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अंतरिक्ष में डेटा सेंटर: गूगल ने कक्षा में TPU चिप पर Gemma 4 मॉडल चलाया

प्रोजेक्ट सनकैचर के तहत उपग्रह में AI चिप सक्रिय करके हाइकु कविता प्राप्त की गई; सौर ऊर्जा से चलने वाले आकाशीय कंप्यूटिंग का पहला कदम।

आवतीकाल AI डेस्क31 अक्टूबर 2026 · 6 मिनट का पाठ
गूगल का कस्टम-डिज़ाइन किया गया TPU v4 सर्किट बोर्ड, जो डेटा सेंटर्स में जटिल AI मॉडल चलाने के लिए उपयोग किया जाता है।
गूगल का कस्टम-डिज़ाइन किया गया TPU v4 सर्किट बोर्ड, जो डेटा सेंटर्स में जटिल AI मॉडल चलाने के लिए उपयोग किया जाता है।
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पृथ्वी पर विशाल डेटा सेंटरों को चलाने के लिए प्रचुर मात्रा में बिजली और पानी की आवश्यकता होती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में बढ़ती हुई इस ऊर्जा मांग के बीच गूगल ने एक अनूठा प्रयोग शुरू किया है: गूगल के 'प्रोजेक्ट सनकैचर' (Project Suncatcher) के तहत अंतरिक्ष में तैरते उपग्रह पर डेटा सेंटर स्तर की टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) चिप लगाई गई है। अक्टूबर 2026 में SpaceX Falcon 9 रॉकेट द्वारा 100 से अधिक अंतरिक्ष यान के साथ यह प्रोटोटाइप सैटेलाइट लॉन्च किया गया था। गूगल के पैराडाइम्स ऑफ इंटेलिजेंस के सीनियर डायरेक्टर ट्रैविस बील्स के अनुसार, कक्षा में स्थित इस सैटेलाइट से पहला AI संदेश सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया गया है।

इस सैटेलाइट पर गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) का ओपन मॉडल Gemma 4 पहले से इंस्टॉल किया हुआ था। ग्राउंड स्टेशन से इंजीनियरों ने इसे अंतरिक्ष में रहने को लेकर एक जापानी शैली की छोटी कविता—हाइकु (haiku)—लिखने का प्रॉम्प्ट दिया था। जब उपग्रह नॉर्वे के स्वालबार्ड (Svalbard) के ऊपर से गुजरा, तो डाउनलिंक के जरिए पृथ्वी पर सफलतापूर्वक यह कविता पहुँच गई: "Blue marble below / Data streams in silent grace / Starlight feeds my core." इस सफलता के साथ ही गूगल के हार्डवेयर ने अंतरिक्ष में पहला 'हेलो वर्ल्ड' मील का पत्थर हासिल कर लिया है।

प्रोजेक्ट सनकेचर: अंतरिक्ष से प्रथम AI प्रतिक्रिया की प्रक्रिया
  1. १. कक्षा में लॉन्चSpaceX Falcon 9 रॉकेट द्वारा चार TPU चिप्स वाले प्रोटोटाइप उपग्रह को पृथ्वी की लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया गया।
  2. २. सबसिस्टम कमिशनिंगलगभग तीन सप्ताह तक उपग्रह के पावर और TPU ट्रे सहित अन्य भागों की सुरक्षा जांच की गई।
  3. ३. पृथ्वी से प्रॉम्प्ट अपलिंकग्राउंड स्टेशन से उपग्रह पर प्री-लोडेड Gemma 4 मॉडल को अंतरिक्ष विषयक हाइकु कविता रचने का आदेश दिया गया।
  4. ४. कक्षा में प्रोसेसिंगउपग्रह की १ kW बिजली क्षमता में से सक्रिय TPU पर AI मॉडल ने प्रॉम्प्ट प्रोसेस किया।
  5. ५. डाउनलिंक और पुष्टिनॉर्वे के स्वालबार्ड से गुजरते समय उपग्रह ने कविता ग्राउंड स्टेशन पर वापस भेजकर सफलता दर्ज की।

अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर क्यों?

