फिक्स पे प्रथा रद्द करने की मांग के साथ कर्मचारी आंदोलन के लिए सज्ज
सचिवालय घेरने की तैयारियों के चलते प्रशासनिक तंत्र अलर्ट और पुलिस बंदोबस्त चुस्त
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, सुबह 11:27 · अपडेट दोपहर 3:41 · 2 मिनट का पाठ
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गुजरात में विभिन्न सरकारी योजनाओं और विभागों में वर्षों से विवाद का केंद्र बनी रही ‘फिक्स पे’ यानी नियत वेतन प्रथा के खिलाफ एक बार फिर बड़ा विद्रोह भड़कने के संकेत मिल रहे हैं। राज्य के हजारों युवा कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक बड़े संगठन ने सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है।
कर्मचारी संगठनों द्वारा फिक्स पे नीति पर तीखे प्रहार किए जा रहे हैं। इस नीति पर आक्षेप लगाते हुए कर्मचारियों ने बताया है कि, "फिक्स पे नीति शिक्षित युवाधन का सीधा शोषण है।" इस मांग के साथ कर्मचारी अब उग्र आंदोलन के मूड में आ गए हैं।
इस आंदोलन को गति देने के लिए सोशल मीडिया का सक्रिय उपयोग किया जा रहा है। विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप्स, फेसबुक और ट्विटर पर सचिवालय पहुंचने के लिए संदेश लगातार प्रसारित किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन की तारीखों और सचिवालय घेरने के संदेश तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसके कारण राज्य का प्रशासनिक तंत्र और गांधीनगर पुलिस फौरन अलर्ट मोड में आ गई है।
कर्मचारियों के इस आंदोलन से सतर्क होकर खुफिया विभाग (IB) भी सक्रिय बन गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कर्मचारी सचिवालय परिसर में प्रवेश न करें, इसके लिए प्रशासनिक तंत्र द्वारा कड़े कदम उठाए गए हैं। सचिवालय के प्रवेश द्वारों और मुख्य सर्कलों पर चुस्त पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया है।
सचिवालय की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर लोहे का पुलिस पहरा बैठा दिया गया है। सुबह से ही मुख्य मार्गों पर आड़े बैरिकेड्स रख दिए गए हैं। पुलिस द्वारा आते-जाते वाहनों की सघन चेकिंग भी शुरू कर दी गई है ताकि कोई भी अप्रिय घटना न घटे।
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