DRDO ने स्वदेशी क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' का सफल उड़ान परीक्षण किया
ओडिशा के तट पर हुए इस परीक्षण के बाद अब सशस्त्र बलों में मिसाइल का शामिल होना तय माना जा रहा है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 4:10 · अपडेट दोपहर 1:16 · 3 मिनट का पाठ
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा 5 नवंबर, 2026 को क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ का सफल उड़ान परीक्षण किया गया। यह परीक्षण ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सुबह लगभग 11:10 बजे किया गया था। पीआईबी (PIB) और रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, यह उड़ान परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों (user evaluation trials) के हिस्से के रूप में किया गया था। चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) द्वारा तैनात विभिन्न रेंज उपकरणों द्वारा कैप्चर किए गए आंकड़ों ने पुष्टि की है कि परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्य पूरी तरह से पूरे हो गए हैं।
इस मिसाइल का विकास हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) द्वारा DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से स्वदेशी रूप से किया गया है। इस प्रणाली के उत्पादन और विकास में भागीदार कंपनियों में से एक भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) है, जिसने इस विशिष्ट मिसाइल प्रणाली का निर्माण किया है। इस महत्वपूर्ण उड़ान परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा उद्योग के प्रतिनिधि और सशस्त्र बलों के अधिकारी उपस्थित थे। इस सफल परीक्षण के साथ अब इस मिसाइल प्रणाली का भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होना imminent यानी बहुत करीब हो गया है।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस सफल उड़ान परीक्षण के लिए DRDO, सशस्त्र बलों और उद्योग भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उन्नत तकनीक से लैस यह मिसाइल उभरते खतरों से लड़ने के लिए सेना की तकनीकी क्षमता और परिचालन तैयारियों को और मजबूत करेगी। इसके अलावा, रक्षा सचिव, रक्षा आरएंडडी विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण से जुड़ी सभी टीमों को बधाई दी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, प्रलय एक उन्नत सॉलिड-प्रोपेलेंट, क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। यह मिसाइल विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने में सक्षम है। अपने वजन के आधार पर इसकी स्ट्राइक रेंज 150 से 500 किलोमीटर तक की प्रभावशाली क्षमता रखती है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मोबाइल लॉन्च क्षमता है, जो इसे सामरिक लचीलापन (tactical flexibility) प्रदान करती है। यह क्षमता दुश्मन देश की रक्षा प्रणालियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है।
द हिंदू और अमर उजाला की रिपोर्टों के अनुसार, यह सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सभी तकनीकी लक्ष्य प्राप्त कर लिए गए हैं, जो भारत की आत्मनिर्भरता की ओर कदमों को और गति देते हैं। इस मिसाइल के सफल परीक्षण से भारतीय सेना की रणनीतिक ताकत में वृद्धि होगी और सीमा सुरक्षा और अधिक सुदृढ़ होगी।
विकिपीडिया के बैकग्राउंड डेटा के अनुसार, प्रलय DRDO द्वारा विकसित एक कैनिस्टराइज्ड सरफेस-टू-सरफेस, शॉर्ट-रेंज, टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल थी। इस मिसाइल में प्रहार टैक्टिकल मिसाइल और एक्सो-एटमोस्फेरिक इंटरसेप्टर पृथ्वी डिफेंस व्हीकल के लिए तैयार की गई तकनीक के संयोजन का उपयोग किया गया था। प्रलय के विकास के लिए परियोजना मार्च 2015 में ₹332.88 करोड़ के बजट के साथ मंजूर की गई थी और यह 2022 में शामिल होने के लिए तैयार हो गई थी।
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