ब्रह्मांड में परग्रही जीवों की खोज अब 'एजेंटिक AI' के भरोसे: जब मशीनें ही मशीनों को खोजेंगी
पृथ्वी के बाहर बुद्धिमान जीवन की खोज में अब स्वायत्त AI एजेंट शामिल हो गए हैं, जो सेकंडों में टेराबाइट्स डेटा की जांच कर परग्रही जीवों के संकेतों का पता लगाएंगे।

विज्ञान कथा (science fiction) में हमने हमेशा यह सुना है कि जब भी हम परग्रही जीवों (extraterrestrials) से मिलेंगे, तो वे किसी 'हरे रंग के छोटे मानवों' जैसे होंगे। लेकिन वास्तविकता शायद इससे बिल्कुल अलग हो सकती है। पृथ्वी के बाहर बुद्धिमान जीवन की खोज (SETI - Search for Extraterrestrial Intelligence) में अब एक बड़ा मोड़ आया है। वैज्ञानिक अब ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट बना रहे हैं जो ब्रह्मांड में किसी अन्य उन्नत सभ्यता द्वारा भेजे गए AI एजेंटों के संकेतों को सुनेंगे। यह एक ऐसी क्रांति है जहाँ मानव निर्मित मशीनें, परग्रही जीवों की मशीनों को खोजने का प्रयास करेंगी।
ब्रेकथ्रू लिसन (Breakthrough Listen) और SETI इंस्टीट्यूट अब अपनी दैनिक खोज में 'एजेंटिक AI' (Agentic AI) का उपयोग कर रहे हैं। कैलिफोर्निया में स्थित एलन टेलीस्कोप एरे (Allen Telescope Array) में, ये AI एजेंट अब केवल डेटा की जांच नहीं करते हैं, बल्कि वे स्वयं टेलीस्कोप को दिशा दे सकते हैं, आने वाले डेटा में सुधार कर सकते हैं और केवल एक सामान्य भाषा के अनुरोध (natural language request) से जटिल मॉडल लागू कर सकते हैं। NVIDIA की घोषणा के अनुसार, यह तकनीक ब्रह्मांड से आने वाले डेटा के विशाल प्रवाह को प्रोसेस करने की क्षमता में कई गुना वृद्धि करती है।
एजेंटिक AI क्या है और यह सामान्य AI से कैसे अलग है?
सामान्यतः हम जिस AI का उपयोग करते हैं, जैसे कि चैटबॉट्स, वे केवल हमारे प्रश्नों के उत्तर देते हैं। इसे 'टूल-लाइक AI' (tool-like AI) कहा जा सकता है। लेकिन एजेंटिक AI (agentic AI) एक ऐसा प्रोग्राम है जो मानवीय हस्तक्षेप के बिना स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकता है, लक्ष्य निर्धारित कर सकता है और उन्हें पूरा करने के लिए कदम उठा सकता है। विकिपीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंटिक AI में लक्ष्य-उन्मुख व्यवहार, बाहरी उपकरणों का उपयोग करने की क्षमता और जटिल कार्यों को स्वायत्त रूप से पूरा करने की शक्ति होती है।
इन एजेंटों के पीछे लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) यानी भाषा के विशाल मॉडल काम करते हैं, जो उन्हें तर्क करने की शक्ति देते हैं। एक 'एजेंट हार्नेस' (agent harness) या स्कैफोल्ड नामक सॉफ्टवेयर लेयर इस मॉडल के चारों ओर होती है, जो इसे कंप्यूटर हार्डवेयर, डेटा फाइलों और टेलीस्कोप जैसे उपकरणों के साथ जोड़ती है। इससे AI केवल बातें ही नहीं करता, बल्कि वास्तविक दुनिया में काम भी कर सकता है।
- आदेश ग्रहणवैज्ञानिक सामान्य भाषा में टेलीस्कोप को निर्देश देते हैं.
- स्वायत्त संचालनAI एजेंट टेलीस्कोप के एंटीना को सटीक तारे की ओर घुमाता है.
- डेटा प्रोसेसिंगGPU की मदद से डेटा को रीयल-टाइम में फिल्टर और सुधारता है.
- परिणाम प्रदर्शनAI एजेंट स्पेक्ट्रोग्राम तैयार करके वैज्ञानिकों को परिणाम दिखाता है.
