मेघालय में भाजपा की बढ़ती ताकत, कैबिनेट में एक और मंत्री पद की मांग
10 विधायक होने के कारण भाजपा ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा से अतिरिक्त मंत्री पद की मांग की है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 2:07 · अपडेट दोपहर 2:14 · 4 मिनट का पाठ
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मेघालय के राजनीतिक गलियारों में हाल ही में भाजपा की बढ़ती संख्याबल के चलते सत्ता के समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। राज्य में भाजपा के विधायकों की संख्या 10 तक पहुंचने के साथ ही पार्टी ने अब राज्य सरकार में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा से राज्य के मंत्रिमंडल में एक और मंत्री पद की आधिकारिक मांग की है। पार्टी का स्पष्ट मानना है कि गठबंधन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उन्हें कैबिनेट में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
राज्य के पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री सनबोर शुल्लई ने बुधवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि भाजपा के सभी विधायक जल्द ही मुख्यमंत्री कोनराड संगमा से मुलाकात करेंगे और अपनी यह मांग रखेंगे। भाजपा नेताओं का कहना है कि जब गठबंधन में उनकी स्थिति मजबूत हुई है, तो मंत्रिमंडल में भी इसका प्रतिबिंब दिखना जरूरी है। वर्तमान में मेघालय सरकार में भाजपा के दो मंत्री कार्यरत हैं, जिनमें से एक पहले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) में थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे।
इस राजनीतिक बदलाव के पीछे का मुख्य कारण सितंबर महीने में हुई घटनाएं हैं। उस समय यूडीपी के 12 में से 8 विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे, जिससे भाजपा का संख्याबल 2 से बढ़कर 10 हो गया था। इस घटनाक्रम के बाद यूडीपी के बचे हुए 4 विधायकों में से 3 विधायक पिछले महीने नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) में शामिल हो गए थे। इनमें से एक विधायक को सोमवार को मंत्री के रूप में शपथ भी दिलाई गई थी। मंत्री सनबोर शुल्लई ने स्पष्ट किया है कि उन्हें एनपीपी के किसी विधायक को मंत्री बनाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन भाजपा की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
शुल्लई ने आगे कहा कि वर्ष 2023 से भाजपा लगातार एनपीपी के साथ मजबूती से खड़ी रही है। उस समय भी जब अन्य राजनीतिक दल भाजपा के बिना सरकार बनाने की कोशिश कर रहे थे, तब भी भाजपा ने एनपीपी का साथ नहीं छोड़ा था। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुश्किल समय में गठबंधन का साथ देने वाले भाजपा के विधायकों को अब मंत्रिमंडल में उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में किए गए मंत्रिमंडल के फेरबदल और विभागों के आवंटन से पहले एनपीपी ने अपने सहयोगी दल भाजपा के साथ किसी भी प्रकार की चर्चा नहीं की थी। इस पूरी प्रक्रिया में भाजपा को नजरअंदाज किए जाने की भावना पार्टी में व्याप्त है।
इस मामले को लेकर भाजपा के विधायकों ने बुधवार को पार्टी के पूर्वोत्तर सह-प्रभारी राजीव बब्बर से मुलाकात की थी। इस बैठक में राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल और विभागों के बंटवारे को लेकर पार्टी की नाराजगी व्यक्त की गई थी। शुल्लई ने बताया कि मेघालय डेमोक्रेटिक एलायंस (एमडीए) सरकार को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से लगातार समर्थन मिलता रहा है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा के विधायकों को महत्व न देना गठबंधन के लिए सही संकेत नहीं है। अब इस पूरे मामले पर दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ भी बातचीत की जाएगी और उसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
भाजपा इस गठबंधन सरकार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। मेघालय में भाजपा का संख्याबल बढ़ने से अब सत्ता के समीकरणों में बदलाव की मांग उठी है, जो राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।
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