गूगल की शोध रिपोर्ट के अनुसार, सूर्य हमारी पूरी मानवता के कुल बिजली उत्पादन से 100 ट्रिलियन गुना अधिक ऊर्जा लगातार फेंकता है। पृथ्वी की उचित कक्षा में रखी गई सोलर पैनल पृथ्वी की तुलना में 8 गुना अधिक बिजली उत्पन्न कर सकती है। विशेष रूप से 'डॉन-डस्क सन-सिंक्रोनस' (dawn–dusk sun-synchronous) लो अर्थ ऑर्बिट में उपग्रह लगभग लगातार सूर्य के प्रकाश में रहता है, जिससे भारी बैटरियों की आवश्यकता कम हो जाती है। पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने और असीमित सौर ऊर्जा का उपयोग करने के लिए भविष्य में अंतरिक्ष AI कंप्यूटिंग का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।

लेकिन अंतरिक्ष में सुपरकंप्यूटर भेजना आसान नहीं है। हाल ही में भेजे गए प्रोटोटाइप सैटेलाइट में चार गूगल TPU चिप्स रखी गई हैं और यह 1 किलोवाट (kW) जितनी अधिकतम बिजली उत्पन्न करती है। यह चिप इतनी अधिक शक्ति का उपयोग करती है कि एक समय में केवल एक ही TPU लगभग 20 मिनट के लिए चलाया जा सकता है। इस 20 मिनट की अवधि में ही ग्राउंड स्टेशन से संपर्क साधकर डेटा प्रोसेस करना पड़ता है।

कक्षा में AI हार्डवेयर के सफल परीक्षण के बाद गूगल की टीम द्वारा उत्साहपूर्वक बधाई।
कक्षा में AI हार्डवेयर के सफल परीक्षण के बाद गूगल की टीम द्वारा उत्साहपूर्वक बधाई। (blog.google)
प्रोजेक्ट सनकेचर प्रोटोटाइप उपग्रह विवरणअक्टूबर २०२६ में लॉन्च किए गए उपग्रह की मुख्य तकनीकी जानकारी
मानदंडविवरण
लॉन्च समयअक्टूबर २०२६
रॉकेटSpaceX Falcon 9
ऑनबोर्ड AI मॉडलGemma 4
हार्डवेयर४ गूगल TPU चिप्स
बिजली उत्पादन१ किलोवाट (kW)

चिप की बनावट और विकिरण की परीक्षा

प्रोसेसर के रूप में इस्तेमाल किया गया टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) गूगल द्वारा विशेष रूप से न्यूरल नेटवर्क मशीन लर्निंग के लिए विकसित किया गया एक ASIC (ASIC: विशिष्ट कार्य के लिए समर्पित चिप) है। पृथ्वी पर अधिकांश कंप्यूटरों में ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) का उपयोग किया जाता है, लेकिन TPU विशेष रूप से मैट्रिक्स गणनाओं के लिए कम बिजली पर अधिक गति देने में सक्षम है। हालांकि अंतरिक्ष में इन चिप्स के सामने विकिरण (रेडिएशन) और तापमान की एक बड़ी चुनौती होती है।

अंतरिक्ष में चार्ज्ड कण मेमोरी में संग्रहित मूल्य को बदल सकते हैं, जिसे कंप्यूटर विज्ञान में 'बिट फ्लिप' (bit flip) कहा जाता है। इससे डेटा ख़राब हो जाता है। गूगल ने पृथ्वी पर अपनी Trillium (v6e) TPU चिप को 67 MeV के प्रोटॉन बीम के सामने रखकर परीक्षण किया था। इस परीक्षण में हाई बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) सबसिस्टम सबसे नाज़ुक साबित हुई थी, लेकिन उसने भी 2 krad(Si) की संचित मात्रा के बाद ही असामान्य व्यवहार दर्शाया था। पांच साल के मिशन के दौरान अपेक्षित 750 rad(Si) की तुलना में यह क्षमता लगभग तीन गुनी अधिक है। 15 krad(Si) तक कोई बड़ा हार्डवेयर फॉल्ट दर्ज नहीं किया गया था, जो यह दर्शाता है कि ये चिप्स अंतरिक्ष के वातावरण को सहन कर सकती हैं।

पास से उड़ते उपग्रह और लेज़र लिंक

गूगल की यह योजना मात्र एक ही सैटेलाइट तक सीमित नहीं है। मॉडल ट्रेनिंग और बड़े इन्फरेंस (inference: मॉडल द्वारा अनुमान लगाने की प्रक्रिया) के लिए सैंकड़ों उपग्रहों को एक-दूसरे के साथ जोड़ना पड़ता है। पृथ्वी पर मौजूद डेटा सेंटर जैसी गति पाने के लिए उपग्रहों के बीच टेराबिट्स प्रति सेकंड (Tbps) की गति से डेटा ट्रांसफर होना अनिवार्य है। गूगल के वैज्ञानिकों ने ऑप्टिकल लिंक्स (optical links: लेज़र किरणों द्वारा संचार) का उपयोग करने की योजना बनाई है।

