विदेशी मदद के आरोप पर राहुल गांधी का पीएम मोदी को खुली चर्चा की चुनौती
पीएम मोदी के बयान के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि मोदी विदेशी सहायता से सत्ता में हैं।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, रात 9:57 · अपडेट रात 10:05 · 5 मिनट का पाठ
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार, 2 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुली चर्चा के लिए चुनौती दी है। इस राजनीतिक टकराव की शुरुआत 31 अक्टूबर को गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से हुई थी। बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विपक्ष की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए थे और उन पर देश को अस्थिर करने का प्रयास करने का आरोप लगाया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार की नीतियों का विरोध करने की होती है, लेकिन दुर्भाग्य से भारत में विपक्ष ने अपना कर्तव्य छोड़कर विकास के मार्ग में बाधा उत्पन्न करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इसी बाधा को अपनी राजनीति का आधार बना लिया है और वे संविधान की गरिमा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। मोदी ने आगे आरोप लगाया कि विदेश में कुछ लोग गुप्त रूप से मिल रहे हैं और भारत विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिला रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अफवाहें फैलाकर भारत की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राहुल गांधी ने पलटवार किया। राहुल गांधी ने अंग्रेजी न्यूज़ वेबसाइट 'इंडियन एक्सप्रेस' के एक समाचार का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए पीएम मोदी को संबोधित करते हुए लिखा, "मोदी जी, इस देश से झूठ बोलना बंद कीजिए।" राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी स्वयं विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने हैं और विदेशी मदद के दम पर ही इस पद पर टिके हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह से विदेशियों के नियंत्रण और समर्थन में है और विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी पूरी तरह से मोदी के साथ खड़े हैं।
राहुल गांधी ने पीएम को चुनौती देते हुए कहा, "मैं आपको इस मुद्दे पर खुली चर्चा के लिए चुनौती देता हूं। कोई भी मंच, कोई भी समय। अगर हिम्मत है तो सामने आओ। आप नहीं आओगे, क्योंकि मैं आपके बारे में जो जानता हूं उससे आप डरते हैं।" हालांकि, राहुल गांधी ने अपनी इस पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे किस विदेशी मदद या किन विदेशी ताकतों की बात कर रहे हैं, और उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई विस्तृत प्रमाण या जानकारी नहीं दी है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में देश में चल रहे अन्य राजनीतिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण हैं। अक्टूबर महीने में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के साथ विपक्ष ने कई बार प्रदर्शन किए थे। 1 नवंबर, रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन द्वारा एक महा रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी सहित विपक्ष के कई दिग्गज नेता शामिल हुए थे। इस रैली के दौरान मोदी सरकार और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत के आरोप लगाए गए थे और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी।
विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के माध्यम से वोट चोरी करने का आरोप लगा रहा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया केवल वोटर लिस्ट को सुधारने का एक नियमित अभियान है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार चुनाव आयोग का बचाव कर रही है और राहुल गांधी तथा विपक्ष पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में किसी विशिष्ट नेता का नाम नहीं लिया कि वे विदेश में किससे मिल रहे हैं, लेकिन उनके बयान से राजनीतिक गरमाहट बढ़ गई है। राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को पकड़कर पीएम मोदी पर सीधा हमला किया है। यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि आगामी समय में सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच संघर्ष और तीव्र होगा। एक ओर भाजपा विपक्ष पर देश विरोधी ताकतों के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगा रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष भाजपा सरकार पर विदेशी ताकतों के इशारे पर चलने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा रहा है। वर्तमान में दोनों पक्षों के बीच इन आरोप-प्रत्यारोप के दौर के बीच जनता में भी ये मुद्दे चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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