एआई की बिजली की भूख और विशाल पावर सबस्टेशनों का नया वैश्विक नेटवर्क
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सर्वरों को निरंतर चलाने के लिए अब गीगावाट स्तर के विशाल सबस्टेशनों की आवश्यकता उत्पन्न हो गई है। यूके के टीससाइड में ब्रिटेन का सबसे बड़ा सबस्टेशन स्थापित करने की योजना इस क्रांति का प्रतीक है।

आजकल कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence - AI) की चर्चा चारों तरफ है। चैटजीपीटी जैसे भाषाई मॉडलों से लेकर आधुनिक डिजिटल उपकरणों तक, एआई तकनीक के पीछे विशाल डेटा सेंटर काम कर रहे हैं। लेकिन इन जटिल एआई मॉडलों को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए केवल सॉफ्टवेयर पर्याप्त नहीं है; इसके लिए अकल्पनीय मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। एआई डेटा सेंटर्स की इस अथक बिजली मांग को पूरा करने के लिए अब दुनिया भर में विशाल इलेक्ट्रिकल सबस्टेशन (substation) बनाने की होड़ मची है।
हाल ही में ब्रिटेन में नेशनल ग्रिड (National Grid) नामक पावर ट्रांसमिशन निगम ने उत्तर-पूर्व इंग्लैंड के टीससाइड (Teesside) स्थित डोरमन पॉइंट पर 29.5 हेक्टेयर (लगभग 73 एकड़) जमीन खरीदने का करार किया है। टाइम्स और स्काई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थान पर ब्रिटेन का सबसे बड़ा सबस्टेशन बनाया जाएगा। यह विशाल सबस्टेशन अपने निकट ही प्रस्तावित 5,00,000 वर्ग मीटर में फैले विशाल एआई डेटा सेंटर को बिजली प्रदान करेगा। इस सबस्टेशन की क्षमता 3.2 गीगावाट (Gigawatt - GW) तक की होगी, जो एक ही स्थान पर बिजली की अभूतपूर्व मात्रा प्रदान करने में सक्षम है।
| विवरण / मानदंड | मूल्य / क्षमता |
|---|---|
| जमीन का क्षेत्रफल | 29.5 हेक्टेयर (73 एकड़) |
| प्रस्तावित पावर क्षमता | 3.2 गीगावाट (3.2 GW) |
| डेटा सेंटर क्षेत्रफल | 5,00,000 वर्ग मीटर |
| मुख्य डेवलपर / ऑपरेटर | National Grid, Balfour Beatty, SRP |
इस योजना के पीछे मुख्य कारण यह है कि एआई मॉडलों की प्रोसेसिंग के लिए हजारों ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (Graphics Processing Unit - GPU) रात-दिन कार्यरत रहते हैं। ये उपकरण इतनी उच्च घनत्व में बिजली का उपयोग करते हैं कि पारंपरिक पावर नेटवर्क इसे पूरा नहीं कर पाते हैं। टीस वैली कंबाइंड अथॉरिटी के मेयर बेन होचेन के अनुसार, यूके में डेटा सेंटर बनाने की इच्छुक कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त बिजली तेजी से प्राप्त करना है। जब अन्य देश तेजी से पावर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करके निवेश आकर्षित कर रहे हैं, तब टीससाइड में 3.2 गीगावाट क्षमता तैयार होने से यूके वैश्विक स्तर पर एआई क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।
सबस्टेशन क्या है और यह कैसे काम करता है?
बिजली के उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पहुँचने के प्रवाह में सबस्टेशन (substation: बिजली का वोल्टेज बदलने और नियंत्रित करने वाला केंद्र) एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है। बिजलीघरों में उत्पन्न होने वाली बिजली को दूर के क्षेत्रों तक कुशलतापूर्वक भेजने के लिए इसका वोल्टेज (voltage: विद्युत दबाव) बहुत उच्च किया जाता है। लेकिन इतने उच्च वोल्टेज वाली बिजली का सीधा उपयोग कंप्यूटर या फैक्ट्रियों में नहीं किया जा सकता है। सबस्टेशन मुख्य रूप से इस वोल्टेज को उच्च स्तर से निम्न स्तर पर (या निम्न से उच्च स्तर पर) परिवर्तित करने का काम करते हैं।
इलेक्ट्रिकल ग्रिड (विद्युत वितरण जाल) में सबस्टेशन के मुख्य घटकों में ट्रांसफॉर्मर (वोल्टेज बदलने वाला उपकरण), सर्किट ब्रेकर (खराबी के समय विद्युत प्रवाह काटने वाली स्विच) और डिस्कनेक्टर शामिल हैं। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका में ही लगभग 55,000 सबस्टेशन कार्यरत थे। सबस्टेशन न केवल बिजली के प्रवाह को रूपांतरित करते हैं, बल्कि सिस्टम में कोई खराबी आने पर क्षतिग्रस्त हिस्से को अलग करके पूरी ग्रिड को धमाके या ब्लैकआउट से बचाने का सुरक्षात्मक कार्य भी करते हैं।
- 1. बिजली उत्पादन (Generation)पावर प्लांट या रिन्यूएबल स्रोतों द्वारा बड़े पैमाने पर बिजली का उत्पादन होता है।
- 2. स्टेप-अप ट्रांसमिशन सबस्टेशनट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टेज बहुत ऊँचा करके लंबी दूरी की हाई-वोल्टेज लाइनों में भेजा जाता है।
- 3. स्विचिंग और ग्रिड कंट्रोलसबस्टेशन सर्किट ब्रेकर और स्काडा (SCADA) सिस्टम द्वारा बिजली प्रवाह को सुरक्षित रूप से नियंत्रित करता है।
- 4. स्टेप-डाउन डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशनउच्च वोल्टेज को घटाकर मध्यम स्तर पर लाकर डेटा सेंटर की फीडर लाइनों में भेजा जाता है।
- 5. डेटा सेंटर कंजम्पशनसुधारी गई बिजली डेटा सेंटर के सर्वर रेक्स और GPU को निरंतर पावर प्रदान करती है।
बिजली जब पावर प्लांट से निकलती है, तब ट्रांसमिशन सबस्टेशन उसमें मौजूद स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टेज बढ़ाकर उसे लंबी दूरी की लाइनों में भेजता है। इसके बाद डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन इस उच्च वोल्टेज को मध्यम या निम्न वोल्टेज (जैसे कि 2.4 किलोवोल्ट से 33 किलोवोल्ट) में घटाता है, ताकि उसे स्थानीय ग्राहकों या डेटा सेंटरों तक पहुँचाया जा सके।

