कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान अब आधार के बजाय वोटर आईडी से होगी
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि बायोमेट्रिक के साथ वोटर आईडी कार्ड अब पहचान का मुख्य आधार बनेगा।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, सुबह 12:42 · अपडेट रात 10:01 · 3 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, जिन्हें लल्लन सिंह के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अब पंचायती राज मंत्रालय के तहत विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान करने और उन्हें भुगतान करने की प्रक्रिया में आधार कार्ड के बजाय वोटर आईडी कार्ड का उपयोग किया जाएगा। इस नई व्यवस्था में लाभार्थियों को अपनी पहचान साबित करने के लिए वोटर आईडी कार्ड यानी ईपीआईसी (EPIC) नंबर के साथ बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य होगा। यह जानकारी उन्होंने मंगलवार, 3 नवंबर, 2026 को गंगटोक में सिक्किम कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दी।
मंत्री ने इस संबंध में बातचीत पहले दिल्ली में भी की थी। दिल्ली में उनके मंत्रालय द्वारा 'पीपल्स प्लान कैंपेन (PPC) 2026-27' पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के दौरान उन्होंने यह मुद्दा उठाया था। मंत्री ने आधार कार्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान में आधार कार्ड कहीं भी आसानी से उपलब्ध है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि, "यदि कोई चाहे तो वह 5 मिनट में आधार कार्ड बना सकता है।" उनके अनुसार, आधार कार्ड हर गली के कोने पर आसानी से बन सकता है, इसलिए इसमें धोखाधड़ी की संभावनाएं बनी रहती हैं, जिसका लाभ गलत लाभार्थी उठा सकते हैं। इसलिए, सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने और केवल पात्र लाभार्थियों को ही लाभ मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए यह बदलाव अनिवार्य है।
राजीव रंजन सिंह ने आगे कहा कि, वर्तमान समय में आधार कार्ड लाभार्थियों को भुगतान का मुख्य आधार है, लेकिन अब इसे प्राथमिक पहचान के रूप में नहीं माना जाएगा। इसके बजाय, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और वोटर आईडी कार्ड के डेटा के आधार पर ही सरकारी लाभों का भुगतान किया जाएगा। मंत्री के अनुसार, इस नई पद्धति से सिस्टम में मौजूद फर्जी प्रविष्टियों को हटाया जा सकेगा और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक मजबूत तथा पारदर्शी बनेगी। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब विपक्ष द्वारा 'वोट चोरी' यानी मतदाता सूची से नाम अवैध रूप से हटाए जाने के आरोपों के साथ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि 16वें वित्त आयोग ने 2026-31 की अवधि के लिए 2.55 लाख पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों के लिए कुल ₹4,35,236 करोड़ के अनुदान की सिफारिश की है। इतनी बड़ी राशि के आवंटन और उसके उचित वितरण के लिए सरकार अब अधिक सतर्क हो गई है। मंत्री के बयान के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य धोखाधड़ी को रोककर सरकारी योजनाओं का लाभ सही जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना है। यह नई व्यवस्था कैसे लागू होगी और इससे लाभार्थियों की पंजीकरण प्रक्रिया में क्या बदलाव आएगा, इस संबंध में विवरण आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, इस निर्णय को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं, क्योंकि आधार कार्ड के बजाय वोटर आईडी को प्राथमिकता देने का निर्णय एक बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है।
बिहार के सरकारी स्कूलों में 2026-27 से कक्षा 1 और 2 में क्षेत्रीय भाषाएं आएंगी
मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है
गया एयरपोर्ट पर 10 किलो गांजे के साथ दो महिलाएं पकड़ी गईं
थाईलैंड से आई दोनों महिलाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग ₹10 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं।
પાણીપુરી વેચનારની ૧.૨ લાખની માસિક કમાણી જાણીને આઈઆઈટીના સ્નાતકો ચોંકી ગયા
ચાર આઉટલેટ્સ ચલાવતા વેપારીની કુલ માસિક નફાની રકમ ૪.૫ લાખ રૂપિયાથી વધુ હોવાનો દાવો