स्वच्छ ऊर्जा में निवेश के कारण पश्चिम एशिया के संकट का असर कम हुआ: पीएम मोदी
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट 2026 के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री ने 220 अरब डॉलर के निवेश के अवसर दर्शाए
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, रात 10:26 · अपडेट रात 9:14 · 4 मिनट का पाठ
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यदि भारत ने पिछले दशक में रिन्यूएबल एनर्जी यानी अक्षय ऊर्जा और उसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे तथा प्रणालियों को बनाने में निवेश नहीं किया होता, तो पश्चिम एशिया के संकट का असर दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में कहीं अधिक गंभीर होता। सोमवार, 2 नवंबर, 2026 को नई दिल्ली में 'भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026' के उद्घाटन अवसर पर संबोधित करते हुए उन्होंने यह महत्वपूर्ण बात कही थी।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लगातार वृद्धि कर रही है। उन्होंने पश्चिम एशिया के संकट के उदाहरण के माध्यम से समझाया कि ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है और ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा पर निर्भर है। उन्होंने चेतावनी दी कि जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता वैश्विक अस्थिरता के सामने जोखिम बढ़ा सकती है।
प्रधानमंत्री ने संभावित निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कहा कि इस दशक के अंत तक भारत का रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र लगभग 220 अरब डॉलर के निवेश के अवसर प्रदान करेगा। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने भारतीय बाजार की विशेषता समझाते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी अन्य हिस्से में भारत जैसे पैमाने, विस्तार और मांग के साथ राजनीतिक और नीतिगत स्थिरता देखने को नहीं मिलेगी।
सोलर क्रांति के अगले चरण के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने जोर दिया कि अब का चरण नवाचार (इनोवेशन) पर आधारित रहेगा। उन्होंने आवश्यक हार्डवेयर और बैटरी स्टोरेज सिस्टम के स्वदेशी उत्पादन तथा क्षमता बढ़ाने के क्षेत्र में मौजूद अवसरों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अपना विजन प्रस्तुत करते हुए कहा, "हमें एक ऐसा गतिशील वातावरण बनाना चाहिए जहां देश के मध्यम वर्ग के पास इलेक्ट्रिक व्हीकल का विकल्प हो और वे अपनी स्कूटी, बाइक या कार सोलर आधारित ऊर्जा से चार्ज कर सकें। इससे उन्हें काफी पैसे बचाने में मदद मिलेगी।"
प्रधानमंत्री ने आगे जोड़ा कि देश को ऐसे समाधानों की भी आवश्यकता है जो डेयरी क्षेत्र, पशुपालन और खेती में सोलर टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ावा दे सकें। उन्होंने भारत के सोलर क्षेत्र की प्रगति के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले एक दशक में भारत का सोलर मॉड्यूल उत्पादन 2 गीगावाट (GW) से बढ़कर 200 गीगावाट (GW) हो गया है, जबकि सोलर सेल बनाने की क्षमता बढ़कर लगभग 40 गीगावाट (GW) हो गई है। उन्होंने कहा कि अब वे अन्य घटकों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।
भारत बहुत ही कम समय में बहुत कुछ हासिल करने के लिए प्रयासरत है, यह बताते हुए पीएम मोदी ने आह्वान किया कि हमें यहां रुकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें प्रत्येक सरकारी इमारत, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और पूरे स्ट्रीट लाइटिंग नेटवर्क को बहुत ही तेज गति से सोलर एनर्जी के साथ जोड़ना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों और स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के बीच रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने में उनके प्रदर्शन को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, ताकि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों को प्रोत्साहन मिले और अन्य लोग भी उनका अनुकरण करें।
प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण आंकड़ा देते हुए बताया कि भारत में वर्तमान में लगभग 44,000 सरकारी इमारतें सोलर एनर्जी से संचालित हैं, जिसके परिणामस्वरूप वार्षिक कुल लगभग ₹700 करोड़ की बचत हुई है।
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