भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में 400 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने बताया कि यह निवेश देश की जरूरत से दोगुना है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, रात 10:44 · अपडेट रात 10:56 · 3 मिनट का पाठ
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भारत के रिन्यूएबल एनर्जी यानी नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक और स्थानीय निवेशकों द्वारा 400 अरब डॉलर के निवेश की प्राथमिक प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। यह जानकारी केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने बुधवार को दी। भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट के दौरान आयोजित सीईओ राउंडटेबल बैठक में निवेश के ये प्रस्ताव पेश किए गए थे।
मंत्री प्रहलाद जोशी ने पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि निवेश के ये आंकड़े फिलहाल प्राथमिक चरण में हैं। सरकार अब प्रत्येक निवेशक के साथ अलग से चर्चा करेगी और उनके प्रस्तावों की गहन जांच करेगी। यह निवेश प्रतिबद्धता वर्ष 2030 तक भारत की अनुमानित 220 अरब डॉलर की जरूरत से लगभग दोगुनी है। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि इनमें से कुछ प्रस्ताव लागू नहीं भी होते हैं, तो भी भारत अपनी 220 अरब डॉलर की जरूरत आसानी से पूरी कर सकेगा, क्योंकि समिट में मिला प्रतिसाद उम्मीद से कहीं अधिक है।
वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया के संघर्ष का निवेश पर प्रभाव संबंधी सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा कि अनिश्चितता के समय में भी अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत को एक आकर्षक और सुरक्षित स्थान के रूप में देख रहे हैं। निवेशकों ने मुख्य रूप से ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी के विभिन्न प्रोजेक्ट्स में रुचि दिखाई है।
इसके अलावा, बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज के लिए ₹ 14,500 करोड़ की वायबिलिटी गैप फंडिंग को मंजूरी दी है। मंत्री जोशी के अनुसार, इस निर्णय से ग्रिड की स्थिरता बनी रहेगी और रिन्यूएबल बिजली उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। वर्तमान में भारत की नॉन-फॉसिल क्षमता 308 गीगावाट है, जिसे वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार आगामी 10-11 वर्षों में 500 गीगावाट अतिरिक्त नॉन-फॉसिल क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखती है। इसके अलावा, वर्ष 2047 तक 1,800 गीगावाट तक पहुंचने की दीर्घकालिक योजना भी तैयार की गई है।
भारत सरकार का नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय देश में ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के अनुकूल बिजली उत्पादन के लिए जिम्मेदार है। मंत्रालय द्वारा पहले भी सौर और पवन ऊर्जा क्षेत्र में कई प्रोत्साहन नीतियां लागू की गई थीं, जिनका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना रहा है।
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