AMU में आठ साल बाद छात्र संघ चुनाव, महिला छात्राओं ने उठाए मतदान अधिकार के सवाल
लगभग 22 हजार छात्र पांच विभिन्न पदों के लिए मतदान करेंगे
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 12:44 · अपडेट सुबह 1:31 · 4 मिनट का पाठ
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में लगभग आठ साल के लंबे अंतराल के बाद छात्र संघ के चुनाव कराए जा रहे हैं। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस चुनाव प्रक्रिया में लगभग 22 हजार छात्र और छात्राएं अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस चुनाव के माध्यम से विश्वविद्यालय में पांच महत्वपूर्ण पदों के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव किया जाएगा, जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव सहित कैबिनेट और एएमयू कोर्ट के सदस्य शामिल हैं।
हालांकि, इन चुनावों की तैयारियों के बीच विवाद भी खड़ा हो गया है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, एएमयू विमेंस कॉलेज की छात्राओं के एक समूह ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। इन छात्राओं ने मांग की है कि उन्हें 5 नवंबर, 2026 को होने वाले छात्र संघ चुनाव में मतदान करने का अवसर दिया जाए। रिपोर्ट में बताया गया है कि विमेंस कॉलेज की 4,000 से अधिक छात्राओं के पास छात्र संघ (AMUSU) के चुनाव में मतदान करने का अधिकार नहीं है।
छात्राओं ने इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी, केंद्रीय उच्च शिक्षा सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी और अतिरिक्त सचिव आनंदराव वी. पाटिल को भी पत्र भेजा है। इसके अलावा, उन्होंने जस्टिस (रिटायर्ड) एस. रवींद्र भट्ट की अध्यक्षता वाले नेशनल टास्क फोर्स के समक्ष भी अपनी चिंताएं प्रस्तुत की हैं। नौ पन्नों के एक ज्ञापन में छात्राओं ने तर्क दिया है कि उन्हें AMUSU के चुनाव से बाहर रखना समान प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक भागीदारी का उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि 2010-11 और 2011-12 के दौरान लिंगदो समिति की सिफारिशों के अनुसार विमेंस कॉलेज की छात्राओं ने AMUSU चुनाव में भाग लिया था, लेकिन 2012 में विश्वविद्यालय ने भौगोलिक दूरी और अलग विमेंस कॉलेज छात्र संघ (WCSU) के अस्तित्व का हवाला देते हुए इस व्यवस्था को बदल दिया, जिसे बाद में 2019 के चुनाव नियमों में औपचारिक रूप दिया गया था।
छात्राओं का कहना है कि 2019 के नियमों के अनुसार उन्हें AMUSU में मतदान या उम्मीदवारी का अधिकार नहीं है, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। विशेष रूप से फोर-ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) के अंतिम वर्ष की छात्राओं को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। उनकी मांग है कि महिला छात्राओं को विभागों या विमेंस कॉलेज में अध्ययन करने का विकल्प मिलना चाहिए और महिलाओं के लिए सीटों की संख्या पुरुषों के समकक्ष होनी चाहिए।
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है। द हिंदू को दिए एक बयान में एएमयू के जनसंपर्क अधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला छात्रा को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया गया है। उन्होंने समझाया कि जिन छात्राओं ने विमेंस कॉलेज में प्रवेश लिया है, वे 5 नवंबर को अपने कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में मतदान करेंगी, जिस दिन AMUSU का चुनाव भी होना है। उन्होंने आगे कहा कि कुछ छात्राओं को मुख्य परिसर के विभागों में कक्षाओं में उपस्थित होने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे उन विभागों की छात्राएं बन गई हैं।
इस पूरी घटनाक्रम ने लंबे समय बाद होने वाले चुनाव के माहौल को गरमा दिया है, जहां एक तरफ प्रशासन चुनाव कराने की तैयारी में है और दूसरी तरफ महिला छात्राएं समान अधिकारों की मांग कर रही हैं।
इस समाचार का स्रोत
- एनडीटीवी इंडिया
- Hindustan Times
- The Times of India
- The Hindu
- एनडीटीवी इंडिया
- India Today
- आज तक
- The Times of India
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