एआई सुपरकंप्यूटर्स की साँस: लिक्विड कूल्ड डेटा सेंटरों की भव्य रचना और ऊर्जा क्रांति
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीव्र विकास के साथ दुनियाभर में पावरफुल डेटा सेंटरों की माँग बढ़ने के कारण, सर्वरों को ठंडा रखने के लिए हवा के स्थान पर तरल आधारित कूलिंग सिस्टम अनिवार्य हो रहे हैं।

आज के इस आधुनिक युग में जब हम ChatGPT या अन्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (artificial intelligence) मॉडल से कोई प्रश्न पूछते हैं, तब क्षणभर में मिलने वाला उत्तर हजारों मील दूर स्थित एक विशाल मशीन हाउस में संसाधित होता है। इन स्थानों को डाटा सेंटर (data center) कहा जाता है, जो डिजिटल जानकारी के भंडारण, प्रबंधन और प्रोसेसिंग के लिए भौतिक बुनियादी ढांचा प्रदान करते हैं। सामान्य तौर पर इन केंद्रों में हजारों सर्वर (server): कंप्यूटिंग प्रोसेसिंग करने वाले कंप्यूटर्स और हाई-स्पीड नेटवर्किंग केबल व्यवस्थित होते हैं। सबसे बड़े डाटा सेंटर 1,00,00,000 वर्ग फुट (लगभग 9,30,000 वर्ग मीटर) जितनी जगह में फैले होते हैं, जो सामूहिक रूप से पूरे शहरों जितनी बिजली की खपत करते हैं।
IBM (आइसीबीएम) की ऐतिहासिक रिपोर्ट के अनुसार, डाटा सेंटरों का इतिहास 1940 के दशक में यूनाइटेड स्टेट्स की सैन्य प्रणाली इलेक्ट्रिकल न्यूमेरिकल इंटीग्रेटर एंड कंप्यूटर (ENIAC) से शुरू हुआ था। तब से लेकर आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सुपरकंप्यूटर्स के युग तक इस तकनीक में भव्य परिवर्तन आया है। AI प्रोसेसिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) अत्यधिक गर्मी उत्पन्न करते हैं। पारंपरिक एयर कूलिंग (air cooling): पंखे द्वारा हवा फेंककर ठंडक देने की पद्धति अब इस अति-सांद्र गर्मी को दूर करने में असफल साबित हो रही है। इस समस्या के समाधान के रूप में लिक्विड कूलिंग (liquid cooling): तरल के वहन द्वारा गर्मी दूर करने की तकनीक डाटा सेंटरों का भविष्य बदल रही है।

यह क्रांति कैसे काम करती है इसे समझने के लिए सर्वर तकनीक और थर्मोडायनामिक्स के नियम जानना आवश्यक है। लिक्विड कूलिंग तकनीक तरल की ऊष्मा चालकता (thermal conductivity) पर आधारित है। पानी या विशिष्ट डाइइलेक्ट्रिक तरल (dielectric fluid): बिजली का वहन न करने वाला तरल हवा की तुलना में गर्मी को काफी अधिक कार्यक्षमता से सोख सकता है। कंप्यूटिंग क्षेत्र में यह तकनीक मुख्य रूप से दो प्रकार से उपयोग की जाती है: इनडायरेक्ट या कोल्ड प्लेट कूलिंग (cold plate cooling) और डायरेक्ट या इमर्शन कूलिंग (immersion cooling)।
कोल्ड प्लेट कूलिंग पद्धति में, प्रोसेसर या चिपसेट के ऊपर तांबे (copper) का एक छोटा ब्लॉक रखा जाता है जिसमें से पानी या कूलेंट लगातार बहता है। यह तरल गर्मी सोख लेता है और ट्यूब द्वारा सर्वर के बाहर स्थित हीट एक्सचेंजर (heat exchanger): ऊष्मा का आदान-प्रदान करने वाले उपकरण तक ले जाता है। दूसरी ओर, इमर्शन कूलिंग में पूरे के पूरे सर्वर घटकों को बिजली का वहन न करने वाले विशिष्ट तरल से भरे टैंक में डुबो दिया जाता है। तरल सीधे ही गर्म घटकों के संपर्क में आने के कारण गर्मी दूर करने की दर बहुत अधिक मिलती है। इस पद्धति से पंखे की आवाज शून्य हो जाती है और ऊर्जा की बर्बादी भारी मात्रा में घटती है।
