामलों में विटामिन बी-12 और फोलेट की कमी के कारण लोगों को यह परेशानी होती है। आमतौर पर ये छाले अपने आप या फिर हल्के उपचार से ठीक हो जाते हैं, लेकिन अगर आपके मुंह में यह तकलीफ बार-बार होती है या छालों को ठीक होने में बहुत लंबा समय लग रहा है, तो इसे नजरअंदाज करने की भूल नहीं करनी चाहिए। कभी-कभी मुंह में लंबे समय तक रहने वाला छाला कैंसर का शुरुआती संकेत भी साबित हो सकता है।
चिंताजनक बात यह है कि अब युवा वर्ग में भी मुंह के कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। यह गंभीर बीमारी जीभ, मसूड़ों, होंठ और गाल के अंदरूनी हिस्से को प्रभावित कर सकती है। स्वास्थ्य विशेषूर्यों के अनुसार, यदि मुंह में कोई छाला तीन सप्ताह तक ठीक नहीं होता है या कोई असाधारण गांठ, सूजन या फिर सफेद-लाल निशान दिखाई देता है, तो उसकी तत्काल जांच कराना अनिवार्य है। ओरल कैंसर के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे नियमित रूप से अपने मुंह की जांच करें और कैंसर के शुरुआती संकेतों को पहचानने का प्रयास करें।
खासकर पिछले 20 वर्षों में ओरल कैंसर के मामलों में दोगुने से भी अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। आश्चर्यजनक रूप से 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में भी इसके लक्षण सामने आ रहे हैं। ओरल हेल्थ फाउंडेशन के अध्ययन से यह खुलासा होता है कि इस बीमारी के मामले बढ़ने के बावजूद लोगों में इसके शुरुआती लक्षणों को लेकर जागरूकता अभी तक पर्याप्त रूप से नहीं बढ़ी है। ओरल हेल्थ फाउंडेशन की अध्यक्ष और रजिस्टर्ड डेंटिस्ट कैथरीन ब्रैडी का कहना है कि मुंह में छाला, किसी प्रकार का निशान या गांठ होने पर लोग अक्सर इसे आम समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। खासकर जब इसमें दर्द नहीं हो रहा होता है तो लोगों का ध्यान इस पर नहीं जाता है। लेकिन यदि मुंह में किसी भी प्रकार का बदलाव तीन सप्ताह से अधिक समय तक बना रहता है, तो डॉक्टर के पास इसकी जांच कराना बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मुंह का कैंसर किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। अन्य गंभीर बीमारियों की तरह ही ओरल कैंसर के मामले में भी समय पर पहचान होना बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बीमारी जितनी जल्दी पकड़ में आती है, उसके उपचार के सफल होने की संभावना भी उतनी ही बेहतर रहती है। ब्रिटेन की स्थानीय मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट में करेन लिर्शिंग-श्रोडर नामक एक महिला ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया था कि उन्होंने शुरुआत में अपने लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया था और बाद में उन्हें पता चला कि वे जीभ के कैंसर से पीड़ित हैं। शुरुआती चरण में उनकी जीभ पर एक छोटा छाला हुआ था।
ओरल हेल्थ फाउंडेशन एक अग्रणी संस्था है जो मुंह के स्वास्थ्य और ओरल कैंसर के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने का कार्य करती है। इस संस्था द्वारा समय-समय पर अध्ययन किए जाते हैं ताकि ओरल कैंसर के बढ़ते खतरे और उसके शुरुआती लक्षणों के बारे में वैश्विक स्तर पर जागरूकता लाई जा सके।
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