- प्राकृतिक भाषा में आदेशवैज्ञानिक सामान्य अंग्रेजी में आदेश देते हैं, जैसे कि 'अमुक तारे पर ध्यान केंद्रित करें'.
- एजेंट द्वारा नियोजनNexus ऑर्केस्ट्रेटर इस आदेश को समझता है और टेलीस्कोप के एंटीना को घुमाता है.
- एलन टेलीस्कोप एरे में उपयोग की जाने वाली रेडियो डिश जैसी एंटीना प्रणाली.
- रीयल-टाइम डेटा प्रोसेसिंगNVIDIA Holoscan और DAQIRI की मदद से डेटा सीधे GPU मेमोरी में जाता है.
- त्रुटि सुधार और विश्लेषणAI एजेंट डेटा में आने वाली खामियों को सुधारता है और तुरंत स्पेक्ट्रोग्राम तैयार करता है.
डेटा का महासागर और प्रोसेसिंग की चुनौती
जब रेडियो टेलीस्कोप अंतरिक्ष की ओर देखते हैं, तो वे अविश्वसनीय मात्रा में डेटा उत्पन्न करते हैं। एलन टेलीस्कोप एरे जैसे उपकरण प्रति सेकंड टेराबिट्स (terabits) डेटा उत्पन्न करते हैं। इतने सारे डेटा को हार्ड ड्राइव में सेव करना और फिर महीनों तक उसकी जांच करना पुरानी पद्धति थी। NVIDIA Holoscan प्लेटफॉर्म की मदद से अब इस डेटा को 'इन फ्लाइट' (in flight), यानी डेटा आते समय ही प्रोसेस किया जाता है।
इस सिस्टम में DAQIRI नामक लाइब्रेरी का उपयोग होता है, जो टेलीस्कोप के सेंसर डेटा को सीधे GPU (Graphics Processing Unit) मेमोरी में खींच लेती है। GPU एक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट है जो बहुत ही तेज़ गणनाएं करने के लिए जानी जाती है। इस प्रक्रिया में CyberEther नामक फ्रेमवर्क गणितीय गणनाएं करता है। NVIDIA RTX PRO 6000 Blackwell GPUs का उपयोग करके यह सिस्टम प्रति सेकंड 2.4 टेराबिट्स डेटा हैंडल कर सकता है। इतनी गति होने के कारण वैज्ञानिक अब रियल-टाइम में अंतरिक्षीय घटनाओं पर नज़र रख सकते हैं।
Tbps (ટેરાબિટ્સ પ્રતિ સેકન્ડ)
नेक्सस: टेलीस्कोप का नया सारथी
इस पूरी प्रणाली का संचालन 'नेक्सस' (Nexus) नामक वेब-आधारित ऑर्केस्ट्रेटर करता है। यह एजेंट के लिए एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है जहाँ से वह टेलीस्कोप की स्थिति जान सकता है और उसे आदेश दे सकता है। शोधकर्ता अब केवल टाइप करके कह सकते हैं कि, "किसी तारे की ओर टेलीस्कोप घुमाएं और वहां से आने वाले सिग्नल का स्पेक्ट्रोग्राम (spectrogram) दिखाएं।" स्पेक्ट्रोग्राम यानी तरंगों का दृश्य निरूपण (visual representation)।
AI एजेंट इस आदेश को समझकर टेलीस्कोप के एंटीना को घुमाता है, सिग्नल को साफ करने के लिए इंस्ट्रूमेंट को कैलिब्रेट (calibrate) करता है और डेटा में आने वाली त्रुटियों को सुधारता है। जो काम करने में इंसानों को सप्ताह या वर्ष लगते थे, वह अब ये एजेंट केवल घंटों में कर देते हैं। इस सिस्टम की सफलता का पहला प्रमाण तब मिला जब उसने क्रैब नेबुला (Crab Nebula) से आने वाले पल्सर (pulsar) के संकेतों को रियल-टाइम में खोज निकाला। पल्सर एक तेजी से घूमने वाला मृत तारा है जो ब्रह्मांड में लाइटहाउस की तरह प्रकाश के पल्स छोड़ता है।

| घटक का नाम | कार्य |
|---|---|
| NVIDIA RTX 6000 | तेज़ गणना के लिए शक्तिशाली GPUs |
| Nexus | एजेंट ऑर्केस्ट्रेटर और कंट्रोल पैनल |
| DAQIRI | सेंसर डेटा को सीधे मेमोरी में लाने वाली लाइब्रेरी |
