राहुल गांधी का दावा, E20 पेट्रोल के नाम पर हो रही है धोखाधड़ी
कर्नाटक सरकार की सैंपल रिपोर्ट के आधार पर मोदी सरकार और तेल कंपनियों पर साधा निशाना
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, दोपहर 1:15 · अपडेट दोपहर 3:59 · 5 मिनट का पाठ
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लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार, 7 नवंबर 2026 को E20 पेट्रोल के कार्यान्वयन के मुद्दे पर मोदी सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि E20 पेट्रोल के नाम पर देश में बड़ी धोखाधड़ी हो रही है और पेट्रोलियम कंपनियां निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिला रही हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हिंदी में एक पोस्ट साझा कर इस मुद्दे को उठाया, जिसमें उन्होंने लिखा, “E20 अब 420 बन गया है - जनता की गाड़ी से पेट्रोल चोरी हो रहा है!” यहाँ उन्होंने पूर्व भारतीय दंड संहिता की धारा 420 का उल्लेख किया, जो धोखाधड़ी से संबंधित है।
राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार दावा करती है कि पेट्रोल में 20% इथेनॉल है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। कर्नाटक सरकार द्वारा एकत्र किए गए नमूनों के परीक्षण परिणामों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ने 7 जिलों से पेट्रोल के नमूने लेकर एक मान्यता प्राप्त लैब में उनकी जांच करवाई थी। इस जांच के परिणाम चौंकाने वाले हैं, जिसमें कुल 14 नमूनों में से 11 नमूनों में इथेनॉल की मात्रा 20% से अधिक पाई गई। राहुल गांधी के दावे के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) में 31.2% और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) में 30.5% इथेनॉल पाया गया।
उन्होंने आगे कहा कि इसमें केवल सरकारी कंपनियां ही नहीं, बल्कि निजी कंपनियां भी शामिल हैं। IOCL, HPCL, BPCL, नायरा और शेल जैसी कंपनियों के नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी हो या निजी, सभी कंपनियों ने निर्धारित सीमा का उल्लंघन किया है। राहुल गांधी ने गंभीर आरोप लगाया कि इन कंपनियों की अपनी प्रयोगशालाओं ने रिपोर्ट में इथेनॉल की मात्रा का विवरण तक नहीं लिखा है। इसका अर्थ है कि जनता से महंगे पेट्रोल के पैसे लिए जा रहे हैं, लेकिन उनकी गाड़ियों की टंकी में अत्यधिक इथेनॉल भरा जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को सीधा नुकसान हो रहा है।
वाहनों पर इसके प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए गांधी ने कहा कि आम लोगों की गाड़ियां इतने अधिक इथेनॉल को सहने के लिए नहीं बनी हैं। अत्यधिक इथेनॉल के कारण गाड़ी का माइलेज घट जाता है और बार-बार मैकेनिक के पास जाना पड़ता है, जिससे लोगों द्वारा शौक से खरीदी गई गाड़ियों की बर्बादी हो रही है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि पेट्रोल पंप पर टंकी में क्या भरा जा रहा है, इसकी कोई स्पष्टता या लेबल नहीं लगाया गया है, जिससे ग्राहकों के पास चुनाव का कोई विकल्प नहीं बचता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे सवाल पूछते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मोदी जी, बताइए कि देश की टंकी में वास्तव में क्या भरा जा रहा है? पेट्रोल में वास्तव में कितना इथेनॉल है? 20% से अधिक मिलावट करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब की जाएगी?” इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को खुली चर्चा के लिए दी अपनी चुनौती को दोहराया और कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग के इस मुद्दे को भी उस चर्चा में जोड़ लिया जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि सरकार की इन नीतियों से वास्तव में किसे फायदा हो रहा है?
NDTV इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि सरकारी और निजी दोनों तरह की कंपनियां सीमा से अधिक इथेनॉल मिला रही हैं और रिपोर्ट में इसकी जानकारी छिपाई जा रही है। यह पूरा विवाद कर्नाटक सरकार के एक खुलासे के बाद उभरा है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले और कानूनी माप मंत्री रिज़वान अरशद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुरा, बेंगलुरु रूरल, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु जिलों से नमूने लिए गए थे। इन नमूनों की जांच बेंगलुरु के लेबर रिसर्च इंस्टीट्यूट में की गई, जो नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) द्वारा मान्यता प्राप्त और ISO प्रमाणित है। इस लैब की रिपोर्ट में ही IOCL और HPCL के नमूनों में क्रमशः 31.2% और 30.5% इथेनॉल दर्ज किया गया था, जिसके आधार पर कर्नाटक सरकार ने कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
राहुल गांधी ने इस घटना को जनता के साथ हुई धोखाधड़ी बताया है और केंद्र सरकार से इस मामले में पारदर्शिता की मांग की है।
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