NHAI ने चार लेन और उससे अधिक चौड़े राजमार्गों के लिए बैरियर-लेस टोलिंग गाइडलाइन्स जारी कीं
नई तकनीक के माध्यम से वाहनों को टोल बूथ पर रोके बिना ही टोल संग्रह किया जाएगा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, शाम 5:28 · अपडेट शाम 6:16 · 4 मिनट का पाठ
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देशभर के चार-लेन और उससे अधिक लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम के डिजाइन और बुनियादी ढांचे के मानकीकरण के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। PIB दिल्ली की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य आगामी और वर्तमान में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में तकनीक आधारित, बैरियर-मुक्त टोल संग्रह प्रणाली लागू करना है, ताकि वाहनों को टोल बूथ पर रुकने की आवश्यकता न पड़े।
इस नई व्यवस्था के माध्यम से टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारों और प्रतीक्षा समय को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे टोल प्लाजा पर ईंधन की खपत कम होगी और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम बनेगी। इन दिशा-निर्देशों में टोल प्लाजा के लेआउट, लेन कॉन्फ़िगरेशन, गैन्ट्रीज़, सड़क बुनियादी ढांचे, लाइटिंग, साइनेज और अन्य सहायक सुविधाओं के लिए समान आवश्यकताएं निर्धारित की गई हैं। इसके साथ ही, आगामी और चालू परियोजनाओं के लिए कार्यान्वयन ढांचा भी तैयार किया गया है।
विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग कॉन्फ़िगरेशन के लिए इस पॉलिसी सर्कुलर के माध्यम से मानकीकृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसमें प्लाजा के लेआउट, टोलिंग लेन की संख्या, गैन्ट्रीज़ का प्रावधान और उनकी व्यवस्था, साथ ही सड़क सुरक्षा सुविधाओं, साइनेज और लाइटिंग की व्यवस्था शामिल है। ये सभी कदम देशभर में बैरियर-लेस टोलिंग के कार्यान्वयन में एकरूपता लाने के लिए उठाए गए हैं। पारंपरिक टोल प्लाजा की तुलना में, जहाँ वाहनों को भौतिक बैरियर पर रुकना पड़ता था, अब MLFF सिस्टम में आवश्यक लेन की संख्या को तर्कसंगत बनाया गया है। इससे उपलब्ध स्थान का अधिक कुशल उपयोग होगा और टोलिंग ज़ोन से ट्रैफिक की आवाजाही अधिक तेज़ होगी।
यह गाइडलाइन सभी भविष्य की और वर्तमान में निर्माणाधीन परियोजनाओं पर लागू होगी। जो परियोजनाएं वर्तमान में डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के चरण में हैं, उन्हें अपने दस्तावेजों में इस नए डिजाइन को शामिल करना होगा। जबकि जिन परियोजनाओं को पहले ही आवंटित किया जा चुका है या जिनका निर्माण कार्य चल रहा है, वे लागू अनुबंध के प्रावधानों के माध्यम से इन बदलावों को अपनाएंगे। NHAI के क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे आगामी परियोजनाओं में इन निर्धारित आवश्यकताओं को शामिल करें और चालू परियोजनाओं में इसे अपनाने में मदद करें।
सुरक्षा और उपयोगकर्ताओं की सुविधा पर विशेष जोर दिया गया है। पॉलिसी सर्कुलर में पर्याप्त लाइटिंग, उचित साइनेज और इलेक्ट्रॉनिक वेरिएबल मैसेज साइन्स (VMS) के माध्यम से राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को पहले से जानकारी और मार्गदर्शन देने का प्रावधान है। इससे दृश्यता बढ़ेगी, सड़क उपयोगकर्ता टोलिंग ज़ोन के बारे में सूचित रहेंगे और वाहनों की आवाजाही सुरक्षित रहेगी। इसके अलावा, टोल प्लाजा के कुशल प्रबंधन के लिए प्रशासनिक भवन-सह-ऑपरेशंस और मेंटेनेंस सेंटर के निर्माण का भी प्रावधान किया गया है।
इससे पहले, NHAI ने एक्सप्रेसवे के अलावा हाई-स्पीड एक्सेस कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्गों के नियोजन और डिजाइन के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसका उद्देश्य आगामी हाई-स्पीड नेशनल हाईवे कॉरिडोर के DPR तैयार करने के मानकों में एकरूपता लाना, तकनीकी मानकों में सामंजस्य लाना और सड़क सुरक्षा को मजबूत करना था। MLFF टोल प्लाजा के लिए यह मानकीकृत बुनियादी ढांचा और डिजाइन ढांचा देशभर में बैरियर-लेस टोलिंग के लिए एक समान ढांचा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यात्रियों को निर्बाध अनुभव प्रदान करेगा और टोल संचालन की समग्र दक्षता में वृद्धि करेगा।
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