दवा निर्माता कंपनियों के लिए बैच प्रमाण पत्र अनिवार्य बनाने की केंद्र की योजना
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ड्रग्स रूल्स, १९४५ में संशोधनों का प्रस्ताव पेश किया गया है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, सुबह 12:57 · अपडेट शाम 5:44 · 4 मिनट का पाठ
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दवाओं की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। मंत्रालय ने प्रस्ताव रखा है कि सभी फार्मास्युटिकल कंपनियों को बाजार में दवाओं के प्रत्येक बैच के बिक्री को मंजूरी देने के लिए आधिकारिक तौर पर एक योग्य विशेषज्ञ की नियुक्ति करनी होगी। यह जानकारी सरकार द्वारा मंगलवार को दी गई। ड्रग्स रूल्स, १९४५ के ड्राफ्ट संशोधन के अंतर्गत प्रत्येक दवा बनाने वाली कंपनी को बैच रिलीज के लिए खास जिम्मेदार ऐसे विशेषज्ञ की नियुक्ति करनी होगी। इसके अलावा कंपनियों को निर्धारित फॉर्मेट में बैच रिलीज प्रमाण पत्र देना होगा और उत्पादित हुए प्रत्येक लॉट के लिए उचित रिकॉर्ड रखना होगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में दवा बनाने वाली कंपनियों को उत्पादन और परीक्षण पर निगरानी रखने वाले तकनीकी कर्मचारियों की घोषणा करनी पड़ती है, लेकिन बिक्री के लिए बैच को मंजूरी देने वाले व्यक्ति की पहचान के लिए कोई निश्चित प्रावधान नहीं है। इस योजना के बारे में सरकार द्वारा फरवरी २०२५ में नियमों को कड़क करने की योजना बनाए जाने की जानकारी मिंट ने सबसे पहले दी थी। स्वास्थ्य मंत्रालय के मत में बैच रिलीज फार्मास्युटिकल उत्पादन प्रक्रिया में एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। जिसमें किसी भी बैच के वितरण से पहले संबंधित गुणवत्ता के मापदंडों और दस्तावेजों की व्यापक समीक्षा का समावेश होता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जोड़ा है कि इन प्रस्तावित संशोधनों से निर्माताओं को लागू होने वाली अच्छी उत्पादन प्रथाओं का पालन मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही दवाओं की गुणवत्ता आश्वासन को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे को भी अधिक मजबूत बनाया जाएगा। मंत्रालय के बयान के अनुसार, इन प्रस्तावित संशोधनों का मुख्य उद्देश्य बैच रिलीज के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की अधिकृतता के लिए स्पष्ट नियामक आवश्यकता प्रस्तुत करके दवा उत्पादन प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाना है।
सुधारे हुए ढांचे के तहत, संबंधित प्रावधानों के तहत उत्पादन लाइसेंस प्राप्त करना चाहने वाले आवेदकों को बैच रिलीज के लिए उचित रूप से योग्यता प्राप्त और अनुभवी व्यक्ति की नियुक्ति करनी होगी। इसके साथ ही निर्धारित आवश्यकताओं के अनुसार बैच रिलीज के रिकॉर्ड्स भी बनाए रखने होंगे। इन प्रस्तावित आवश्यकताओं का उद्देश्य इस कार्य के लिए स्पष्ट जवाबदेही स्थापित करना, बैच रिलीज के निर्णयों की ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करना और उत्पाद की गुणवत्ता पर निगरानी का अतिरिक्त स्तर प्रदान करना है।
देश में उत्पादित होने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंताओं के बीच यह विकास भारत के ६० अरब डॉलर के फार्मास्यूटिकल उद्योग के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण बन जाता है। भारत में बने और विदेश में भेजे गए सर्दी के कफ सिरप में कथित जहरीले तत्व पाए जाने के किस्से सामने आए थे। वर्ष २०२२ और २०२३ में गांबिया और उज्बेकिस्तान में बच्चों की मृत्यु हुई थी जो इन कफ सिरप से जुड़े हुए थे। इसके अलावा, गत वर्ष मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी दूषित दवाओं के कारण कम से कम २४ बच्चों की मृत्यु हुई थी। इन घटनाओं के बाद ड्रग रेगुलेटर ने स्थानीय फार्मास्यूटिकल यूनिटों के जोखिम-आधारित निरीक्षण को और अधिक तेज कर दिया है।
नियमों को अंतिम रूप देने के लिए सरकार ने ड्राफ्ट संशोधन पर ३० दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार यह नीतिगत बदलाव भारत में हेल्थकेयर और दवा बाजार को कैसे प्रभावित करते हैं, इसकी जानकारियां सामने आई हैं।
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