ब्लू ओरिजिन का 'नॉर्थस्टार' इंजन: अंतरिक्ष विज्ञान में कम लागत में बड़ी क्रांति लाने की तैयारी
जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन ने अपने नए 'नॉर्थस्टार' इंजन की घोषणा की है, जो पुराने इंजन से 75% सस्ता और अधिक शक्तिशाली होगा।

अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अभी एक नई स्पर्धा चल रही है: कैसे कम खर्च में और अधिक तेजी से रॉकेट को अन्तरिक्ष में भेजा जा सकता है। इस दिशा में जेफ बेजोस की स्वामित्व वाली कंपनी Blue Origin ने एक बड़ी घोषणा की है। फ्लोरिडा में आयोजित UP.Summit कॉन्फ्रेंस के दौरान कंपनी के चीफ एक्सीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) डेव लिम्प ने बताया कि वे 'नॉर्थस्टार' (Northstar) नामक एक नया और अत्यधिक कार्यक्षम रॉकेट इंजन बना रहे हैं। यह इंजन केवल शक्तिशाली ही नहीं है, बल्कि इसे बनाने का खर्च मौजूदा इंजन की तुलना में चौथे हिस्से यानी ७५% जितना कम होगा। यह विकास ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में सैटेलाइट लॉन्च करने की मांग अभूतपूर्व तरीके से बढ़ रही है।
ब्लू ओरिजिन का लक्ष्य उनके न्यू ग्लेन (New Glenn) रॉकेट को वर्ष में १,००० से अधिक बार लॉन्च करना है। इतनी बड़ी संख्या में लॉन्चिंग तभी संभव हो सकती है जब रॉकेट के इंजन सस्ते हों और उन्हें बहुत तेजी से बनाया जा सके। डेव लिम्प के अनुसार, नॉर्थस्टार इंजन यह ब्लू ओरिजिन के मौजूदा BE-4 इंजन का अधिक सरल और शक्तिशाली संस्करण है। BE-4 इंजन अभी New Glenn रॉकेट के पहले स्टेज में इस्तेमाल होता है और यह यूनाइटेड लॉन्च अलायंस (ULA) के वल्कन (Vulcan) रॉकेट को भी पावर देता है। नॉर्थस्टार इंजन आखिरकार BE-4 का स्थान लेगा, जो कंपनी के लिए खर्च घटाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
BE-४ इंजन का इतिहास और उसकी भूमिका
नॉर्थस्टार को समझने के लिए इसके पूर्ववर्ती BE-4 (Blue Engine 4) के बारे में जानना आवश्यक है। BE-4 यह ब्लू ओरिजिन द्वारा विकसित किया गया लिक्विड रॉकेट इंजन है, जो ईंधन के रूप में लिक्विफाइड मीथेन (methane) और लिक्विड ऑक्सीजन का उपयोग करता है। मीथेन यह प्राकृतिक गैस का तरल रूप है जिसे रॉकेट के लिए स्वच्छ और कार्यक्षम ईंधन माना जाता है। BE-4 इंजन 'ऑक्सीजन-रिच स्टेज्ड कम्बशन साइकिल' (oxygen-rich staged combustion cycle) पर काम करता है। यह एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें ईंधन और ऑक्सीजन को दहन करने से पहले एक प्री-बर्नर में आंशिक रूप से जलाया जाता है, ताकि इंजन अधिक शक्ति पैदा कर सके।
विकिपीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, BE-4 का निर्माण २०११ में शुरू हुआ था और इसकी आधिकारिक घोषणा २०१४ में की गई थी। यह इंजन समुद्र की सतह पर २,८०० किलोन्यूटन (kN) या ६,४०,००० पाउंड का थ्रस्ट (thrust) पैदा करता है। थ्रस्ट यानी रॉकेट को ऊपर धकेलने के लिए इंजन द्वारा पैदा किया जाने वाला बल। BE-4 इंजन का उपयोग करके ही वल्कन सेंटौर (Vulcan Centaur) रॉकेट ने ८ जनवरी, २०२४ के दिन अपनी पहली सफल उड़ान भरी थी। ब्लू ओरिजिन के अपने New Glenn रॉकेट ने भी १६ जनवरी, २०२५ के दिन इस इंजन के साथ पहली बार कक्षा में प्रवेश किया था।
