भारतीय बैंकों और फिनटेक कंपनियों पर चीन से जुड़े AI साइबर हमलों की चेतावनी
CERT-In ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से होने वाले हमलों के खिलाफ वित्तीय संस्थानों को आगाह किया है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 4:40 · अपडेट सुबह 9:01 · 4 मिनट का पाठ
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भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग करके किए जा रहे साइबर हमलों के संबंध में गंभीर चेतावनी जारी की है। इन हमलों का लक्ष्य बैंक, नॉन-बैंकिंग लेंडर्स (NBL), फिनटेक कंपनियां और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज जैसे वित्तीय संस्थान हो सकते हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने बुधवार, 4 नवंबर को 'क्राफ्टी फाल्कन' (Crafty Falcon) नामक हैकिंग समूह और चार AI टूल्स के बारे में जानकारी दी है, जिनका उपयोग भारतीय वित्तीय संस्थानों पर हमलों को स्वचालित करने के लिए किया जा रहा है। CERT-In के अनुसार, ये हमले सक्रिय और निरंतर जारी हैं, जिनमें इंटरनेट पर उपलब्ध AI टूल्स का उपयोग करके सिस्टम की कमजोरियों का तेजी से लाभ उठाया जा रहा है।
एजेंसी ने ARTEX, PentAGI, Cairn और CyberStrikeAI नामक चार टूल्स की पहचान की है। इनमें से कम से कम दो टूल्स का उपयोग चीनी सरकार द्वारा भारतीय वित्तीय संस्थानों के खिलाफ किया गया बताया जा रहा है। साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने भी कुछ टूल्स को भारत से जोड़ा है। CERT-In का कहना है कि यह समूह लक्ष्यों की पहचान करने और साइबर घुसपैठ को स्वचालित करने के लिए मशीन इंटेलिजेंस विकसित कर रहा है।
साइबर सुरक्षा फर्म क्राउडस्ट्राइक ने पहले रिपोर्ट किया था कि चीन द्वारा विकसित ARTEX टूल का उपयोग सितंबर के अंत से दक्षिण कोरिया के बैंकों पर हमला करने के लिए किया गया था। इस टूल को एक ऐसे हैकिंग समूह से जोड़ा गया था जो कथित तौर पर चीन से जुड़ा है और जिसने 14 देशों में 200 से अधिक संस्थानों के खिलाफ जासूसी अभियान चलाया था। ARTEX के डेवलपर ने पिछले महीने इस टूल को प्राइवेट कर दिया था।
CERT-In ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्राफ्टी फाल्कन के पीछे कौन सा व्यक्ति या संस्था है या ये हमले राज्य प्रायोजित हैं या नहीं। हमलावर वित्तीय कंपनियों के पेमेंट और डिस्बर्समेंट मैकेनिज्म का उपयोग करके फंड ट्रांसफर करते हैं। वे विशेष रूप से वीकेंड, छुट्टियों और ऐसे समय में सक्रिय होते हैं जब ऑफिस में कम कर्मचारी होते हैं और निगरानी कम होती है।
एजेंसी ने चेतावनी दी है कि जिन कंपनियों ने पिछली सुरक्षा चेतावनियों के बाद कमजोरियों को सुधारने का प्रयास किया था, लेकिन सुधार अधूरे रह गए थे, उन्हें फिर से निशाना बनाया गया है। हमलावर पहले से समझौता किए गए सुरक्षा सिस्टम और शेष खामियों का लाभ उठाने का प्रयास कर रहे थे।
हाल ही में भारतीय वित्तीय संस्थानों में कई साइबर घटनाएं हुई हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस शिकायत के आधार पर पता चला है कि 8 और 9 अक्टूबर को 700 से अधिक अनधिकृत इंस्टेंट ट्रांसफर के माध्यम से मुंबई स्थित दो नॉन-बैंकिंग लेंडर्स ने लगभग 2 मिलियन डॉलर गंवाए। ये लेनदेन ICICI बैंक के माध्यम से किए गए थे। शिकायत में आरोप है कि हैकर्स ने एपीआई (APIs) में घुसपैठ की थी, जो बैंकों, लेंडर्स और फिनटेक कंपनियों को भुगतान और ऋण के बारे में संवाद करने में सक्षम बनाते हैं।
इसके अलावा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले महीने बताया था कि डार्क वेब पर उसके 3,897 ग्राहकों के रिकॉर्ड लीक हुए हैं। 1 नवंबर को स्पंदना स्फूर्ति फाइनेंशियल द्वारा बैंक खातों से अनधिकृत डेबिट की जानकारी दी गई थी, जबकि AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने ग्राहक डेटा लीक होने की संभावना के संबंध में जांच चलाने की बात कही थी। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, यह चेतावनी जटिल पेमेंट इकोसिस्टम वाले संस्थानों के लिए AI-संचालित हैकिंग के बढ़ते जोखिम को दर्शाती है।
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