सुप्रीम कोर्ट ने अवैध हिरासत पर लगाई रोक, मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं बहाल करने का आदेश
दिल्ली में आपातकाल जैसे हालात के बीच कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को दिए सख्त निर्देश
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 1:40 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
दिल्ली में हाल ही में हुई सामूहिक गिरफ्तारियों और नागरिक अधिकारों पर लगाए गए प्रतिबंधों के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक असाधारण और अपवाद स्वरूप सुनवाई की। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को अवैध हिरासत तुरंत रोकने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लोगों की आवाजाही, मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहनी चाहिए, हालांकि यह आदेश 'कानून-व्यवस्था' के अधीन रहेगा। यह कार्यवाही ऐसे समय में हुई है जब वरिष्ठ वकीलों ने दिल्ली की स्थिति की तुलना 1975 के आपातकाल से की थी।
इस मामले में अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की अध्यक्ष डी. थारा के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि अधिकारियों ने 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर मनाही की गई थी। कोर्ट ने इन सभी अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस को सार्वजनिक सड़कों पर लगाए गए बैरिकेड्स की समीक्षा करने और इंटरनेट कनेक्टिविटी में कोई बाधा न डालने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों के आसपास बीएनएसएस (BNSS) की धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने के लिए कहा गया है, ताकि वादी और वकील न्याय पाने के लिए कोर्ट तक पहुंच सकें। जस्टिस बागची ने जोर देकर कहा कि मध्य दिल्ली के 4 किमी के प्रतिबंधित क्षेत्र के बाहर कानूनी प्रक्रिया के बिना किसी को हिरासत में नहीं लिया जाएगा। उन्होंने जोड़ा कि जंतर-मंतर जैसे निर्धारित क्षेत्रों में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने की अनुमति मिलनी चाहिए और पत्रकारों तथा वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोका जाना चाहिए।
कोर्ट की कार्यवाही के दौरान भारी भीड़ के कारण अंतिम समय में कोर्टरूम बदलना पड़ा और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक में भी तकनीकी खराबी आ गई थी। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट का आभार व्यक्त किया, जिसके जवाब में जस्टिस बागची ने कहा कि न्यायपालिका देश की सेवा में हमेशा तत्पर है। उन्होंने 10 अक्टूबर को पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा किए गए नियमों के उल्लंघन पर गंभीर चिंता व्यक्त की। वकीलों ने बताया कि छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं सहित हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया था। ये लोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ विरोध प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए थे, जो देश भर में मतदाता सूची से लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विवाद के कारण शुरू हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जो संविधान के रक्षक के रूप में कार्य करती है। यह अदालत मौलिक अधिकारों के संरक्षण और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। पूर्व के कई महत्वपूर्ण फैसलों में कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के पक्ष में निर्णय दिए हैं, जिनमें अवैध हिरासत और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मामले शामिल हैं। कोर्ट की इस भूमिका को लोकतांत्रिक मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
गया एयरपोर्ट पर 10 किलो गांजे के साथ दो महिलाएं पकड़ी गईं
थाईलैंड से आई दोनों महिलाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग ₹10 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं।
પાણીપુરી વેચનારની ૧.૨ લાખની માસિક કમાણી જાણીને આઈઆઈટીના સ્નાતકો ચોંકી ગયા
ચાર આઉટલેટ્સ ચલાવતા વેપારીની કુલ માસિક નફાની રકમ ૪.૫ લાખ રૂપિયાથી વધુ હોવાનો દાવો
सुअरों में कृत्रिम गर्भाधान के लिए सरकार ने वीर्य उत्पादन के नए मानक जारी किए
पूर्वोत्तर भारत में आनुवंशिक सुधार और पशुपालकों की आजीविका बढ़ाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए