सिलिकॉन और डीएनए का मिलन: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नई बीमारियों का इलाज ढूंढेगा या जैविक हथियार बनाएगा?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बायोसाइंस के क्षेत्र में अभूतपूर्व क्रांति ला रहा है, लेकिन इसके साथ जैविक हथियारों के निर्माण का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर नई सुरक्षा नीतियों की आवश्यकता पैदा हो गई है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इतिहास में अभी हम एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहाँ कंप्यूटर कोड और जीव विज्ञान के बीच की सीमाएँ तेजी से धुंधली हो रही हैं। हाल ही में यूनाइटेड किंगडम दुनिया की पहली 'AI बायोसिक्योरिटी लैब' की स्थापना करने वाला पहला देश बन गया है, जो इस दिशा में एक बड़ा कदम है। इस लैब का मुख्य उद्देश्य दोहरा है: पहला, रोगों को समझने और नई दवाओं तथा टीकों की खोज को गति देने के लिए AI का उपयोग करना; और दूसरा, यह सुनिश्चित करना कि AI किसी को जैविक हथियार (biological weapon) बनाने में मदद न करे। इस पहल के पीछे ब्रिटिश सरकार का 100 मिलियन पाउंड का फंड है, जबकि OpenAI और Anthropic जैसी दिग्गज कंपनियों ने 200 मिलियन पाउंड तक की प्रतिबद्धता दिखाई है। Google DeepMind भी इस लैब के साथ मिलकर अपने शक्तिशाली Gemini मॉडल्स के माध्यम से अनुसंधान में मदद करेगा।
जैव-सुरक्षा (biosecurity) एक ऐसा शब्द है जिसका अर्थ समय के साथ बदलता रहा है। मूल रूप से, यह हानिकारक जीवों जैसे कि वायरस, बैक्टीरिया या आक्रामक वनस्पतियों के प्रसार को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करता है। न्यूजीलैंड इस मामले में बहुत जागरूक था और उसने 1993 में ही 'बायोसिक्योरिटी एक्ट' पारित किया था। आज, इस परिभाषा में जैव-आतंकवाद (bioterrorism) और प्रयोगशाला से खतरनाक पदार्थों की चोरी को रोकना भी शामिल है। जब हम जैव-सलामती (biosafety) के बारे में बात करते हैं, तो इसका अर्थ प्रयोगशाला में काम करने वाले शोधकर्ताओं और पर्यावरण को गलती से संक्रमण लगने से बचाना होता है। लेकिन जैव-सुरक्षा जानबूझकर किए जाने वाले नुकसान को रोकने पर केंद्रित है, जो आज के AI युग में और अधिक जटिल हो गई है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अर्थ कंप्यूटर सिस्टम की वह क्षमता है जो सामान्यतः मानवीय बुद्धि की आवश्यकता वाले कार्य कर सकती है, जैसे कि सीखना, तर्क करना और समस्याओं का समाधान करना। 2012 के बाद जब ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) का उपयोग न्यूरल नेटवर्क को गति देने के लिए शुरू हुआ, तब AI क्षेत्र में बड़ी क्रांति आई। 2017 में आई ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर (transformer architecture) तकनीक ने इस प्रगति को और अधिक गति दी। अब, जेनरेटिव AI (generative AI) न केवल टेक्स्ट या इमेज ही नहीं, बल्कि प्रोटीन की संरचना और जीनोम सीक्वेंसिंग (genomic sequencing) जैसे जटिल जैविक डेटा भी बना सकता है। यह क्षमता वैज्ञानिकों के लिए वरदान है, लेकिन साथ ही यह खतरनाक भी साबित हो सकती है।