सबस्टेशन के प्रकार और वास्तुकला की जटिलता
सबस्टेशन अपने उपयोग और कार्यप्रणाली के आधार पर अलग-अलग प्रकार के होते हैं। ट्रांसमिशन सबस्टेशन दो या उससे अधिक ट्रांसमिशन लाइनों को जोड़ते हैं और इनमें वोल्टेज कंट्रोल तथा पावर फैक्टर करेक्शन के लिए कैपेसिटर एवं रिएक्टर जैसे उपकरण होते हैं। वहीं, कलेक्टर सबस्टेशन आमतौर पर विंड फार्म या सोलर पावर प्लांट जैसे विकेंद्रीकृत ऊर्जा स्रोतों से बिजली एकत्रित करके मेन ग्रिड में भेजते हैं।
बदलती तकनीक के साथ कन्वर्टर सबस्टेशन भी महत्वपूर्ण बन गए हैं, जो अल्टरनेटिंग करंट (AC: प्रत्यावर्ती धारा) को डायरेक्ट करंट (DC: दिष्ट धारा) में या विभिन्न फ्रीक्वेंसी में रूपांतरित करते हैं। डेटा सेंटर्स के लिए अक्सर स्विचिंग स्टेशन का उपयोग किया जाता है, जो समान वोल्टेज पर काम करते हैं और लाइनों को जोड़ने या अलग करने का स्विचिंग कार्य करते हैं।

सबस्टेशन की डिजाइन तैयार करते समय जमीन की उपलब्धता, लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और त्वरित निर्माण जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाता है। ग्रिड ऑपरेटर सबस्टेशन का संचालन SCADA (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) नामक डिजिटल रिमोट कंट्रोल सिस्टम के माध्यम से दूर बैठकर करते हैं। ग्राफिकल नक्शे पर 'सिंगल-लाइन डायग्राम' बनाकर सबस्टेशन की सुरक्षा और स्विचिंग की योजना बनाई जाती है।


एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की यात्रा
ब्रिटेन सरकार के नीतिगत बयान के अनुसार, आज के युग में डेटा सेंटर आर्थिक विकास के लिए उतने ही मूलभूत हैं जितने रेलवे और बिजली के पारंपरिक नेटवर्क थे। नेशनल ग्रिड द्वारा टीसाइड में बाल्फोर बीटी (Balfour Beatty) और स्टील रिवर पावर (Steel River Power) जैसी बुनियादी ढांचा कंपनियों की मदद से इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा रहा है।
लेकिन ऐसे विशाल सबस्टेशनों और डेटा सेंटरों के निर्माण के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध भी देखने को मिल रहा है। स्कॉटलैंड के आचटरटूल गांव से लेकर लंदन के ब्रिक लेन तक स्थानीय समुदाय शोर और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। इसके बावजूद, वैश्विक स्तर पर एआई की क्षमता बढ़ाने के लिए ऊर्जा ढांचे को मजबूत बनाए बिना कोई चारा नहीं है। भविष्य में डेटा सेंटरों के लिए स्वच्छ और त्वरित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में ये विशाल पावर सबस्टेशन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


