मुख्य चुनाव कमिश्नर को हटाने के लिए विपक्ष का सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम आयोजित होगा
कांग्रेस ने सरकार पर रुकावटें पैदा करने का आरोप लगाया और ३० अक्टूबर को खड़गे के निवास स्थान पर बैठक का आयोजन किया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, दोपहर 2:19 · अपडेट दोपहर 1:52 · 6 मिनट का पाठ
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विपक्ष गठबंधन 'इंडिया' मुख्य चुनाव कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग के साथ ३० अक्टूबर के दिन दिल्ली में 'जनता के बीच महाभियोग' नाम का कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है। यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के १०, राजाजी मार्ग स्थित निवास स्थान पर आयोजित होगा। विपक्ष का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव कमिश्नर के खिलाफ अपने आरोपों और उन्हें पद से हटाने की मांग को सार्वजनिक मंच पर पेश करना है। यह आयोजन १ नवंबर के दिन आयोजित होने वाले विपक्ष गठबंधन की संयुक्त रैली से पूर्व एक प्रस्तावना के रूप में रखा गया है।
कांग्रेस के संगठन प्रमुख के.सी. वेणुगोपाल ने २७ अक्टूबर के दिन आरोप लगाया था कि नरेंद्र मोदी सरकार इंडिया गठबंधन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रुकावटें पैदा कर रही है। उन्होंने बताया था कि, दो अलग-अलग जगहों पर यह कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अनुमति पुलिस के हस्तक्षेप की वजह से नकारी गई है। वेणुगोपाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि, सरकारी होटल अशोक द्वारा शुरुआत में कार्यक्रम के लिए अनुमति दी गई थी, लेकिन पुलिस के हस्तक्षेप के बाद वह अनुमति वापस ले ली गई थी। उन्होंने आगे जोड़ा था कि, यह मामला सिर्फ दिल्ली पुलिस का फैसला नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का फैसला है, जो उनके पक्षपाती ज्ञानेश कुमार का रक्षण कर रहे हैं।
कांग्रेस के नेता ने आक्षेप किया था कि जब उनके आदमी कार्यक्रम के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने आए तब पुलिस ने उन्हें रोका था। वेणुगोपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि, जब तक मोदी-शाह की पपेट यानी कठपुतली माने जाने वाले ज्ञानेश कुमार को हटाया नहीं जाएगा तब तक वे शांत बैठेंगे नहीं। अगर उन्हें यहां रोका जाएगा, तो वे अमित शाह के घर पर और प्रधानमंत्री मोदी के घर पर जाकर बड़ा धरना करेंगे और मिशन पूरा न हो तब तक लड़ेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर भी इस मामले में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि, सरकार ने पहले चुनाव प्रणाली का नाश किया और अब लोकतंत्र बचाने के लिए लड़ने वालों को चुप करने के लिए तमाम तरह की युक्तियां आजमा रही है।
अशोक होटल के बाद कांग्रेस ने इस कार्यक्रम के लिए रामलीला मैदान पसंद किया था, क्योंकि पार्टी ने २५ अक्टूबर से ३ नवंबर तक यह जगह बुक कराई हुई थी। हालांकि, वेणुगोपाल ने बताया था कि रामलीला मैदान में भी जब इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने की तैयारी की गई तब पुलिस ने उन्हें रोका था। विपक्ष गठबंधन की २१ पार्टियों ने इस 'मोक महाभियोग' का आयोजन करने का तय किया था। इस कार्यक्रम के लिए ताल्कटोरा स्टेडियम, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, मावलंकर हॉल और डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर जैसी जगहें भी जांची गई थीं, लेकिन किसी भी जगह पर बुकिंग या अनुमति मिल पाई नहीं थी।
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस द्वारा इन आरोपों का खंडन किया गया है। सेंट्रल जिले के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस रोहित राजबीर सिंह ने बताया था कि, सूचित मोक महाभियोग के आयोजन के लिए उनके पास कोई अलग विनंती या अनुमति के लिए पत्र मिला नहीं है। पुलिस ने बताया कि १ नवंबर के दिन रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली रैली के लिए अनुमति दी गई है, जो शर्तों के अधीन है। पुलिस द्वारा जारी किए गए अनुमति पत्र के मुताबिक, यह रैली सुबह १० बजे से शाम ५ बजे तक आयोजित करनी है। पुलिस द्वारा कायदा और व्यवस्था के दृष्टिकोण से 'नो ऑब्जेक्शन' दिया गया है, लेकिन शर्त यह है कि आयोजकों को जमीन की मालकी रखने वाली सत्ताधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी पड़ेगी।
पुलिस ने इस रैली के लिए अनेक सख्त शर्तें लादी हैं, जिसमें सीसीटीवी सर्विलांस, सुरक्षा व्यवस्था, पानी और शौचालय की सुविधा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और भीड़ पर नियंत्रण का समावेश होता है। आयोजकों ने यह सुनिश्चित करना होगा कि रैली शांतिपूर्ण रहे और शाम ५ बजे तक पूर्ण हो जाए। रामलीला मैदान के बाहर किसी भी तरह की मार्च या पदयात्रा की मंजूरी दी गई नहीं है। इसके अलावा, आयोजकों ने आमंत्रितों और स्वयंसेवकों की सूची, मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम और बसों की विवरण भी सबमिट करने होंगे। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर भड़काऊ भाषण दिए जाएंगे तो तुरंत रोकने पड़ेंगे और अगर शर्तों का उल्लंघन होगा तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अनुमति रद्द की जाएगी।
अमेर उजला के अहवाल के मुताबिक, विपक्ष गठबंधन 'इंडिया' ३० अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जनता के बीच महाभियोग' कार्यक्रम आयोजित करेगा। इस कार्यक्रम का हेतु मुख्य चुनाव कमिश्नर के खिलाफ के आरोपों और उन्हें पद से हटाने की मांग को सार्वजनिक मंच पर पेश करना है। हालांकि, संवैधानिक रूप से इस कार्यक्रम की कोई कानूनी असर होगी नहीं। संविधान के मुताबिक मुख्य चुनाव कमिश्नर को पद से हटाने के लिए संसद के दोनों गृहों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, इसलिए यह सार्वजनिक कार्यक्रम आधिकारिक महाभियोग की प्रक्रिया का विकल्प नहीं है, लेकिन यह विपक्ष द्वारा अपनी मांगों को लोगों के समक्ष लाने का एक प्रयास है। विपक्ष इस कार्यक्रम के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं और स्पेशल इंटेन्सिव रिविजन (SIR) के बारे में भी अपना पक्ष पेश कर सकता है।
१ नवंबर की रैली और ३० अक्टूबर के इस कार्यक्रम के द्वारा विपक्ष की आगामी व्यूहरचना स्पष्ट होती है। विपक्ष गठबंधन द्वारा चुनाव प्रणाली में अनियमितताओं और मतदार सूची के सुधार के बारे में भी विरोध प्रदर्शन करने की तैयारियां हैं। फिलहाल इस कार्यक्रम में कौन से नेता भाग लेंगे या कौन से चोक्सेस आरोप पेश किए जाएंगे उसकी विस्तार से जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन विपक्ष ने इस मामले में सरकार के सामने आक्रामक रुख अपनाया है।
इस समाचार का स्रोत
- The Times of India
- अमर उजाला
- The Hindu
- The Hindu
- Mint
- Business Standard
- दैनिक भास्कर
- Hindustan Times
- The Hindu
- अमर उजाला
- Hindustan Times
- Hindustan Times
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