बायोसाइंस में AI के उपयोग के मुख्य क्षेत्रों में प्रोटीन फोल्डिंग (protein folding) और मेटाबोलिक पाथवे मैपिंग शामिल हैं। प्रोटीन फोल्डिंग का अर्थ है प्रोटीन के जटिल त्रि-आयामी आकार को समझने की प्रक्रिया, जो नई दवाएं बनाने के लिए अनिवार्य है। अगस्त महीने में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और आर्क इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने घोषणा की थी कि जेनरेटिव AI की मदद से उन्होंने पहली बार पूर्णतः कार्यशील जीनोम (genome) तैयार किया है। इसके लिए उन्होंने 'Evo 1' और 'Evo 2' नामक जीनोम लैंग्वेज मॉडल्स का उपयोग किया था। इन मॉडल्स ने ऐसे 16 बैक्टीरियोफेज (bacteriophages) - यानी बैक्टीरिया को मारने वाले वायरस - तैयार किए, जिन्होंने सफलतापूर्वक E. coli बैक्टीरिया का नाश किया। यह सफलता दर्शाती है कि AI अब जीवित सृष्टि के बुनियादी ब्लूप्रिंट को भी फिर से लिख सकता है।
£ મિલિયન
हालांकि, इस प्रगति के साथ एक बड़ा डर भी जुड़ा हुआ है: क्या कोई गैर-विशेषज्ञ व्यक्ति AI की मदद से जैविक हथियार बना सकता है? ऑक्सफोर्ड और यूसी बर्कले के शोधकर्ताओं ने एक पेपर में नोट किया है कि विशाल भाषा मॉडल (LLMs) बायोलॉजी के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि क्या ये मॉडल किसी सामान्य व्यक्ति को इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी से अधिक मदद कर सकते हैं या नहीं। RAND नामक शोध संस्था चेतावनी देती है कि कोई एक सुरक्षा कवच पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचे की सिफारिश की है, जिसमें डेटा की एक्सेस पर प्रतिबंध, जोखिम भरे पदार्थों की स्क्रीनिंग और दुरुपयोग की खोज शामिल है। RAND के डायरेक्टर सेला नेवो कहते हैं कि AI क्षमताएं कितनी तेजी से बढ़ेंगी यह हम नहीं जानते, लेकिन सुरक्षा ढांचा अभी ही बनाना होगा।
दवाओं के अनुसंधान में AI का योगदान अद्भुत रहा है। Anthropic कंपनी के अनुसार, AI अब कैंसर के उपचार (CAR T-cell therapy) को अधिक प्रभावी बनाने और एलर्जी पैदा करने वाले अणुओं को शरीर से अलग करने में मदद कर रहा है। OpenAI ने 'GPT-Rosalind' नामक मॉडल पेश किया है, जिसने हाल ही में एक प्रयोग में केवल 32 मिनट में 8 मिलियन चूहे के मस्तिष्क की कोशिकाओं के डेटा का विश्लेषण किया था। यह कार्य करने के लिए सामान्यतः वैज्ञानिकों को महीने लग सकते हैं। यह अनुसंधान अल्जाइमर और पार्किंसन जैसे रोगों के इलाज खोजने में बहुत मददगार हो सकता है। Google DeepMind ने भी 'ProtNLM' (Protein Natural Language Model) विकसित किया है, जो प्रोटीन के अमीनो एसिड सीक्वेंस की विकासवादी 'ग्रामर' पढ़ सकता है, जिससे नए एंटीबायोटिक्स खोजने में आसानी होगी।
- डेटा विश्लेषणAI मॉडल लाखों प्रोटीन और जीनोमिक सीक्वेंस का अध्ययन करके रोग के लक्ष्य को पहचानता है।
- नई रचना की डिज़ाइनजनरेटिव AI विशिष्ट गुणधर्मों वाले नए अणुओं या प्रोटीन बाइंडर्स की डिज़ाइन तैयार करता है।
- सिमुलेशन और टेस्टिंगकंप्यूटर पर ही यह रचना कैसे काम करेगी इसका परीक्षण किया जाता है, जो प्रयोगशाला का समय बचाता है।
- भौतिक निर्माणसफल डिज़ाइन को सिंथेटिक डीएनए तकनीक द्वारा प्रयोगशाला में वास्तविक रूप दिया जाता है।