| प्रकार | क्षमता / माप | मुख्य उपयोग | कूलिंग बिजली हिस्सा |
|---|---|---|---|
| हाइपरस्केल (Hyperscale) | १०० MW से अधिक (१,१३६ सेंटर) | क्लाउड और AI ट्रेनिंग | कूलिंग पीछे मात्र ~७% बिजली |
| कोलोकेशन (Colocation) | विशाल क्षमता (४,७९९ सेंटर) | बहुविध कंपनियों के लिए किराए जगह | उच्च समूह कार्यक्षमता |
| एंटरप्राइज (Enterprise) | छोट से मध्यम आंक | कंपनी का आंतरिक डाटा | कूलिंग पीछे ३०% से अधिक बिजली |
| एज (Edge) | १ से १० MW | 5G, IoT और कम लेटेंसी | स्थानीय विकेंद्रीकृत कार्य |
मालिकी, मापदंड और उपयोग के आधार पर डाटा सेंटरों को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। प्रथम श्रेणी एंटरप्राइज (enterprise) डाटा सेंटर की है, जिसे कोई एक कंपनी अपनी आंतरिक ज़रूरतों के लिए चलाती है। २०१४ में यू.एस. के कुल सर्वर ऊर्जा खपत में इन केंद्रों का हिस्सा ६०% से अधिक था, जो २०२३ तक घटकर मात्र १०% जितना रह गया है। एंटरप्राइज सेंटरों में कूलिंग के पीछे कुल बिजली का ३०% से अधिक हिस्सा खर्च हो जाता है, जिसके कारण उनकी कार्यक्षमता कम मानी जाती है।
दूसरी महत्वपूर्ण श्रेणी कोलोकेशन (colocation) डाटा सेंटर की है। इन सेंटरों में बिल्डिंग, पावर और कूलिंग सिस्टम एक मालिक के होते हैं, जबकि विभिन्न कंपनियाँ अपनी सर्वर रैक वहाँ किराए पर रखकर चलाती हैं। २०२४ के आँकड़ों के अनुसार, दुनिया की लगभग २२% डाटा सेंटर क्षमता कोलोकेशन केंद्रों के पास है, और दुनियाभर में ऐसे ४,७९९ कोलोकेशन सेंटर कार्यरत हैं। Equinix, Switch, COPT और Digital Realty जैसी वैश्विक कंपनियाँ इस क्षेत्र में सबसे आगे हैं।
तीसरी और सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली श्रेणी हाइपरस्केल (hyperscale) डाटा सेंटर की है। ये १०० मेगावाट (MW) से अधिक बिजली क्षमता वाले अति विशाल केंद्र हैं, जो Amazon Web Services (AWS), Microsoft Azure और Google Cloud जैसी क्लाउड और AI कंपनियों द्वारा संचालित होते हैं। २०२४ के अंत तक दुनियाभर में १,१३६ ऑपरेशनल हाइपरस्केल डाटा सेंटर थे, जो आँकड़ा पिछले पाँच वर्षों में दोगुना हो गया है। वैश्विक हाइपरस्केल क्षमता में से ५४% अकेले यूनाइटेड स्टेट्स में है, और अग्रणी तीन कंपनियाँ (AWS, Azure, Google) कुल हाइपरस्केल क्षमता का ५९% हिस्सा रखती हैं।
चौथा प्रकार एज (edge) डाटा सेंटर का है, जो १ से १० मेगावाट के छोटे और विकेंद्रीकृत यूनिट होते हैं। ये सेंटर उपयोगकर्ताओं के करीब (जैसे सेल टावर या औद्योगिक क्षेत्रों) स्थापित किए जाते हैं ताकि 5G नेटवर्क, स्वायत्त वाहनों (autonomous vehicles) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डाटा को मिलीसेकंड के छोटे हिस्से में प्रोसेस किया जा सके।
- ऊष्मा उत्पन्न होनाAI प्रोसेसिंग दौरान सर्वर की GPU और CPU चिप भारी मात्रा में गर्मी उत्पन्न करती है।
- कोल्ड प्लेट द्वारा शोषणचिप पर रखी तांबे की कोल्ड प्लेट से गुजरता हुआ तरल गर्मी को त्वरित सोख लेता है।
- तरल का परिसंचरणपंप द्वारा गर्म हुआ कूलेंट तरल होस ट्यूब मार्फत सर्वर बाहर हीट एक्सचेंजर में जाता है।
- ठंडक और पुनरुपयोगचिलर या कूलिंग टावर द्वारा तरल से गर्मी बाहर फेंक इसे फिर से सर्वर में भेजा जाता है।
