कर्नाटक के नए प्रीस्कूल नियमों से 25,000 केंद्र और 4.5 लाख नौकरियां खतरे में
कर्नाटक काउंसिल ऑफ प्रीस्कूल्स ने राज्य सरकार से नियमों की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति की मांग की है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 12:39 · अपडेट सुबह 12:54 · 4 मिनट का पाठ
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कर्नाटक में प्रीस्कूलों के लिए नए नियमों के कारण राज्य भर में 25,000 से अधिक केंद्र और लगभग 4.5 लाख महिलाओं की आजीविका खतरे में पड़ सकती है। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक काउंसिल ऑफ प्रीस्कूल्स (KCPS) ने राज्य सरकार से इन नियमों की समीक्षा करने का अनुरोध किया है।
काउंसिल ने कहा कि 2019 में जारी किए गए परिपत्र और विस्तृत निर्देशों सहित प्रशासनिक निर्देश ऐसे हैं जो बड़े शैक्षणिक संस्थानों के लिए अधिक अनुकूल हैं। ये नियम छोटे और आवासीय क्षेत्रों में काम करने वाले प्रीस्कूलों के लिए पालन करना कठिन है। यदि ये स्वतंत्र प्रीस्कूल बंद हो जाते हैं, तो शिक्षकों, देखभाल करने वालों और सहायक कर्मचारियों सहित लगभग 4.5 लाख महिलाओं का रोजगार छिन सकता है।
काउंसिल द्वारा घोषित मुख्य चुनौतियों में किराए पर ली गई आवासीय जगहों के लिए 30 साल की पंजीकृत लीज की आवश्यकता शामिल है। इसके अलावा, यह भी शर्तें रखी गई हैं कि क्लासरूम का आकार 18 फुट बाय 20 फुट होना चाहिए, भूमि का उपयोग शैक्षिक उद्देश्य के लिए किया जाना आवश्यक है और कम से कम 2,000 वर्ग फुट जगह होनी चाहिए। KCPS के अनुसार, ये शर्तें आवासीय पड़ोस में काम करने वाले छोटे प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा केंद्रों की जमीनी हकीकत को ध्यान में नहीं रखती हैं।
नियमों के कारण मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए प्रारंभिक बाल शिक्षा महंगी हो सकती है। काउंसिल ने दावा किया है कि यदि स्वतंत्र केंद्रों को बंद करना पड़ा, तो प्रतिस्पर्धा कम हो जाएगी और फीस में पांच गुना वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, इन केंद्रों के बंद होने से कामकाजी माताओं पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि वे अपने घर के पास सस्ती बाल देखभाल सुविधाओं पर निर्भर होती हैं। ऐसी स्थिति में कुछ कामकाजी माताओं को अपनी नौकरी के बारे में फिर से विचार करना पड़ सकता है।
प्रीस्कूल पंजीकरण पोर्टल के बारे में भी चिंता व्यक्त की गई है। काउंसिल ने आरोप लगाया कि यह पोर्टल आम जनता के लिए सुलभ नहीं है और इसका उपयोग केवल ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के कार्यालयों के माध्यम से ही किया जा सकता है। काउंसिल ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह एक पारदर्शी और कार्यात्मक ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल पर जनता की पहुंच बहाल करे।
KCPS ने शिक्षा मंत्री और राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि नियमों की समीक्षा करने और उन्हें सरल बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए। काउंसिल ने यह भी मांग की है कि किंडरगार्टन से कक्षा 12 तक के संस्थानों के लिए लागू होने वाले नियमों को लागू करने के बजाय, स्वतंत्र प्रीस्कूलों के लिए एक अलग ढांचा तैयार किया जाए। काउंसिल ने यह भी मांग की है कि जब तक उचित नियामक ढांचा पेश नहीं किया जाता, तब तक मौजूदा भवन, लीज और भूमि परिवर्तन की आवश्यकताओं पर तत्काल रोक लगाई जाए।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल ने कहा, "हम यहाँ अपने बच्चों के भविष्य, हमारी महिला श्रमिकों की गरिमा और हमारे अभिभावकों की जेब को बचाने के लिए हैं। सरकार को चुनना होगा—प्रगति या विनाश।"
काउंसिल ने राज्य सरकार से मौजूदा नियमों में छूट देने और स्वतंत्र प्रीस्कूलों, उनके कर्मचारियों और पड़ोस की बाल देखभाल सेवाओं पर निर्भर परिवारों को बचाने के लिए एक अलग नियामक प्रणाली शुरू करने की अपील की है।
कर्नाटक काउंसिल ऑफ प्रीस्कूल्स (KCPS) प्रीस्कूल क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए काम करने वाली एक संस्था थी।
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