सोनम वांगचुक ने राष्ट्रपति मुर्मू से की अपील, लद्दाख प्रशासन पर लगाया मानहानि का आरोप
दावा किया कि लेफ्टिनेंट गवर्नर के नेतृत्व वाले प्रशासन ने उनकी और अन्य आलोचकों की छवि खराब करने का प्रयास किया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, शाम 5:27 · अपडेट सुबह 12:14 · 4 मिनट का पाठ
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पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लद्दाख में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक ने आरोप लगाया है कि लेफ्टिनेंट गवर्नर के नेतृत्व वाला प्रशासन उनके और केंद्र शासित प्रदेश के अन्य आलोचकों के खिलाफ लक्षित मानहानि और छवि खराब करने का अभियान चला रहा है।
यह अपील ऐसे समय में आई है जब वांगचुक से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। अगस्त 2025 में 'हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख' (HIAL) के भूमि लीज रद्द कर दिए गए थे। प्रशासन के अनुसार, यह निर्णय लीज डीड को पूरा करने में विफलता, निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक प्रीमियम का भुगतान न करने और भूमि का निर्धारित उपयोग न करने के कारण लिया गया था। इसके अलावा, प्रशासन ने HIAL को उसके 'डेजर्ट फ्लावर स्कूल' के संचालन से संबंधित और गतिविधियां न करने का निर्देश दिया है।
दूसरी ओर, शनिवार को लेह की लेबर कोर्ट ने HIAL के एक पूर्व कर्मचारी को कानूनी प्रसूति लाभ न देने और अनुचित व्यवहार के आरोपों वाले मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। सोनम वांगचुक और HIAL की सह-संस्थापक एवं CEO उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने भूमि सौदे में हुई देरी के लिए नौकरशाही बाधाओं को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लीज रद्द करना लद्दाख के लिए राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची के संरक्षण के लिए चल रहे अभियान से जुड़ी एक राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई है।
वांगचुक ने X पर एक वीडियो संदेश पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने अपने वकीलों द्वारा किए गए 'स्टिंग ऑपरेशन' के अंश जारी किए। उन्होंने दावा किया कि दो सोशल मीडिया पेजों से जुड़ी एक क्रिएटिव एजेंसी उन्हें निशाना बनाने और लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना के काम को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही थी। वांगचुक के अनुसार, 13 अक्टूबर को मुंबई में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सक्सेना ने उनके बारे में टिप्पणी की थी, और उसके अगले ही दिन 14 अक्टूबर को 'लद्दाख लेंस' और 'लद्दाख विजन' नाम के दो फेसबुक और इंस्टाग्राम पेज सामने आए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों पेज एक ही क्रिएटिव एजेंसी द्वारा बनाए गए थे, जिसके कारण उनके वकीलों ने जांच की। वीडियो में वकीलों और एजेंसी के कथित मालिक के बीच बातचीत है, जिसमें मालिक LG की टीम के साथ संभावित संबंधों की बात करता है, लद्दाख में संपर्क उपलब्ध कराने की पेशकश करता है और उल्लेख करता है कि काम पुणे स्थित एक कंपनी द्वारा संभाला जा रहा है। वांगचुक ने कहा कि यह बातचीत दर्शाती है कि LG प्रशासन आलोचकों के खिलाफ ऑनलाइन अभियान चला रहा है और लद्दाखी नेताओं की छवि खराब करने के लिए राष्ट्रीय संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।
राष्ट्रपति को की गई अपील में वांगचुक ने लद्दाख में शासन के संबंध में व्यापक चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि LG प्रशासन के तहत लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध हैं। उन्होंने आगे बताया कि सोशल मीडिया पर केवल कमेंट और लाइक करने के कारण भी FIR और गिरफ्तारियां की गई हैं। प्रशासनिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि भूमि, उद्योग, ऊर्जा और पर्यटन नीतियां स्थानीय समुदायों के नुकसान कर कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने शराब नीति की भी आलोचना की और कहा कि प्रशासन ने गांवों में शराब बिक्री केंद्र स्थापित करने के लिए आवश्यक NOC की संख्या 16 से घटाकर 6 कर दी है, जिससे इसे आसान बनाया जा रहा है।
वांगचुक ने बताया कि उनसे जुड़ी संस्थाएं प्रशासनिक उत्पीड़न का सामना कर रही हैं। उन्होंने शुरू में इस स्टिंग ऑपरेशन की सामग्री केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ साझा की थी और हस्तक्षेप की मांग की थी, लेकिन कुछ बातचीत के बाद संपर्क टूट गया। उन्होंने कहा कि देश की गरिमा और नैतिकता प्रभावित न हो, इसलिए वे इस सामग्री को सार्वजनिक करने में हिचकिचा रहे थे, इसलिए उन्होंने केवल चयनित अंश ही जारी किए हैं और अन्य सामग्री फिलहाल सुरक्षित रखी है।
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