लॉरेंस बर्कले नेशनल लेबोरेटरी के २०२४ के यू.एस. डाटा सेंटर एनर्जी यूसेज रिपोर्ट के अनुसार, २०२३ में अमेरिका के ७४% कंप्यूटर सर्वर हाइपरस्केल और कोलोकेशन केंद्रों में स्थापित थे, जो अनुपात २०२८ तक ८५% तक पहुँचने का अनुमान है। हाइपरस्केल सेंटर कूलिंग के क्षेत्र में अति कार्यक्षम होते हैं; वहाँ कूलिंग के पीछे कुल बिजली का लगभग ७% हिस्सा ही खर्च होता है।
वैश्विक ऊर्जा खपत के आंकड़े अत्यधिक चौकाने वाले हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट के अनुसार, २०२४ में दुनियाभर के डेटा सेंटरों की कुल बिजली खपत लगभग ४१५ टेरावाट ऑवर्स (TWh) दर्ज की गई, जो विश्व की कुल बिजली खपत के लगभग १.५% के बराबर है। पिछले पांच वर्षों में यह खपत प्रति वर्ष १२% की दर से बढ़ी है। IEA का अनुमान है कि २०३० तक यह खपत दोगुनी होकर ९४५ TWh तक पहुँच सकती है, जिसमें वार्षिक १५% की वृद्धि दर रहेगी। २०२४ में सभी प्रकार के डेटा सेंटरों की कुल ऊर्जा खपत ६२० TWh थी, जिसमें से ८०% खपत केवल यू.एस., चीन और यूनाइटेड किंगडम में केंद्रित थी।
एक सामान्य डेटा सेंटर १,००,००० घरों जितनी बिजली का उपयोग करता है, लेकिन AI ट्रेनिंग के लिए वर्तमान में बनाए जा रहे अगली पीढ़ी के हाइपरस्केल कैंपस उससे २० गुना अधिक बिजली यानी ३,००० मेगावाट से भी अधिक पावर की माँग कर रहे हैं। Gartner के शोध के अनुसार, २०२१ में दुनियाभर में डेटा सेंटर बुनियादी ढाँचे पर खर्च $२०० अरब तक पहुँच गया था, जो कोविड-१९ महामारी के बावजूद २०२० की तुलना में ६% की वृद्धि दर्शाता है।

डेटा सेंटर आर्थिक विकास के बड़े इंजन साबित हो रहे हैं। PwC के आर्थिक प्रभाव विश्लेषण के अनुसार, २०२१ में डेटा सेंटर उद्योग ने अमेरिका के जीडीपी (GDP) में $४८६ अरब का योगदान दिया था और ४२ लाख से अधिक रोजगारों को समर्थन दिया था। डेटा सेंटर में पैदा होने वाली प्रत्येक १ प्रत्यक्ष नौकरी अर्थव्यवस्था में अन्य ६ परोक्ष नौकरियों का सृजन करती है। हालांकि, इसके मुकाबले स्थानीय स्तर पर पर्यावरणीय और ऊर्जा के दबाव के कारण भारी विरोध भी देखने को मिल रहा है।
डेटा सेंटर वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, मई २०२४ से मार्च २०२५ की समयावधि में स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों के विरोध के कारण कुल $६४ अरब के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट अटक गए या देर से शुरू हुए, जिनमें ६ प्रोजेक्ट पूरी तरह से रद्द कर दिए गए थे और १० प्रोजेक्ट में विलंब हुआ था। यूरोप, यू.एस. और दक्षिण अमेरिका में पानी के अत्यधिक उपयोग और बिजली के दाम बढ़ने को लेकर नागरिकों में चिंता बढ़ रही है।

भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जहाँ डिजिटल सेवाएँ और AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लिक्विड कूल्ड हाइपरस्केल डेटा सेंटर भविष्य की रीढ़ बनेंगे। सुपरकंप्यूटरों की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए पारंपरिक एयर कूलिंग अब अपनी सीमाओं तक पहुँच गई है। लिक्विड कूलिंग अपनाने से डेटा सेंटरों की विद्युत कार्यक्षमता बढ़ेगी और पर्यावरणीय पदचिह्न (carbon footprint) घटाने में मदद मिलेगी। आगामी दशक में ऊर्जा के नए स्रोतों और तरल कूलिंग की उन्नत तकनीकें ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की महाक्रांति को निरंतर जीवित रखेंगी।


