केरल PSC भर्ती में अनियमितताओं को लेकर भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति मुरमु से मुलाकात की
पूर्व राज्यपाल की सिफारिश के अनुसार PSC अध्यक्ष एम.आर. बैजू को हटाने की मांग की गई
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, रात 8:58 · 4 मिनट का पाठ
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नई दिल्ली में गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमु से मुलाकात की। राज्यसभा के मनोनीत सदस्य सी. सदानंदन मास्टर के नेतृत्व में इस प्रतिनिधिमंडल में केरल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और राज्यसभा की मनोनीत सदस्य पी.टी. उषा शामिल थीं। इस टीम द्वारा राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष एम.आर. बैजू और आयोग के अन्य सदस्यों को उनके पद से हटाने की मांग की गई थी।
हिंदुस्तान टाइम्स और द हिंदू की रिपोर्टों के अनुसार, यह मांग केरल के पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर द्वारा की गई सिफारिश पर आधारित है। अर्लेकर ने केरल से तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में अपनी नियुक्ति से पहले राष्ट्रपति को सिफारिश की थी कि स्टेट प्लानिंग बोर्ड की भर्ती में हुई कथित अनियमितताओं की क्राइम ब्रांच जांच के बाद एम.आर. बैजू को हटाया जाना चाहिए। राज्य के इतिहास में यह पहली बार था जब किसी राज्यपाल ने PSC अध्यक्ष को बर्खास्त करने की सिफारिश की हो। भाजपा टीम ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे इस सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट भेजें।
राजीव चंद्रशेखर ने बैठक के बाद मीडिया को बताया कि केरल के कई युवा पिछले कुछ महीनों से नौकरियों से वंचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि PSC पर CPM और SFI जैसे निहित हितों का कब्जा है, जिसके कारण प्रशासनिक तंत्र में खामियां पैदा हुई हैं। PSC के रैंक धारक पिछले 100 से अधिक दिनों से सचिवालय के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन उम्मीदवारों की मुख्य मांगों में LPST रैंक लिस्ट की अवधि समाप्त होने से पहले सभी पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र देना, सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक पदों की नियुक्ति PSC को सौंपना, भर्ती में कथित 'कैश-फॉर-जॉब' प्रथा को समाप्त करना और शिक्षक-छात्र अनुपात को 1:25 तक कम करना शामिल है।
चंद्रशेखर ने कांग्रेस पार्टी पर दुविधा और पाखंडी रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस तमिलनाडु में 'छात्रों की गूंज' जैसे कार्यक्रमों के जरिए छात्रों के मुद्दे उठा रही है, तब केरल में बेरोजगारी और PSC की अनियमितताओं पर मौन है। राहुल गांधी पर प्रहार करते हुए उन्होंने पूछा कि यदि वे तमिलनाडु जा सकते हैं, तो केरल की गंभीर बेरोजगारी के बारे में बात करने के लिए यहाँ क्यों नहीं आते?
इसके अलावा, भाजपा नेता ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के मुद्दे पर भी कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने बताया कि कांग्रेस दिल्ली में SIR के खिलाफ सवाल उठाती है लेकिन केरल में इसे समर्थन देती है। चंद्रशेखर ने आगे कहा कि 2026 के चुनाव में केरल के लोगों के साथ धोखाधड़ी की गई थी, जहाँ कांग्रेस और CPM अलग होने का ढोंग कर रहे थे, लेकिन पिछले छह महीनों से कांग्रेस दिल्ली में SIR के खिलाफ CPM का समर्थन पाने के लिए उसे भ्रष्टाचार की जांच से बचाने के प्रयास कर रही है।
दूसरी ओर, केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सत्यनंद ने बुधवार को पूर्व राज्यपाल अर्लेकर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के साथ किसी परामर्श के बिना ही राज्यपाल ने अध्यक्ष बैजू को हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी थी।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर इससे पहले केरल के राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे और उसके बाद उनका तबादला तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में किया गया था।
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