परमाणुओं की दुनिया को 'स्पर्श' करता अद्भुत माइक्रोस्कोप: एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोपी की तकनीक और कार्यप्रणाली
एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप (AFM) प्रकाश या लेंस के बजाय अत्यंत बारीक सुई से सतह को 'महसूस करके' परमाणुओं के स्तर तक का त्रि-आयामी चित्र तैयार करता है.
विज्ञान की दुनिया में जब हम अणुओं और परमाणुओं की बात करते हैं, तो उन्हें देखने की कल्पना करना भी मुश्किल लगता है। सामान्य ऑप्टिकल माइक्रोस्कोप प्रकाश की तरंगों की सीमा के कारण अणुओं को नहीं देख सकते हैं। लेकिन एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोपी (Atomic Force Microscopy - AFM) एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक है जो प्रकाश का उपयोग करने के बजाय सतह को 'स्पर्श' करके उसका चित्र बनाती है। विकिपीडिया और समाचार रिपोर्टों के अनुसार, इस माइक्रोस्कोप की क्षमता सामान्य ऑप्टिकल माइक्रोस्कोप से 1,000 गुना अधिक है, जो नैनोमीटर के छोटे भाग तक का विवरण दिखा सकती है।
इस तकनीक का इतिहास काफी दिलचस्प है। AFM की खोज 1985 में IBM के वैज्ञानिकों द्वारा की गई थी। इसके पूर्ववर्ती उपकरण, स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप (STM) के लिए गर्ड बिनीग और हेनरिक रोहरर को 1986 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था। उसके बाद बिनीग, क्वाटे और गर्बर ने 1986 में पहला प्रायोगिक AFM बनाया था। 1989 में पहला व्यावसायिक रूप से उपलब्ध AFM बाजार में आया, जिसने नैनोस्केल पर पदार्थों के अध्ययन के तरीके को बदल दिया।
AFM की कार्यप्रणाली को समझने के लिए एक अंधे व्यक्ति की छड़ी या पुराने जमाने के रिकॉर्ड प्लेयर की सुई की कल्पना की जा सकती है। इस माइक्रोस्कोप में एक अत्यंत बारीक सुई होती है जिसे टिप (tip) कहा जाता है। यह टिप एक छोटी लचीली पट्टी के सिरे पर लगी होती है, जिसे कैंटिलीवर (cantilever) कहा जाता है। जब यह टिप नमूने की सतह के बहुत करीब जाती है, तब टिप और सतह के बीच के परमाणु बलों के कारण कैंटिलीवर मुड़ता है। यह मोड़ इतना सूक्ष्म होता है कि इसे मापने के लिए लेजर बीम का उपयोग किया जाता है।
- 1. टिप का स्पर्शअत्यंत बारीक सुई जैसी टिप नमूने की सतह के बहुत करीब जाती है।
- 2. कैंटिलीवर का मुड़नापरमाणु बलों के कारण कैंटिलीवर नामक लचीली पट्टी सूक्ष्म झुकाव महसूस करती है।
- 3. लेजर द्वारा मापनकैंटिलीवर के इस सूक्ष्म झुकाव को मापने के लिए लेजर बीम का उपयोग होता है।
AFM के मुख्य भाग और इसकी संरचना
AFM की संरचना में कुछ अत्यंत सटीकता से काम करने वाले भाग शामिल होते हैं। सबसे महत्वपूर्ण भाग कैंटिलीवर (1) है, जिसे सपोर्ट (2) द्वारा पकड़ कर रखा जाता है। इस कैंटिलीवर के मुक्त सिरे पर एक तीक्ष्ण टिप (4) होती है, जिसके मोड़ का व्यास नैनोमीटर के क्रम में होता है। सतह पर स्कैनिंग करने के लिए पीज़ोइलेक्ट्रिक (piezoelectric) तत्वों (3) का उपयोग किया जाता है। ये ऐसे सिरेमिक पदार्थ हैं जो इलेक्ट्रिक सिग्नल मिलते ही अत्यंत सूक्ष्म लेकिन सटीक हलचल कर सकते हैं।


नमूने को रखने के लिए सैंपल स्टेज (8) होता है, जो xyz ड्राइव (7) की मदद से तीनों दिशाओं में खिसक सकता है। जब टिप सतह पर घूमती है, तब कैंटिलीवर की हलचल को डिटेक्टर (5) द्वारा दर्ज किया जाता है। अधिकांश AFM में लेजर डिफ्लेक्शन पद्धति का उपयोग किया जाता है। इस पद्धति में लेजर का प्रकाश कैंटिलीवर की पिछली सतह से टकराकर फोटोडायोड डिटेक्टर पर पड़ता है। कैंटिलीवर थोड़ा भी मुड़े तो लेजर के प्रतिबिंब का स्थान बदल जाता है, जो सुई की ऊंचाई में होने वाले बदलाव को सटीकता से मापता है।

इमेज बनाने की प्रक्रिया और मोड्स
AFM केवल एक बिंदु नहीं मापता, बल्कि यह पूरी सतह पर रास्टर स्कैनिंग (raster scanning) करता है। यानी, यह सतह पर एक के बाद एक लाइन में घूमता है और प्रत्येक बिंदु पर ऊँचाई की जानकारी इकट्ठा करता है। इस जानकारी को कंप्यूटर द्वारा प्रोसेस करके सतह का त्रि-आयामी नक्शा तैयार किया जाता है, जिसे टोपोग्राफी (topography) कहा जाता है। इस नक्शे को आमतौर पर स्यूडो कलर प्लॉट (pseudocolor plot) के रूप में दर्शाया जाता है, जहाँ अलग-अलग रंग अलग-अलग ऊँचाई दर्शाते हैं।
