गोवा में 97 मतदाताओं के नाम पुन: बहाल करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का चुनाव आयोग को आदेश
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान नाम हटाए जाने के खिलाफ कोर्ट ने चुनाव आयोग को 10 दिन का समय दिया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 9:36 · अपडेट दोपहर 1:31 · 3 मिनट का पाठ
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बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने चुनाव आयोग (ECI) को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए 97 मतदाताओं के नाम फिर से जोड़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए चुनाव आयोग को 10 दिन का समय दिया है और पते की पुष्टि करने के बाद नाम जोड़ने को कहा है। कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा किए गए इस आदेश पर रोक लगाने की मांग को भी खारिज कर दिया था।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह कानूनी विवाद गोवा के साल्गांकर परिवार से जुड़ा है। इस परिवार के पांच सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। परिवार के सदस्यों ने अपने पते में बदलाव करने के लिए फॉर्म 8 भरकर आवेदन किया था, फिर भी SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। इस निर्णय को चुनौती देते हुए परिवार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें नाम हटाए जाने और फॉर्म 8 के आवेदन को खारिज करने की कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई थी।
चुनाव आयोग ने इस मामले में तर्क दिया कि SIR से संबंधित मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए इस मामले की सुनवाई टाल दी जानी चाहिए। हालांकि, इस तर्क को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गोवा का यह मामला अलग है, क्योंकि यहाँ मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने आगे इस बात पर जोर दिया कि पात्र नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर रहने से बचाना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि नाम हटाने से पहले सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।
इस विवाद में फॉर्म की प्रक्रिया के संबंध में भी महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए थे। फॉर्म 6 का उपयोग नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए किया जाता है, जबकि फॉर्म 8 का उपयोग पहले से पंजीकृत मतदाताओं के रिकॉर्ड में सुधार करने या पता बदलने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति पहली बार मतदाता बनना चाहता है तो उसे फॉर्म 6 भरना होगा, लेकिन यदि कोई व्यक्ति पहले से पंजीकृत है और उसका पता बदल गया है तो उसे फॉर्म 8 भरना होगा।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया कि उन्होंने SIR के फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार इस प्रकार के बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। आयोग ने यह भी बताया कि सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। SIR को लेकर पिछले एक महीने से विवाद चल रहा है।
चुनाव आयोग भारत सरकार का एक संवैधानिक संस्थान था जो देश में चुनावों का आयोजन और संचालन करता था। यह स्वतंत्र रूप से कार्य करता था और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाता था।
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