सिग्नल पावर दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती घटती है, इसलिए उपग्रहों के बीच बड़ी दूरी नहीं रखी जा सकती है। गूगल ने जो डिज़ाइन तैयार की है उसमें 81 उपग्रहों का एक समूह मात्र 1 किलोमीटर की त्रिज्या में, यानी एक-दूसरे से केवल 100 से 200 मीटर की दूरी पर रहकर पृथ्वी के चारों ओर 650 किमी की ऊँचाई पर परिक्रमण करेगा। गूगल ने बेंच स्केल प्रयोग में सिंगल ट्रांसीवर जोड़ी द्वारा दोनों तरफ़ 800 Gbps (कुल 1.6 Tbps) की ट्रांसमिशन गति आज़मा ली है।

प्रोजेक्ट सनकेचर प्रोटोटाइप उपग्रह विवरणकंपनी के आधिकारिक ब्लॉग और रिसर्च पेपर के आंकड़ों के अनुसार
विवरणविशिष्टता
लॉन्च तारीख१ अक्टूबर २०२६
रॉकेट प्लेटफॉर्मSpaceX Falcon 9
कुल ऑनबोर्ड प्रोसेसर४ Google TPUs
एकसाथ कार्यरत क्षमता१ TPU (लगभग २० मिनट)
कुल पावर जनरेशन१ kW तक
इंस्टॉल किया गया AI मॉडलGemma 4 (Google DeepMind)
आगामी मिशन लक्ष्य२०२७ (दो इंटरकनेक्टेड उपग्रह)
TPU सर्किट बोर्ड: कॉपर हीट सिंक और कूलिंग पाइप के साथ शीर्ष-से-नीचे का दृश्य।
TPU सर्किट बोर्ड: कॉपर हीट सिंक और कूलिंग पाइप के साथ शीर्ष-से-नीचे का दृश्य। (Zinskauf, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

आगामी मील के पत्थर और आर्थिक समीकरण

प्रोजेक्ट सनकैचर का अब इसके बाद का बड़ा पड़ाव 2027 में आएगा। गूगल ने प्लैनेट (Planet) कंपनी के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत 2027 की शुरुआत में दो प्रोटोटाइप उपग्रह लॉन्च किए जाएंगे। ये जुड़वां उपग्रह कक्षा में रहकर लेज़र द्वारा एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाकर मशीन लर्निंग के कार्यों को बांटकर पूरा करेंगे।

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर खड़े करने के लिए लॉन्चिंग लागत सबसे बड़ा अवरोध रही है। गूगल के शोधकर्ताओं के मुताबिक, 2030 के दशक के मध्य तक रॉकेट लॉन्चिंग की लागत घटकर $200 प्रति किलोग्राम से नीचे आ सकती है। अगर ऐसा होता है, तो अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करने और चलाने की लागत पृथ्वी पर मौजूद डेटा सेंटर के वार्षिक ऊर्जा खर्च के बराबर हो जाएगी। हालांकि इसके लिए SpaceX के निर्माणाधीन Starship जैसे पूरी तरह से पुन: उपयोग होने वाले रॉकेट की ज़रूरत पड़ेगी, जिसे इस लागत स्तर तक पहुँचने के लिए लगभग 1,800 बार उड़ान भरनी पड़ सकती है।

अंतरिक्ष में भेजे गए उपग्रह ने न केवल कविताएँ रची हैं, बल्कि कक्षा की स्थिति और टेलीमेट्री डेटा भी सफलतापूर्वक भेजा है। भविष्य में थर्मल मैनेजमेंट (ऊष्मा प्रबंधन) और पृथ्वी के साथ हाई-बैंडविड्थ संचार जैसी चुनौतियों को पार करना होगा, लेकिन इस प्रयोग ने साबित कर दिया है कि एआई के लिए पृथ्वी की सीमाएँ अब अनिवार्य नहीं रहीं।

स्रोत

  1. blog.google
  2. research.google
  3. The Verge
  4. TechCrunch
  5. Wikipedia
  6. Wikipedia

AI

सब देखें
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