नॉर्थस्टार: डिजाइन में भारी बदलाव और ३डी-प्रिंटिंग
नॉर्थस्टार इंजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता है। डेव लिम्प के अनुसार, इस नए इंजन में BE-4 की तुलना में पुर्जों की संख्या आधी कर दी गई है। किसी भी मशीन में जितने कम पुर्जे होते हैं, उतनी ही उसकी विफलता की संभावना कम होती है और उसे असेंबल करना आसान बनता है। इसके अलावा, नॉर्थस्टार का वजन BE-4 से ३०% कम है। वजन में कमी आने से रॉकेट अधिक पेलोड (payload) यानी सैटेलाइट या अन्य उपकरण अंतरिक्ष में ले जा सकता है। पेलोड वह वजनदार सामान है जो रॉकेट द्वारा अंतरिक्ष में ले जाया जाता है।
इस इंजन के उत्पादन में ३डी-प्रिंटिंग (3D-printing) तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया है। ३डी-प्रिंटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कंप्यूटर डिज़ाइन के आधार पर धातु की परत पर परत जोड़कर जटिल पुर्जे बनाए जाते हैं। नॉर्थस्टार इंजन के लगभग ६५% पुर्जे इस तकनीक से बनाए जाएंगे। इससे उत्पादन का समय इतना घट जाएगा कि कंपनी भविष्य में एक दिन से भी कम समय में एक पूरा इंजन असेंबल कर सकेगी। अभी रॉकेट इंजन बनाने में महीनों का समय लगता है, उसकी तुलना में यह एक क्रांतिकारी बदलाव है।
- डिज़ाइन का सरलीकरणBE-4 की तुलना में भागों की संख्या 50% घटाकर डिज़ाइन को सरल बनाया जाता है।
- 3डी-प्रिंटिंगइंजन के 65% जितने जटिल भागों को 3डी-प्रिंटिंग तकनीक से तेज़ी से तैयार किया जाता है।
- असेंबलीकम भाग होने के कारण पूरा इंजन एक दिन से भी कम समय में जोड़ा जा सकता है।
- परीक्षणतैयार हुए इंजन का ग्राउंड टेस्ट फायरिंग करके उसकी क्षमता जाँची जाती है।
आंकड़ों का खेल: क्षमता और लागत में बड़ा अंतर
जब हम क्षमता की बात करते हैं, तब नॉर्थस्टार BE-4 से बेहतर साबित होता है। BE-4 इंजन ६,४०,००० पाउंड का थ्रस्ट देता है, जबकि नॉर्थस्टार की शुरुआती क्षमता ७,१५,००० पाउंड थ्रस्ट की होगी। इसका अर्थ यह हुआ कि वह अधिक भारी सामान को अंतरिक्ष में धकेल सकेगा। यह इंजन भी BE-4 की तरह ही मीथेन और लिक्विड ऑक्सीजन का उपयोग करेगा और इसमें सिंगल-शाफ्ट टर्बोपंप (turbopump) आर्किटेक्चर का उपयोग किया जाएगा। टर्बोपंप इंजन का वह भाग है जो ईंधन को बहुत ही उच्च दबाव के साथ कंबशन चैंबर में भेजता है।
लागत की दृष्टि से देखें तो, ब्लू ओरिजिन मानती है कि वे नॉर्थस्टार को BE-4 के २५% खर्च पर बना सकेंगे। यह एक बड़ा आर्थिक फायदा है, क्योंकि अंतरिक्ष यात्रा में सबसे बड़ा खर्च इंजन और रॉकेट के उत्पादन का होता है। यदि इंजन सस्ता बने, तो सैटेलाइट लॉन्च करने की कीमत भी घट सकती है। कंपनी ने पहले ही नॉर्थस्टार के टेस्ट फायरिंग (test firing) यानी जमीन पर इंजन चलाकर उसकी क्षमता जांचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये परीक्षण सफल रहे हैं, जो दर्शाते हैं कि यह तकनीक जल्द ही कार्यान्वित हो सकती है।

GS३ स्टेज और हाइड्रोजन टैंक की चुनौती
