बिहार में डेटिंग ऐप के जरिए इंजीनियर के साथ ₹1.5 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी
डेटिंग ऐप के माध्यम से संपर्क करने वाले जालसाजों ने निवेश के नाम पर इंजीनियर को लाखों का चूना लगाया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 4:07 · 3 मिनट का पाठ
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बिहार में साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक इंजीनियर को डेटिंग ऐप के माध्यम से ₹1.5 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। 'आज तक' की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना में साइबर जालसाजों ने अत्यंत चतुराई से इंजीनियर को अपने जाल में फंसाया था। शुरुआत में डेटिंग ऐप पर परिचय होने के बाद बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और उसके बाद आरोपियों ने पीड़ित को वित्तीय निवेश का लालच दिया। इस प्रक्रिया के दौरान इंजीनियर को विश्वास में लेकर अलग-अलग चरणों में कुल ₹1.5 करोड़ हड़प लिए गए। जब इंजीनियर को समझ आया कि उनके साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई है, तो उन्होंने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। इस प्रकार की घटनाएं दर्शाती हैं कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके निर्दोष लोगों को आर्थिक रूप से बर्बाद किया जा रहा है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
इस घटना में शामिल आरोपियों ने बहुत ही व्यवस्थित तरीके से योजना बनाई थी। डेटिंग ऐप पर दोस्ती करने के बाद, उन्होंने पीड़ित को निवेश के नाम पर अधिक रिटर्न देने का लालच दिया। इंजीनियर को लगा कि यह एक सुरक्षित निवेश है, लेकिन वास्तव में यह साइबर ठगी का एक हिस्सा था। इस प्रकार के घोटालों में आमतौर पर फर्जी वेबसाइटों या एप्लिकेशन का उपयोग किया जाता है, जो निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिखाकर ठगते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में पैसा वापस पाना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि अपराधी ज्यादातर अपनी पहचान छिपाकर काम करते हैं। यह मामला साइबर सुरक्षा के अभाव और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अजनबियों के साथ व्यवहार करते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर देता है।
साइबर अपराध आधुनिक युग की एक गंभीर समस्या है, जिसमें तकनीक का उपयोग करके लोगों की मेहनत की कमाई हड़प ली जाती है। डेटिंग ऐप्स या सोशल मीडिया पर अजनबियों से बात करते समय व्यक्ति को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। विशेष रूप से जब वित्तीय लेनदेन की बात आती है, तो किसी भी प्रकार की जल्दबाजी जोखिम भरी साबित हो सकती है। इस मामले में जांच एजेंसियां अब डिजिटल फुटप्रिंट्स और बैंक लेनदेन के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। बिहार के इस मामले ने देशभर में एक बार फिर साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता जगा दी है।
साइबर अपराध एक ऐसी आपराधिक गतिविधि है जिसमें कंप्यूटर, नेटवर्क या अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके धोखाधड़ी, डेटा चोरी या वित्तीय नुकसान पहुंचाया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ ऐसे अपराधों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। साइबर अपराधी अक्सर नई पद्धतियां अपनाकर आम नागरिकों को निशाना बनाते हैं, जिसके कारण सरकारी एजेंसियों द्वारा समय-समय पर सावधानी बरतने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। इस प्रकार के घोटालों में फंसे लोगों को तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर पर सूचना देनी चाहिए ताकि वित्तीय नुकसान को रोका जा सके।
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