PMAY-G लाभार्थियों को संस्थागत ऋण देने के लिए ऋण संस्थान तैयार
लोनावला में आयोजित सुधार संवाद में ग्रामीण आवास के लिए सस्ते ऋण का रोडमैप तैयार किया गया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
3 नवंबर 2026, सुबह 7:52 · 3 मिनट का पाठ
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ग्रामीण आवास योजना (PMAY-G) के तहत लाभार्थियों को सस्ता और संस्थागत ऋण मिल सके, इस उद्देश्य से लोनावला में एक महत्वपूर्ण संवाद आयोजित किया गया। ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) और नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) द्वारा आयोजित 'PMAY-G रिफॉर्म संवाद' में विभिन्न ऋण संस्थानों ने ग्रामीण आवास के लिए समर्पित ऋण उत्पाद डिजाइन करने और सुधारों के लिए मंत्रालय तथा राज्यों के साथ काम करने की इच्छा व्यक्त की।
PIB की रिपोर्ट के अनुसार, इस एक दिवसीय संवाद में राज्य सरकारों, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs), स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs), माइक्रो फाइनेंस संस्थानों (MFIs) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) जैसे विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। इसके अलावा वर्ल्ड बैंक, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन, सा-धान और TCIS हैबिटेट फॉर ह्यूमैनिटी इंटरनेशनल भी इस चर्चा में शामिल थे।
चर्चा के दौरान ऋण संस्थानों ने बताया कि PMAY-G के तहत परिवार एक आशाजनक और काफी हद तक अप्रयुक्त क्षेत्र हैं। लाभार्थियों का सत्यापन योजना के तहत किया जाता है, सरकारी सहायता खर्च का एक बड़ा हिस्सा प्रदान करती है और निर्माण की ट्रैकिंग PMAY-G प्लेटफॉर्म पर माइलस्टोन के माध्यम से की जाती है, जिससे ऋण की लागत और जोखिम कम होता है।
मंत्रालय के सीनियर इकोनॉमिक एडवाइजर (ग्रामीण आवास) पीयूष श्रीवास्तव ने मुख्य भाषण देते हुए कहा कि PMAY-G दुनिया की सबसे बड़ी आवास योजना है और ग्रामीण आवास क्षेत्र में इसकी उपलब्धियां संतोषजनक हैं। उन्होंने सबके लिए आवास के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर अधिक एकीकृत प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि संस्थागत वित्तीय सहायता एक 'फोर्स मल्टीप्लायर' के रूप में काम कर सकती है।
PMAY-G का लक्ष्य मार्च 2029 तक 4.95 करोड़ पक्के मकानों को पूरा करना है। ग्रामीण घर बनाने की लागत अक्सर योजना के तहत मिलने वाली सहायता से अधिक हो जाती है, जिसके कारण निर्माण में देरी होती है और परिवार उच्च ब्याज वाले अनौपचारिक ऋणदाताओं की ओर रुख करते हैं। दूसरी ओर, जमीनी स्तर तक पहुंच रखने वाले संस्थानों के सामने धन की कमी, क्रेडिट रिस्क और प्रमाणित ग्रामीण आवास ऋण उत्पादों की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
संवाद के दौरान HFCs, SFBs और MFIs ने योजना की सहायता के अलावा भी क्रेडिट देने में गहरी रुचि दिखाई। हालांकि, भूमि के अस्पष्ट टाइटल, आवंटित संपत्तियों के मॉर्गेज पर प्रतिबंध, मौसमी आय, उच्च लेनदेन लागत और क्रेडिट रिस्क जैसे मुद्दों को मुख्य बाधा के रूप में दर्शाया गया। इन बाधाओं को दूर करने के लिए विभिन्न सिफारिशें भी की गईं।
इस कार्यशाला में महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, असम और केरल में PMAY-G की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार के ग्रामीण आवास निदेशक डॉ. राजाराम दिग्गे ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया और NHB के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय शुक्ला ने ग्रामीण परिवारों को उनके घर पूरे करने में मदद करने के लिए सस्ते संस्थागत ऋण की आवश्यकता पर जोर दिया।
मंत्रालय इस संवाद से प्राप्त सुझावों की जांच करेगा और NHB, राज्य सरकारों, ऋण संस्थानों और ज्ञान भागीदारों के साथ परामर्श करके आगे बढ़ेगा।
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