I4C ने बैंकों और NBFCs को AI आधारित हैकिंग के खतरों के प्रति आगाह किया
केंद्रीय एजेंसी ने मशीन की गति से होने वाले करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी वाले लेनदेन के संबंध में अलर्ट जारी किया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 6:38 · अपडेट सुबह 6:57 · 3 मिनट का पाठ
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केंद्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी I4C ने देश के सभी बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और फिनटेक कंपनियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से किए जाने वाले साइबर हमलों के प्रति सतर्क रहने के लिए कड़ी चेतावनी दी है। एजेंसी ने खुलासा किया है कि हैकर्स अब AI तकनीक का उपयोग करके अत्यंत तेजी से, यानी मशीन की गति पर, धोखाधड़ी वाले लेनदेन कर रहे हैं, जिससे वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान हो रहा है।
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, I4C ने विशेष रूप से करोड़ों रुपये के अनधिकृत फंड ट्रांसफर की घटनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। एजेंसी ने बताया कि हैकर्स AI-संचालित उपकरणों का उपयोग करके सुरक्षा व्यवस्था में खामियां ढूंढ रहे हैं और बहुत ही कम समय में बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी कर रहे हैं। इस प्रकार के हमले पारंपरिक हैकिंग की तुलना में अधिक तेज़ और जटिल होते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना और रोकना मुश्किल हो जाता है।
इन गंभीर जोखिमों को ध्यान में रखते हुए, I4C ने सभी वित्तीय संस्थानों को अपनी API (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) सुरक्षा को और मजबूत करने और अपग्रेड करने का आग्रह किया है। API दो अलग-अलग सॉफ्टवेयर को एक-दूसरे के साथ संवाद करने की अनुमति देता है, और यदि इसमें कोई कमजोरी होती है, तो हैकर्स इसका लाभ उठाकर सिस्टम में घुस सकते हैं और ग्राहकों के खातों से पैसे चुरा सकते हैं।
सुरक्षा के इन कड़े कदमों के साथ-साथ, I4C ने रिपोर्टिंग प्रक्रिया में भी सख्ती लाने का निर्देश दिया है। एजेंसी ने निर्देश दिया है कि किसी भी साइबर घटना या सुरक्षा उल्लंघन के मामले में, वित्तीय संस्थानों के लिए घटना के 6 घंटे के भीतर CERT-In (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सूचित करना अनिवार्य है। इस समय सीमा का उद्देश्य यह है कि समय पर जानकारी मिलने से अन्य बैंकों और संस्थानों को भी सचेत किया जा सके और अधिक नुकसान को रोका जा सके।
I4C ने स्पष्ट किया कि AI-संचालित ये हमले न केवल व्यक्तिगत खातों को, बल्कि पूरे वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता को जोखिम में डाल सकते हैं। विशेष रूप से फिनटेक कंपनियां, जो डिजिटल भुगतान और ऋण आवेदनों पर निर्भर हैं, वे इस प्रकार के हमलों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती हैं। इसलिए, इन सभी संस्थानों के लिए अपने साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करना और उन्हें आधुनिक बनाना आवश्यक है।
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब डिजिटल बैंकिंग का विस्तार हुआ है और साइबर अपराधी अधिक स्मार्ट तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। I4C द्वारा दिए गए इन निर्देशों का उद्देश्य वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता और सुरक्षा बनाए रखना है, ताकि आम नागरिकों का पैसा सुरक्षित रहे और बैंकिंग प्रणाली पर विश्वास बना रहे।
संस्थानों को अब इस बात पर ध्यान केंद्रित करना होगा कि वे कैसे AI-आधारित निगरानी प्रणाली स्थापित कर सकते हैं, जो संदिग्ध लेनदेन की वास्तविक समय में पहचान कर सके और उन्हें तुरंत ब्लॉक कर सके। I4C के अनुसार, यदि समय पर कदम नहीं उठाए गए, तो मशीन की गति से होने वाले ये फ्रॉड वित्तीय क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बने रहेंगे।
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