लेकिन यही शक्तिशाली मॉडल्स अगर गलत हाथों में चले जाएं तो वे जहरीले पदार्थों (toxins) या नए वायरस की रचना में मदद कर सकते हैं। Anthropic के 'Claude Fable 5' मॉडल ने बायोलॉजी के जटिल कार्यों में विशेषज्ञों को भी पीछे छोड़ दिया है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि उन्होंने दुरुपयोग के अनेक प्रयासों को रोका है, जिनमें जैविक हथियारों के अनुसंधान से संबंधित प्रश्न पूछे गए थे। इस जोखिम से निपटने के लिए Google DeepMind ने 'SynthID Bio' नामक एक नई प्रणाली पेश की है। यह एक प्रकार की वाटरमार्किंग (watermarking) है, जो प्रोटीन सीक्वेंस में ही एक पहचान चिह्न अंकित करती है। इससे यह पहचाना जा सकेगा कि कोई प्रोटीन प्राकृतिक है या AI द्वारा प्रयोगशाला में बनाया गया है। पारंपरिक स्क्रीनिंग पद्धतियां केवल ज्ञात खतरनाक वायरस को ही पहचान सकती हैं, लेकिन AI द्वारा बनाए गए नए खतरों को वे पकड़ नहीं पातीं।
| AI मॉडल | बेंचमार्क / क्षमता | परिणाम / नोट |
|---|---|---|
| GPT-5.5 | GeneBench (जेनेटिक्स) | उल्लेखनीय पीढ़ीगत प्रगति |
| Mythos | BioMysteryBench | ३०% जटिल समस्याएं हल कीं |
| Claude Fable 5 | विशेषज्ञ स्तर के कार्य | ८५% गलत ब्लॉक में कमी |
| GPT-Rosalind | डेटा विश्लेषण वेग | ८ मिलियन कोशिकाओं का ३२ मिनट में विश्लेषण |
वैश्विक सुरक्षा संस्था NTI (Nuclear Threat Initiative) की रिपोर्ट के अनुसार, OpenAI का GPT-5.5 मॉडल जेनेटिक्स के जटिल परीक्षणों में बड़ी छलांग लगा रहा है। इसी तरह, Anthropic के 'Mythos' मॉडल ने बायोइंफॉर्मेटिक्स की ऐसी 30% समस्याएं हल की हैं जिन्हें मानव विशेषज्ञ भी हल नहीं कर पाए थे। इस स्थिति में, AI कंपनियों और वैज्ञानिकों ने अमेरिकी सरकार से अनुरोध किया है कि सिंथेटिक डीएनए (synthetic DNA) के ऑर्डर देते समय उसकी अनिवार्य स्क्रीनिंग और रिकॉर्ड रखने के लिए कानून बनाया जाए। सैम ऑल्टमैन और डेमिस हसाबिस जैसे दिग्गजों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। उनका मानना है कि डीएनए बनाने वाली मशीनों को जांचना चाहिए कि ग्राहक जो सीक्वेंस मांग रहा है, वह कहीं किसी खतरनाक वायरस का हिस्सा तो नहीं है।

भारत जैसे देशों के लिए यह तकनीक दोधारी तलवार के समान है। एक तरफ, AI द्वारा सस्ती दवाओं और टीकों का निर्माण भारत की विशाल जनसंख्या के लिए वरदान साबित हो सकता है। दूसरी तरफ, जैव-सुरक्षा में कोई भी खामी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट खड़ा कर सकती है। अभी अधिकांश देशों में सामान्य AI के लिए नियम हैं, लेकिन बायोलॉजी में इसके विशिष्ट उपयोग के लिए कोई कड़े कानून नहीं हैं। OpenAI ने अपने बायोसेफ्टी गार्डरेल्स (guardrails) तोड़ने के लिए 50,000 डॉलर का इनाम भी घोषित किया है, ताकि वे अपनी प्रणाली की कमजोरियों को जान सकें और उनमें सुधार कर सकें।
| विषय | जैव-सुरक्षा (Biosafety) | जैव-सुरक्षा (Biosecurity) |
|---|---|---|
| मुख्य उद्देश्य | दुर्घटना वश होने वाले संक्रमण या फैलाव को रोकना | इरादतन दुरुपयोग या चोरी को रोकना |
| केंद्रबिंदु | शोधक और पर्यावरण की रक्षा | खतरनाक पैथोजन पर नियंत्रण |
| पद्धति | लैब प्रोटोकॉल और रक्षात्मक उपकरण | एक्सेस कंट्रोल और कानूनी देखरेख |
अंततः, AI और बायोसाइंस का मिलन मानवजाति के लिए एक नई आशा लेकर आया है। हम ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ कैंसर या अल्जाइमर जैसे असाध्य रोगों का इलाज शायद कुछ ही वर्षों में मिल जाएगा। परंतु इस प्रगति की कीमत सतर्कता है। यदि हम जैव-सुरक्षा के कड़े नियम और तकनीकी सुरक्षा कवच नहीं बनाएंगे, तो जो तकनीक जीवन बचाने के लिए बनी है, वही विनाश का कारण भी बन सकती है। सरकारों, वैज्ञानिकों और AI कंपनियों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि विज्ञान की यह क्रांति मानवता के कल्याण के लिए ही रहे।


