दिल्ली हाईकोर्ट ने सीएम रेखा गुप्ता के डीपफेक वीडियो हटाने का आदेश दिया
अदालत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा बनाई गई आपत्तिजनक सामग्री को तत्काल हटाने का निर्देश दिया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, रात 10:45 · अपडेट रात 11:29 · 3 मिनट का पाठ
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दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को बड़ी राहत देते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा तैयार किए गए डीपफेक चित्रों और वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने का आदेश दिया है। यह मामला मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा, गरिमा और उनके व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनालिटी राइट्स) के संरक्षण से जुड़ा था। अदालत ने आदेश दिया है कि मुख्यमंत्री को शराब विक्रेता के रूप में दिखाने वाली सामग्री वाले छह URL को तत्काल हटाया जाए।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस मनोज जैन की एकल न्यायाधीश पीठ के समक्ष हुई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के वकील समीर रोहतगी ने अदालत में तर्क दिया कि यदि इस मामले की तत्काल सुनवाई नहीं की गई और आवश्यक अंतरिम आदेश पारित नहीं किए गए, तो वादी यानी मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि AI द्वारा बनाई गई तस्वीरें और वीडियो लगातार उपलब्ध हैं और बहुत तेजी से वायरल हो रहे हैं।
वकील समीर रोहतगी ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि इस डीपफेक सामग्री में मुख्यमंत्री को शराब विक्रेता, फेरीवाले और डिलीवरी एजेंट के रूप में दिखाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी सामग्री से मुख्यमंत्री की छवि, प्रतिष्ठा और गरिमा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इसके अलावा, उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आपत्तिजनक सामग्री प्रमाणित राजनीतिक दलों के सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा फैलाई जा रही है, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) के अकाउंट्स शामिल हैं।
रोहतगी ने आगे कहा कि यदि इस मामले में कार्रवाई में देरी हुई, तो ये तस्वीरें और वीडियो बड़े पैमाने पर साझा और प्रसारित होंगे, जिससे भविष्य में मिलने वाली राहत का कोई खास असर नहीं रहेगा। इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अंतरिम आदेश पारित किया और सोशल मीडिया से आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का निर्देश दिया ताकि उनके निरंतर प्रसार के खिलाफ तत्काल राहत मिल सके।
इस मुकदमे में मुख्यमंत्री द्वारा सिंथेटिक मीडिया और नकली तस्वीरों एवं वीडियो बनाने और उन्हें फैलाने पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा, पहले से उपलब्ध ऐसी सभी सामग्री और उसकी सभी प्रतियों को हटाने की मांग की गई है। प्लेटफॉर्म के रिकॉर्ड के माध्यम से इस सामग्री को बनाने और फैलाने वाले अज्ञात व्यक्तियों की पहचान करने की भी मांग की गई है।
मुख्यमंत्री की याचिका में AI कंटेंट बनाने के लिए उपयोग किए गए प्रॉम्प्ट्स, सोर्स फाइल्स और मेटाडेटा को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इसके साथ ही, जिम्मेदार पक्षों द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और ₹2,00,10,000 के मुआवजे के भुगतान की मांग की गई है। यह पूरा मामला AI के युग में व्यक्तिगत अधिकारों और प्रतिष्ठा के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है।
अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया है कि महिला मुख्यमंत्री का अपमान करना राजनीतिक व्यंग्य (political satire) नहीं है। आदेश के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि राजनीतिक मतभेदों के नाम पर किसी की गरिमा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। इस मामले में आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया द्वारा फैलाई गई कथित मानहानिकारक सामग्री के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है।
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