प्रकाश की गति से दौड़ेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: इलेक्ट्रॉनिक चिप्स का स्थान लेने को तैयार ऑप्टिकल कंप्यूटिंग
पारंपरिक सिलिकॉन ट्रांजिस्टर की सीमाओं को तोड़कर फोटॉन्स के माध्यम से डेटा प्रोसेसिंग करने की तकनीक किस प्रकार AI की दुनिया बदल सकती है, इसकी गहन समझ।

आधुनिक युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूख लगातार बढ़ रही है। चैटबॉट्स से लेकर जटिल वैज्ञानिक गणनाओं तक, हर जगह अधिक तेज़ और अधिक कुशल प्रोसेसिंग पावर की आवश्यकता है। अब तक हम सिलिकॉन चिप्स और उनमें मौजूद अरबों इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिस्टर (transistor) पर निर्भर रहे हैं। लेकिन, इलेक्ट्रॉन पर आधारित यह तकनीक अब अपनी भौतिक सीमाओं तक पहुँच रही है। गर्मी का जमाव और डेटा ट्रांसफर की सीमित गति अब AI के विकास में बाधा बन रही है। इस समस्या के समाधान के रूप में 'ऑप्टिकल कंप्यूटिंग' (optical computing) या फोटोनिक कंप्यूटिंग उभर रही है, जो बिजली के बजाय प्रकाश की किरणों का उपयोग करके गणनाएँ करती है।
ऑप्टिकल कंप्यूटिंग डेटा प्रोसेसिंग, स्टोरेज और कम्युनिकेशन के लिए लेजर या अन्य स्रोतों द्वारा उत्पन्न प्रकाश की तरंगों का उपयोग करने की एक पद्धति है। दशकों से वैज्ञानिक जानते हैं कि प्रकाश के कण, जिन्हें फोटोन (photon) कहा जाता है, वे इलेक्ट्रॉन की तुलना में कहीं अधिक बैंडविड्थ (bandwidth) यानी डेटा वहन करने की क्षमता रखते हैं। जैसे ऑप्टिकल फाइबर केबल ने इंटरनेट की दुनिया बदल दी, वैसे ही ऑप्टिकल प्रोसेसर कंप्यूटर के अंदर की दुनिया बदलने की क्षमता रखते हैं। विकिपीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक घटकों को ऑप्टिकल समकक्षों के साथ बदलना है, ताकि एक पूर्ण ऑप्टिकल डिजिटल कंप्यूटर बनाया जा सके।
- प्रकाश का स्रोतलेजर या अन्य स्रोत द्वारा प्रकाश की किरणें (फोटॉन्स) उत्पन्न की जाती हैं।
- डेटा एन्कोडिंगजानकारी को प्रकाश की तीव्रता, चरण (phase) या तरंगदैर्ध्य के रूप में परिवर्तित किया जाता है।
- ऑप्टिकल प्रोसेसिंगनॉन-लीनियर क्रिस्टल्स या लेंस का उपयोग करके प्रकाश की किरणों के बीच प्रतिक्रिया कराकर गणनाएं की जाती हैं।
- डेटा डिटेक्शनफोटोडिटेक्टर द्वारा अंतिम प्रकाश सिग्नल को पढ़ा जाता है और परिणाम प्राप्त किया जाता है।
किसी भी कंप्यूटर की बुनियादी इकाई ट्रांजिस्टर है, जो स्विच की तरह काम करता है। इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर में यह स्विच विद्युत प्रवाह द्वारा चालू-बंद होता है। ऑप्टिकल कंप्यूटिंग में यह कार्य करने के लिए 'ऑप्टिकल ट्रांजिस्टर' की आवश्यकता पड़ती है। ये ट्रांजिस्टर क्रिस्टल ऑप्टिक्स (crystal optics) का उपयोग करके बनाए जाते हैं, जिनमें ऐसे पदार्थों का उपयोग होता है जिनका रिफ्रैक्टिव इंडेक्स (refractive index) यानी अपवर्तनांक नॉन-लीनियर होता है। इसका अर्थ यह है कि पदार्थ पर पड़ने वाले प्रकाश की तीव्रता तय करती है कि उसमें से कितना प्रकाश गुजरेगा। इस तरह, प्रकाश की एक किरण प्रकाश की दूसरी किरण को नियंत्रित कर सकती है, जो लॉजिक गेट्स (logic gates) बनाने में मदद करती है।
