कर्नाटक सरकार कौशल विकास के लिए ₹5,000 करोड़ का बजट करेगी घोषित
अगले सात वर्षों में 30 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षण देने के लिए एकीकृत प्रणाली बनाने की योजना
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:59 · अपडेट सुबह 3:08 · 4 मिनट का पाठ
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य के बिखरे हुए कौशल विकास प्रयासों को एकीकृत कर एक सिंगल यूनिफाइड सिस्टम में लाने की बड़ी योजना घोषित की है। बेंगलुरु स्किल समिट में बुधवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले सात वर्षों की अवधि के दौरान इस योजना के तहत लगभग ₹5,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य 30 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षण देना है।
भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राज्य के कार्यबल के ढांचे में बुनियादी बदलाव करने हेतु 'स्टेट विजन ग्रुप फॉर स्किल डेवलपमेंट' का गठन किया गया है। माइंडट्री के सह-संस्थापक सुब्रतो बागची की अध्यक्षता में इस नए समूह का कार्य संचालित होगा। यह विजन ग्रुप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन एनर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल सर्विसेज जैसे अत्यधिक तकनीकी और उभरते क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, यह नीतिगत बदलाव ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक हर साल एक लाख से अधिक इंजीनियरिंग स्नातक तैयार करता है, लेकिन उनमें से कई लोगों को कम आय वाली एंट्री-लेवल नौकरियां करनी पड़ती हैं या वे अल्प-रोजगार का सामना कर रहे हैं। वर्तमान में बेंगलुरु में 550 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) कार्यरत हैं और 2029 तक और 500 सेंटर्स के लक्ष्य के साथ, राज्य सरकार आगामी 3.5 लाख संभावित नौकरियों के बाजार में आने से पहले व्यावसायिक प्रशिक्षण इकोसिस्टम को अपग्रेड करने की कोशिश कर रही है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि कॉर्पोरेट भर्ती के लिए अब पारंपरिक डिग्रियां मुख्य मानदंड नहीं रही हैं। उन्होंने इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय बाजारों से तुलना करते हुए कहा कि वहां औपचारिक प्रमाण पत्र की तुलना में व्यावहारिक क्षमता को अधिक महत्व दिया जाता है। राज्य की जनसंख्या के 65% लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं, जो राज्य के डेमोग्राफिक डिविडेंड का लाभ उठाने की योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस समिट के दौरान स्थानीय इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (ITIs) के साथ 40 से अधिक समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। अधिकारियों के अनुसार, इन समझौतों से 'कौशल कर्नाटक योजना' के ढांचे के तहत क्षेत्रीय युवाओं के लिए तत्काल 10,000 से अधिक नौकरियां सुरक्षित होंगी।
कौशल संपन्न प्रतिभाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री ने 'उद्योग सेतु' नामक डिजिटल रोजगार प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। यह प्लेटफॉर्म एआई (AI) आधारित एक एकीकृत कौशल विकास और रोजगार पोर्टल है, जो स्थानीय नौकरी खोजने वालों को प्रमाणित निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं के साथ सीधा संपर्क कराता है। यह प्लेटफॉर्म कर्नाटक स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (KSDC) और कौशल विकास, उद्यमिता और आजीविका विभाग के तहत कार्य करता है। यह नौकरी खोजने वालों और कॉर्पोरेट नियोक्ताओं के बीच सीधा जुड़ाव कर 'सीमलेस जॉब मैचिंग' प्रदान करेगा। कंपनियां इस पोर्टल पर पूरी तरह से मुफ्त पंजीकरण कर सकती हैं और अपनी रिक्तियां पोस्ट कर सकती हैं। यह प्लेटफॉर्म मुख्यमंत्री कौशल कर्नाटक योजना (CMKKY) और 'नल जल मित्र' तथा जेल के कैदियों के लिए विशेष प्रशिक्षण जैसे लक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सुविधा भी प्रदान करेगा।
कर्नाटक दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है जिसे प्रौद्योगिकी और उद्योगों का केंद्र माना जाता है। राज्य सरकार लंबे समय से विभिन्न कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आधुनिक युग के लिए तैयार करने का प्रयास कर रही है।
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