इसरो 2027 में कुलासेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट से करेगा पहला रॉकेट लॉन्च
तमिलनाडु में बन रहा यह भारत का दूसरा सक्रिय स्पेसपोर्ट देश की लॉन्च क्षमता में वृद्धि करेगा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 11:30 · अपडेट सुबह 11:38 · 3 मिनट का पाठ
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। इसरो के प्रमुख वी. नारायणन के अनुसार, तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में स्थित कुलासेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट से पहला रॉकेट लॉन्चिंग मार्च या अप्रैल 2027 में होने की उम्मीद है। यह केंद्र श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के बाद भारत का दूसरा सक्रिय स्पेसपोर्ट बनेगा।
इस परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2024 में रखी थी और वर्तमान में इसका निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। लंबे समय से भारत केवल श्रीहरिकोटा पर निर्भर था, जिसके कारण एक ही स्थान पर अधिक लॉन्चिंग होने से समय और संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा था। नया स्पेसपोर्ट इस बोझ को कम करने में मदद करेगा और देश की समग्र लॉन्च क्षमता में वृद्धि करेगा।
कुलासेकरपट्टिनम की भौगोलिक स्थिति इसे विशेष बनाती है। भारत के दक्षिणी तट पर स्थित होने के कारण यहाँ से रॉकेट सीधे हिंद महासागर के ऊपर उड़ान भर सकेंगे। इससे जमीन पर बसे क्षेत्रों के ऊपर से गुजरने का जोखिम कम होगा और सुरक्षा बढ़ेगी। इस केंद्र का मुख्य उपयोग स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) की लॉन्चिंग के लिए किया जाएगा।
SSLV विशेष रूप से छोटे उपग्रहों को कम लागत पर अंतरिक्ष में भेजने के लिए तैयार किया गया है, जो 500 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है। वर्तमान में दुनिया भर में संचार, पृथ्वी अवलोकन और इंटरनेट सेवाओं के लिए छोटे उपग्रहों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस नए स्पेसपोर्ट के माध्यम से भारत इस वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेगा।
यह सुविधा केवल सरकारी लॉन्चिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निजी कंपनियों के लिए भी अवसर प्रदान करेगी। भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया है और कई स्टार्टअप छोटे उपग्रह बनाने तथा लॉन्चिंग सेवाएं प्रदान करने में सक्रिय हैं। कुलासेकरपट्टिनम इन कंपनियों के लिए अत्यंत अनुकूल साबित होगा, जिससे व्यावसायिक लॉन्चिंग में वृद्धि होगी। इसरो का लक्ष्य 2029 तक चार ऑपरेशनल लॉन्च पैड रखना है, जिसमें यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ होगा। तमिलनाडु में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और तकनीकी विशेषज्ञता का विकास होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि मजबूत होगी क्योंकि छोटे उपग्रहों की लॉन्चिंग में भारत पहले से ही प्रतिस्पर्धी है। नया स्पेसपोर्ट लॉन्च फ्रीक्वेंसी बढ़ाएगा और लागत कम करेगा, जिससे देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान की क्षमता में भी वृद्धि होगी।
इस केंद्र के निर्माण में इंटीग्रेशन बिल्डिंग, लॉन्च पैड और ट्रैकिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाओं को शामिल किया गया है। कुल मिलाकर, कुलासेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को अधिक आत्मनिर्भर और विस्तृत बनाएगा। 2027 की पहली लॉन्चिंग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी, जो दर्शाती है कि भारत वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में निरंतर आगे ले जाएगा।
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