ऑप्टिकल कंप्यूटिंग सिस्टम को कार्यशील करने के लिए चार मुख्य घटकों की आवश्यकता होती है: ऑप्टिकल प्रोसेसर, ऑप्टिकल डेटा ट्रांसफर (जैसे कि फाइबर-ऑप्टिक केबल), ऑप्टिकल स्टोरेज और प्रकाश का स्रोत यानी लेजर। वर्तमान में अधिकांश शोध हाइब्रिड सिस्टम्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जहाँ ऑप्टिकल घटकों को पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटरों के साथ जोड़ा जाता है। हालाँकि, इसमें एक बड़ी समस्या 'कन्वर्जन' की है। जब डेटा को प्रकाश से बिजली में और फिर बिजली से प्रकाश में रूपांतरित किया जाता है, तब लगभग 30% ऊर्जा का व्यय होता है और प्रोसेसिंग की गति भी धीमी पड़ जाती है। ऑल-ऑप्टिकल (all-optical) कंप्यूटर इस रूपांतरण की आवश्यकता को दूर करके बिजली की खपत में बड़ी कटौती कर सकते हैं।
AI और विशेष रूप से डीप लर्निंग न्यूरल नेटवर्क्स के लिए ऑप्टिकल कंप्यूटिंग वरदान साबित हो सकता है। AI के कामकाज में 'टेन्सर ऑपरेशन्स' (tensor operations) और मैट्रिक्स मल्टीप्लिकेशन (matrix multiplication) यानी श्रेणीक गुणन की प्रक्रियाओं को बार-बार करना पड़ता है। 2025 के एक शोध पत्र 'डायरेक्ट टेन्सर प्रोसेसिंग विद कोहेरेंट लाइट' के अनुसार, शोधकर्ताओं ने 'पैरेलल ऑप्टिकल मैट्रिक्स-मैट्रिक्स मल्टीप्लिकेशन' (POMMM) नामक एल्गोरिदम विकसित किया है। यह पद्धति प्रकाश के मात्र एक झटके में ही जटिल टेन्सर गणनाएं कर सकती है। यह तकनीक भविष्य में GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) का स्थान ले सकती है, जो वर्तमान में AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

ऑप्टिकल कंप्यूटिंग के फायदे होने के बावजूद, इसके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। प्रकाश एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंग है। दो प्रकाश की तरंगें एक-दूसरे के साथ सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं करतीं; वे केवल पदार्थ में मौजूद इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति में ही एक-दूसरे पर असर डाल सकती हैं। यह प्रतिक्रिया इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों की तुलना में काफी कमजोर होती है। परिणामस्वरूप, ऑप्टिकल प्रोसेसिंग घटकों को अधिक पावर की आवश्यकता हो सकती है या उनका आकार पारंपरिक चिप्स की तुलना में बड़ा हो सकता है। साथ ही, प्रकाश की गति इलेक्ट्रॉन से काफी अधिक होने के बावजूद, सिग्नल की सटीकता बनाए रखना और उसे छोटे आकार में समाहित करना एक तकनीकी चुनौती है।
| विशेषता | इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटिंग | ऑप्टिकल कंप्यूटिंग |
|---|---|---|
| माध्यम | इलेक्ट्रॉन (बिजली) | फोटॉन (प्रकाश) |
| संभावित गति | GHz (गीगाहर्ट्ज़) | THz (टेराहर्ट्ज़) |
| बैंडविड्थ | सीमित | बहुत ही उच्च |
| मुख्य चुनौती | गर्मी और प्रतिरोध | सिग्नल इंटरेक्शन और आकार |
