भारतीय वायुसेना ने रेस कोर्स स्टेशन की 39.5 एकड़ जमीन L&DO को सौंपी
केंद्र सरकार लुटियंस दिल्ली क्षेत्र में सरकारी जमीनों पर फिर से कब्जा प्राप्त कर रही है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, रात 8:57 · अपडेट शाम 4:46 · 4 मिनट का पाठ
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भारतीय वायुसेना ने दिल्ली के रेस कोर्स एयर फोर्स स्टेशन में स्थित अपने स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की 39.5 एकड़ जमीन आधिकारिक तौर पर लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) को सौंप दी है। इस जमीन का हस्तांतरण 'जैसा है जहाँ है' (as is where is) के आधार पर किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह प्रक्रिया केंद्र सरकार की एक बड़ी पहल का हिस्सा है, जिसके तहत लोक कल्याण मार्ग के आसपास स्थित मुख्य सरकारी जमीनों को वापस लिया जा रहा है।
यह क्षेत्र सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यहाँ प्रधानमंत्री का निवास स्थित है। वायुसेना द्वारा सौंपी गई यह जमीन मुख्य रूप से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के रूप में उपयोग की जाती थी। इस कॉम्प्लेक्स में गोल्फ कोर्स, स्विमिंग पूल और अन्य विभिन्न खेल सुविधाएं उपलब्ध थीं।
L&DO द्वारा पहले इस क्षेत्र में लगभग 39.9 एकड़ जमीन की मांग की गई थी, जिसमें से 39.5 एकड़ जमीन अब उसके कब्जे में आ गई है। अगले चरण के रूप में, डिफेंस एस्टेट ऑफिस, भारतीय वायुसेना और L&DO की एक संयुक्त टीम इस क्षेत्र का सर्वेक्षण करेगी। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य जमीन की सटीक सीमाएं निर्धारित करना और यह जांचना है कि माप में कोई अंतर है या नहीं, ताकि जमीन का सटीक क्षेत्रफल स्पष्ट हो सके।
केंद्र सरकार पिछले कुछ महीनों से लुटियंस दिल्ली के इस क्षेत्र में सरकारी जमीनें वापस पाने का अभियान चला रही है और यह एकमात्र मामला नहीं है। इस अभियान के तहत पहले दिल्ली रेस क्लब की 53 एकड़ जमीन और जयपुर पोलो ग्राउंड पर भी कब्जा प्राप्त किया गया है। इसके अलावा, दिल्ली जिमखाना क्लब जैसी अन्य संपत्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई चल रही है।
सरकार का तर्क है कि ये सभी जमीनें सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, इन जमीनों के भविष्य के उपयोग के बारे में अभी तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है। यह क्षेत्र दिल्ली के सबसे महंगे और संवेदनशील क्षेत्रों में से एक होने के कारण, सरकार इसका उपयोग सार्वजनिक उपयोग, सुरक्षा व्यवस्था या अन्य विकास कार्यों के लिए कर सकती है।
जमीन हस्तांतरण की इस प्रक्रिया से पहले वायुसेना के भीतर कुछ चिंताएं देखी गई थीं। सेवानिवृत्त होने जा रहे वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अक्टूबर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर इस जमीन को वायुसेना के पास ही रखने की अपील की थी। उन्होंने पत्र में बताया था कि यह स्टेशन एयर हेडक्वार्टर को सहयोग प्रदान करता है और यह हजारों कर्मचारियों की सुविधाओं से जुड़ा हुआ है।
स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बंद होने के कारण कई पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों में नाराजगी भी देखी गई थी। इसके बावजूद, प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और अंततः जमीन सौंप दी गई। अब संयुक्त सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही जमीन का भविष्य तय होगा और वायुसेना को इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
यह पूरी घटना दर्शाती है कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री के निवास के आसपास की जमीनों पर अपना नियंत्रण मजबूत करना चाहती है। साथ ही, यह मामला रक्षा बलों और नागरिक प्रशासन के बीच समन्वय की आवश्यकता को भी उजागर करता है। कुल मिलाकर, यह कदम केंद्र की भूमि नीति का एक हिस्सा है, जिसमें मुख्य सरकारी संपत्तियों को वापस लाकर उनका सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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