तमिलनाडु में तस्माक कर्मचारियों ने शराब की बोतल बायबैक योजना का विरोध किया
नई पर्यावरण उपकर प्रणाली के कार्यान्वयन के पहले दिन कई रिटेल आउटलेट बंद रहे
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 12:57 · अपडेट दोपहर 1:44 · 2 मिनट का पाठ
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तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (तस्माक) द्वारा खाली शराब की बोतलों पर रिफंड देने की नई 'बायबैक' योजना के कार्यान्वयन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हुई हैं। इस योजना के कार्यान्वयन के पहले ही दिन कई रिटेल आउटलेट बिना किसी पूर्व सूचना के बंद रहे, जिससे इस योजना के रोलआउट में मुश्किलें आई हैं।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, तस्माक ने 1 नवंबर, 2026 से सभी प्रकार की शराब की बोतलों के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में ₹10 की वृद्धि की है। इस अतिरिक्त राशि को 'पर्यावरण उपकर' (एनवायरनमेंट सेस) के रूप में पहचाना गया है। इस नई व्यवस्था के तहत, जब ग्राहक रिटेल शॉप पर खाली बोतलें वापस करेंगे, तो वे ₹10 का रिफंड पाने के पात्र होंगे।
हालांकि, इस योजना का कर्मचारियों द्वारा विरोध किया जा रहा है। कर्मचारियों ने इस विरोध के लिए मुख्य रूप से दो कारण बताए हैं। पहला, पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनों में तकनीकी खामियां देखी जा रही हैं। दूसरा, वापस आई खाली बोतलों के भंडारण के लिए दुकानों में पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। इस स्थिति ने नई प्रणाली लागू करने के लिए कॉरपोरेशन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में MRP से ₹10 अधिक लेने की लंबे समय से चली आ रही प्रथा है। तस्माक आउटलेट्स पर यह प्रथा विवादास्पद रही थी। पिछली सरकारों ने इस प्रथा पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद यह जारी रही। कर्मचारियों का दावा था कि इस अतिरिक्त धन का उपयोग बोतल टूटने, इंटरनेट शुल्क और अन्य फुटकर खर्चों को पूरा करने के लिए किया जाता था।
वर्तमान में, TVK के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा सत्ता संभालने के बाद इस मुद्दे की कड़ी जांच की गई है। परिणामस्वरूप, सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं और MRP से अधिक पैसे वसूलने वाले कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इस कड़ी कार्रवाई के बाद ही तस्माक ने पर्यावरण उपकर और बायबैक योजना की घोषणा की थी, लेकिन अब कर्मचारियों के विरोध के कारण यह योजना मुश्किल में पड़ गई है।
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