वैज्ञानिक ऑप्टिकल कंप्यूटिंग के लिए कुछ गैर-पारंपरिक दृष्टिकोण भी आजमा रहे हैं। एक दिलचस्प पद्धति 'टाइम डिले' (time delay) कंप्यूटिंग है। इसमें डेटा को ऑप्टिकल फाइबर से गुजारकर निश्चित समय के लिए विलंबित किया जाता है। प्रकाश को विभाजित करके और अलग-अलग लंबाई के केबल्स से गुजारकर एक साथ कई समाधानों की जांच की जा सकती है। इस पद्धति का उपयोग 'हैमिल्टोनियन पाथ' और 'सबसेट सम' जैसी जटिल गणितीय समस्याओं को हल करने के लिए किया गया है। इसके अलावा, 'वेवलेंथ-बेस्ड कंप्यूटिंग' में प्रकाश के अलग-अलग रंगों (तरंगदैर्ध्य) का उपयोग करके एक साथ कई गणनाएं की जाती हैं।

उद्योग जगत में भी इस दिशा में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। IBM, Microsoft और अनेक स्टार्टअप्स जैसे कि Lightmatter और Q.ANT इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। 2025 में Lightmatter कंपनी ने Nature पत्रिका में रिपोर्ट दी थी कि उन्होंने एक फोटोनिक AI प्रोसेसर बनाया है जो ResNet और BERT जैसे लोकप्रिय AI मॉडल्स को इलेक्ट्रॉनिक चिप्स जितनी ही सटीकता से चला सकता है। नवंबर 2025 में Q.ANT कंपनी ने अपना दूसरी पीढ़ी का फोटोनिक प्रोसेसर (NPU 2) लॉन्च किया था, जो मार्च 2026 से जर्मनी के लेबनिज सुपरकंप्यूटिंग सेंटर में CPU और GPU के साथ कार्यरत है।

ऑप्टिकल कंप्यूटिंग की एक और विशेषता 'लेंस' का उपयोग करके की जाने वाली गणनाएँ हैं। लेंस स्वाभाविक रूप से प्रकाश का 'फोरियर ट्रांसफॉर्म' (Fourier transform) करने की क्षमता रखते हैं। यह एक ऐसी गणितीय प्रक्रिया है जिसका उपयोग ऊष्मा के प्रसार या तरंगों के प्रसार को समझने के लिए किया जाता है। जहाँ सामान्य कंप्यूटरों को इस गणना के लिए लाखों स्टेप्स की आवश्यकता होती है, वहीं ऑप्टिकल सिस्टम लेंस के माध्यम से यह काम पलक झपकते ही कर सकते हैं। 2022 में वांग और उनके सहयोगियों ने यहाँ तक साबित कर दिया कि क्लासिकल प्रकाश का उपयोग करके क्वांटम एल्गोरिदम के कुछ स्टेप्स भी किए जा सकते हैं।
- ग्राफ स्ट्रक्चरऑप्टिकल केबल्स और स्प्लिटर्स द्वारा एक जटिल ढांचा तैयार किया जाता है।
- प्रकाश का प्रवेशप्रकाश स्टार्ट नोड से प्रवेश करता है और अलग-अलग केबल्स में विभाजित होता है।
- समय विलंबकेबल की लंबाई के अनुसार प्रकाश अलग-अलग समय पर डेस्टिनेशन नोड पर पहुंचता है।
- परिणाम वाचननिश्चित समय पर आने वाले प्रकाश के झटकों (fluctuations) से समाधान खोजा जाता है।
भविष्य की बात करें तो, ऑप्टिकल प्रोसेसर्स 2030 से पहले आम जनता के लिए उपलब्ध होने की संभावना कम है। वर्तमान में यह तकनीक मुख्य रूप से सुपरकंप्यूटर्स और विशिष्ट वैज्ञानिक कार्यों के लिए विकसित की जा रही है। आलोचकों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिस्टर जो सस्ती कीमत और छोटा आकार प्रदान करते हैं, उनसे प्रतिस्पर्धा करना ऑप्टिकल तकनीक के लिए कठिन होगा। हालाँकि, जैसे-जैसे AI मॉडल बड़े होते जाएंगे और बिजली की खपत चिंता का विषय बनेगी, वैसे-वैसे प्रकाश आधारित यह क्रांति अनिवार्य हो जाएगी। आने वाले कल के कंप्यूटर शायद तारों से नहीं, बल्कि रंग-बिरंगी लेज़र किरणों से भरे होंगे।