| CyberEther | सिग्नल प्रोसेसिंग के लिए गणितीय फ्रेमवर्क |
इतिहास और SETI की यात्रा
परग्रहवासियों की खोज का इतिहास काफी पुराना है। 1896 में निकोला टेस्ला ने सुझाव दिया था कि मंगल ग्रह पर संपर्क करने के लिए वायरलेस इलेक्ट्रिकल ट्रांसमिशन का उपयोग किया जा सकता है। 1960 में फ्रैंक ड्रेक ने 'प्रोजेक्ट ओज्मा' (Project Ozma) के माध्यम से आधुनिक SETI प्रयोग की शुरुआत की थी। 1977 में 'Wow!' सिग्नल की खोज हुई थी, जिसे अब तक का सबसे मजबूत संभावित परग्रहवासी संकेत माना जाता है, हालांकि वह फिर कभी नहीं मिला।
विकिपीडिया के अनुसार, 2015 में स्टीफन हॉकिंग और यूरी मिलनर ने 100 मिलियन डॉलर की लागत से 'ब्रेकथ्रू लिसन' प्रोजेक्ट शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य निकटवर्ती तारों से आने वाले संकेतों को पकड़ना है। अब तक की खोज में कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं, जिसे 'फर्मी पैराडॉक्स' (Fermi paradox) के रूप में जाना जाता है - यानी यदि ब्रह्मांड इतना विशाल है, तो अब तक हमें कोई मिला क्यों नहीं है? एजेंटिक AI शायद इस प्रश्न का उत्तर खोजने में मदद कर सकता है।
भारत और आम इंसान के लिए इसका महत्व
हालांकि ये प्रयोग अभी अमेरिका के टेलीस्कोप पर हो रहे हैं, लेकिन इसका प्रभाव वैश्विक है। भारत भी अंतरिक्ष विज्ञान में लंबी छलांग लगा रहा है, और ऐसी AI तकनीक भविष्य में भारतीय रेडियो टेलीस्कोप में भी इस्तेमाल की जा सकती है। आम लोगों के लिए इसका अर्थ यह है कि हम ब्रह्मांड को समझने की अपनी क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। एजेंटिक AI न केवल अंतरिक्ष में, बल्कि पृथ्वी पर भी सरकारी सेवाओं, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डेटा एनालिसिस में इस्तेमाल किया जाने लगा है।
SETI इंस्टीट्यूट के एंड्रयू सिमियन के अनुसार, जब हमारी नई एजेंटिक ऑब्जर्वेटरीज ब्रह्मांड में खोज करेंगी, तो उन्हें जो मिलेगा वह शायद इंसानों से अधिक उनके अपने (AI) जैसा होगा। यह डरने की बात नहीं है, बल्कि एक 'अनुवाद की सफलता' (breakthrough in translation) है। शायद अन्य सभ्यताएं भी अपने AI एजेंटों के माध्यम से ही संदेश भेज रही हों।
भविष्य की दिशा: चंद्रमा पर AI?
शोधकर्ता अब NVIDIA Nemotron जैसे ओपन मॉडल्स का मूल्यांकन कर रहे हैं। भविष्य में ऐसी योजना है कि चंद्रमा के दूसरी ओर (far side of the moon), जहां पृथ्वी की रेडियो तरंगों का अवरोध न हो, वहां स्वायत्त ऑब्जर्वेटरीज स्थापित की जाएं। ये ऑब्जर्वेटरीज इंटरनेट के बिना ऑफलाइन रहकर भी एजेंटिक AI की मदद से स्वतंत्र रूप से काम कर सकेंगी।
अभी भी कई प्रश्न अनुत्तरित हैं। क्या हम वास्तव में कोई संकेत पकड़ पाएंगे? यदि वह संकेत किसी AI एजेंट द्वारा भेजा गया होगा, तो क्या हम उसे समझ पाएंगे? अभी तो हम केवल इतना ही जानते हैं कि हमारे पास अब एक ऐसा साथी है जो कभी थकता नहीं है और जिसकी नजर हमसे लाखों गुना तेज है। ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने के लिए अब इंसान और मशीन कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं।