- टिप का आगमनअत्यंत तीक्ष्ण टिप को नमूने की सतह के बहुत करीब लाया जाता है।
- बल की प्रतिक्रियासतह के अणुओं और टिप के बीच के आकर्षण या अपकर्षण बल के कारण कैंटिलीवर मुड़ता है।
- लेजर ट्रैकिंगकैंटिलीवर पर पड़ता लेजर बीम उसके झुकाव को डिटेक्टर पर सटीकता से नोट करता है।
- डेटा प्रोसेसिंगकंप्यूटर इस हलचल को डिजिटल सिग्नल में बदलकर सतह का त्रि-आयामी चित्र बनाता है।
AFM मुख्य रूप से तीन तरीकों या 'मोड्स' में काम कर सकता है। पहला है कॉन्टैक्ट मोड (contact mode), जिसमें टिप लगातार सतह को छूकर चलती है। दूसरा है टैपिंग मोड (tapping mode), जिसमें कैंटिलीवर लगातार कंपन (oscillation) महसूस करता है और सतह को हल्के से 'टैप' करता है। यह मोड नरम नमूनों के लिए बेहतरीन है क्योंकि यह सतह को नुकसान नहीं पहुँचाता है। तीसरा है नॉन-कॉन्टैक्ट मोड (non-contact mode), जिसमें टिप सतह को छुए बिना केवल वैन डेर वाल्स (van der Waals) जैसे बलों का उपयोग करके दूरी बनाए रखती है।
| मोड का नाम | कार्यपद्धति और उपयोग |
|---|---|
| कॉन्टैक्ट मोड (Contact mode) | टिप लगातार सतह को छूकर चलती है। |
| टैपिंग मोड (Tapping mode) | कैंटिलीवर लगातार कंपन महसूस करता है और नरम नमूनों के लिए उत्तम है। |
| नॉन-कॉन्टैक्ट मोड (Non-contact mode) | टिप सतह को छुए बिना वैन डेर वाल्स बलों का उपयोग करती है। |
अन्य माइक्रोस्कोप के साथ तुलना
AFM और अन्य माइक्रोस्कोप जैसे कि ऑप्टिकल या इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (SEM) के बीच बड़ा अंतर यह है कि AFM में किसी लेंस या बीम इरेडिएशन का उपयोग नहीं होता है। इस कारण यह प्रकाश के विवर्तन (diffraction) और एबरेशन की सीमाओं से मुक्त है। SEM में नमूने को देखने के लिए वैक्यूम (vacuum) की जरूरत पड़ती है और अक्सर नमूने पर स्पेशल कोटिंग करनी पड़ती है। इसकी तुलना में AFM हवा या तरल माध्यम में भी काम कर सकता है, जो जैविक नमूनों के लिए बहुत ही फायदेमंद है।
रिजॉल्यूशन के मामले में भी AFM बेजोड़ है। 1993 में ओहनेसोर्ग और बिनिग ने तरल माध्यम में परमाणु स्तर का रिजॉल्यूशन हासिल किया था। उसके बाद गिसीबल द्वारा सिलिकॉन 7x7 सतह पर सच्चा एटॉमिक रिजॉल्यूशन दर्शाया गया था। आज AFM इतना शक्तिशाली है कि यह सब-एटॉमिक रिजॉल्यूशन भी दे सकता है, यानी एक ही परमाणु के अंदर के इलेक्ट्रॉन डेंसिटी के ढांचे को भी देखा जा सकता है।
विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग और महत्व
AFM केवल सतह देखने के लिए ही नहीं, बल्कि बल मापने (force measurement) और मैनिपुलेशन (manipulation) के लिए भी इस्तेमाल होता है। फोर्स स्पेक्ट्रोस्कोपी द्वारा पदार्थ की मजबूती या दृढ़ता (stiffness) मापी जा सकती है। मैनिपुलेशन में, टिप का उपयोग करके व्यक्तिगत परमाणुओं को खिसकाया जा सकता है या सतह पर अत्यंत छोटी लिथोग्राफी की जा सकती है। यह क्षमता इसे नैनो-टेक्नोलॉजी का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण बनाती है।
जीवविज्ञान में AFM का उपयोग प्रोटीन कॉम्प्लेक्स और माइक्रोब्यूल्स के अध्ययन के लिए किया जाता है। कैंसर के अनुसंधान में, सामान्य कोशिकाओं और कैंसरग्रस्त कोशिकाओं की कठोरता में मौजूद अंतर को पहचानने के लिए AFM का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, सॉलिड-स्टेट बैटरी के अनुसंधान में लोकल कंडक्टिविटी और बैटरी के क्षय की प्रक्रिया को समझने के लिए कंडक्टिव AFM (C-AFM) जैसी उन्नत पद्धतियों का उपयोग बढ़ रहा है।
शुद्धता और विज्ञान के समन्वय से बना यह उपकरण हमें ऐसी दुनिया की झलक देता है जो हमारी नग्न आँखों के लिए हमेशा अदृश्य थी। भले ही वह अणुओं की व्यवस्था की जाँच करना हो या नए मटीरियल्स बनाने की बात हो, AFM आधुनिक विज्ञान की प्रयोगशालाओं में एक अनिवार्य हथियार बन गया है।