केवल इंजन ही नहीं, ब्लू ओरिजिन New Glenn रॉकेट के लिए एक नया तीसरा स्टेज भी विकसित कर रहा है, जिसे GS3 (Glenn Stage 3) नाम दिया गया है। यह स्टेज रॉकेट को पृथ्वी की कक्षा से दूर या चंद्रमा तक जाने के लिए अतिरिक्त शक्ति देगा। GS3 में ब्लू ओरिजिन का BE-7 इंजन इस्तेमाल होगा, जो लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन पर चलता है। हाइड्रोजन एक बेहद कार्यक्षम ईंधन है, लेकिन इसे संभालना मुश्किल है क्योंकि यह सबसे छोटा अणु है और यह छोटी दरारों से भी लीक हो सकता है।
इस समस्या के समाधान के लिए कंपनी ने कंपोजिट (composite) मटीरियल की टैंक बनाई है। कंपोजिट यानी दो या दो से अधिक पदार्थों के मिश्रण से बना अत्यंत मजबूत और हल्का मटीरियल। आम तौर पर हाइड्रोजन टैंक धातु की बनी होती है, लेकिन कंपोजिट टैंक वजन में काफी हल्की होती है। ब्लू ओरिजिन ने हाल ही में टेक्सस के लॉन्च साइट वन (Launch Site One) पर ५.५ मीटर व्यास की कंपोजिट हाइड्रोजन टैंक का सफल परीक्षण किया था। इस टैंक को ऑपरेशन के दौरान अपेक्षित अधिकतम दबाव से १५०% अधिक दबाव पर १० मिनट तक टेस्ट किया गया था, जिसमें यह सफल रही थी।
भारत और आम लोगों के लिए इसका महत्व
भारत के लिए भी यह विकास महत्वपूर्ण है। भारत की अपनी स्पेस एजेंसी ISRO भी कम खर्च में सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए जानी जाती है। ब्लू ओरिजिन जैसी निजी कंपनियाँ जब खर्च में ७५% की कमी करती हैं, तो वे वैश्विक स्पेस मार्केट में नई प्रतिस्पर्धा पैदा करती हैं। इससे भविष्य में इंटरनेट सैटेलाइट्स, मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाले उपकरण और अनुसंधान के लिए मिशन सस्ते होंगे। आम लोगों के लिए इसका मतलब यह है कि भविष्य में सैटेलाइट आधारित सेवाएँ अधिक सस्ती और सुलभ होंगी।
ब्लू ओरिजिन के CEO डेव लिम्प ने कहा, "अंतरिक्ष में कम खर्च में पहुँचने के लिए हमें वाहन के हर हिस्से पर ध्यान देना होगा। यह एक गेम-चेंजर साबित होगा।" कंपनी २०२८ में एक सरकारी ग्राहक के लिए GS3 स्टेज के साथ पहला मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य रखती है। यदि नॉर्थस्टार इंजन और GS3 स्टेज सफल रहते हैं, तो जेफ बेजोस के अंतरिक्ष में लाखों लोगों के रहने और काम करने के सपने की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा। फिलहाल तो पूरी दुनिया की नजरें नॉर्थस्टार के आगामी परीक्षणों पर टिकी हैं।

क्या अब भी अज्ञात है?
भले ही नॉर्थस्टार इंजन के आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन वास्तविक लॉन्चिंग के दौरान इसकी विश्वसनीयता कैसी रहेगी, यह देखना बाकी है। BE-4 इंजन के विकास के दौरान भी कंपनी को विस्फोटों और टर्बोपंप की समस्याओं का सामना करना पड़ा था। २०२३ में एक परीक्षण के दौरान BE-4 इंजन में विस्फोट हो गया था, जिससे टेस्ट स्टैंड को नुकसान पहुँचा था। नॉर्थस्टार में पुर्जों की संख्या घटाने से जटिलता तो घटी है, लेकिन ३डी-प्रिंटेड पुर्जे अंतरिक्ष के अत्यंत दबाव और तापमान में कितना समय टिक सकेंगे, यह लंबे समय के परीक्षणों के बाद ही पता चलेगा। ब्लू ओरिजिन अभी इन चुनौतियों से पार पाने के लिए दिन-रात काम कर रही है।


