घटिया गुणवत्ता वाली दवा बनाने वाले निर्माताओं के लाइसेंस तत्काल रद्द करने का केंद्र का प्रस्ताव
ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन कर मरीजों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम लाने की तैयारी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 7:14 · अपडेट सुबह 7:23 · 4 मिनट का पाठ
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केंद्र सरकार अब उन दवा निर्माताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी जिनके उत्पाद गुणवत्ता परीक्षणों में विफल रहते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि जिन निर्माताओं की दवाएं निर्धारित मानकों को पूरा करने में विफल रहती हैं और उन्हें 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' (NSQ) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, उनके उत्पादन लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए जाएंगे। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है।
मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में 'उत्पादन लाइसेंस निलंबित करने' के लिए एक नया क्लॉज जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। इस नए नियम के तहत, यदि सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट यह घोषित करती है कि दवा एसे (assay), डिसोल्यूशन, संबंधित पदार्थों, अशुद्धियों या स्टेरिलिटी के संदर्भ में NSQ है, तो उत्पादन लाइसेंस को तत्काल निलंबित कर दिया जाएगा। मंत्रालय के बयान के अनुसार, दवाओं की गुणवत्ता निर्धारित करने के लिए ये सभी मानक अत्यंत निर्णायक हैं।
वर्तमान प्रचलित नियमों के तहत, उत्पादन लाइसेंस निलंबित करने या रद्द करने के लिए एक विशिष्ट नियामक प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है, जिसमें कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) देना शामिल है। इस प्रक्रिया के कारण दवा को NSQ घोषित करने और नियामक कार्रवाई शुरू करने के बीच समय का अंतर रह सकता है। इस अवधि के दौरान घटिया गुणवत्ता वाली दवाएं बाजार में बनी रह सकती हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं और दवाओं को बाजार से वापस मंगाने (recall) में कठिनाई पैदा कर सकती हैं। नए संशोधन के माध्यम से इस समय अवधि को कम करके तत्काल हस्तक्षेप संभव हो सकेगा।
एक बार लाइसेंस निलंबित होने के बाद, इसे फिर से चालू करने के लिए निर्माता को अनिवार्य सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। लाइसेंस का निलंबन तभी रद्द किया जाएगा जब निर्माता गुणवत्ता विफलता के कारणों का पता लगाने के लिए प्रभावी 'रूट कॉज एनालिसिस' (मूल कारण विश्लेषण) करेगा और लाइसेंस देने वाले प्राधिकरण के संतोषजनक ढंग से उचित कदम लागू करेगा। यह पूरी प्रक्रिया पूरी होने और सभी मानकों के पालन की पूर्ण जांच के बाद ही लाइसेंस बहाल किया जाएगा।
इस प्रस्ताव में फॉर्म 13 में भी महत्वपूर्ण संशोधन सुझाए गए हैं, जो सरकारी विश्लेषक की परीक्षण रिपोर्ट से संबंधित है। नई योजना के तहत, विश्लेषक की रिपोर्ट ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के लाइसेंसिंग प्राधिकरण (जिसके अधिकार क्षेत्र में उत्पादन साइट स्थित है), साथ ही संबंधित दवा बनाने वाली और मार्केटिंग करने वाली कंपनी को भेजी जाएगी। मंत्रालय के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य NSQ के निष्कर्षों के बारे में संबंधित अधिकारियों और हितधारकों को समय पर सूचित करना है, ताकि एकीकृत नियामक कार्रवाई की जा सके और दवा उत्पादन एवं मार्केटिंग श्रृंखला में जवाबदेही मजबूत की जा सके।
ये प्रस्तावित संशोधन ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) की 20 दिसंबर, 2024 को हुई 65वीं बैठक में हुई चर्चा और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की 24 अप्रैल, 2025 को हुई 92वीं बैठक की सिफारिशों के आधार पर किए गए हैं।
ड्रग्स रूल्स, 1945 भारत में दवाओं के उत्पादन, बिक्री और वितरण को नियंत्रित करने वाले मुख्य नियम हैं। ये नियम दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता बनाए रखने के लिए विभिन्न मानकों और प्रक्रियाओं को निर्धारित करते हैं।
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