भारत में मेडिकल डिवाइस से होने वाले गंभीर नुकसान के मामलों में तीन गुना वृद्धि
आरटीआई द्वारा घोषित आंकड़ों के अनुसार 2020 में 808 मामले थे जो 2025 में बढ़कर 2176 हो गए हैं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 9:13 · अपडेट दोपहर 1:44 · 4 मिनट का पाठ
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भारत में मेडिकल डिवाइस के उपयोग के कारण मरीजों को होने वाले गंभीर नुकसान के मामलों में पिछले छह वर्षों में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) के आंकड़े दर्शाते हैं कि वर्ष 2020 में ऐसे 808 मामले दर्ज किए गए थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 2,176 हो गए हैं। वर्ष 2020 से अब तक कुल 9,373 गंभीर मामले सामने आए हैं।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, ये आंकड़े पहली बार सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सामने आए हैं। केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के बाद IPC ने यह जानकारी सार्वजनिक की है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी प्राप्त करने के लिए कई बार RTI आवेदन किए गए थे। गंभीर मामलों की परिभाषा में ऐसी स्थितियों को शामिल किया जाता है जिनमें मरीज की जान को खतरा हो, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़े या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हों।
इससे पहले, IPC अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कुल मामलों की संख्या तो देता था, लेकिन गंभीर मामलों के अलग आंकड़े सार्वजनिक नहीं करता था। IPC ने मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों के नाम और उपकरणों की श्रेणी बताने से इनकार कर दिया था। IPC का कहना था कि इससे कंपनियों की व्यावसायिक गोपनीयता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, संस्था ने यह भी बताया कि यह स्पष्ट नहीं है कि कोई प्रतिकूल घटना उपकरण के कारण हुई है या प्रक्रिया में हुई गलती के कारण।
IPC देशभर में स्थित 775 मॉनिटरिंग केंद्रों से मेडिकल डिवाइस के उपयोग के बाद होने वाली प्रतिकूल घटनाओं की जानकारी एकत्र करता है। IPC की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में मेडिकल डिवाइस से संबंधित 14,584 प्रतिकूल घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से केवल 22 मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) को भेजा गया था। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 10,269 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 16 मामले आगे भेजे गए थे। वहीं वर्ष 2022-23 में 3,868 मामले सामने आए थे और उनमें से 12 मामले CDSCO को भेजे गए थे।
संदिग्ध उपकरणों की सूची में सर्जिकल ग्लव्स, सिरिंज, यूरिन बैग, प्रेग्नेंसी टेस्ट किट, कैथेटर और ब्लड प्रेशर मॉनिटर जैसे उत्पादों को शामिल किया गया है। कुछ मामलों में वेंटिलेटर, ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेट और हार्ट स्टेंट भी संदिग्ध उपकरणों की सूची में शामिल थे।
भारत में मेडिकल डिवाइस से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी के लिए वर्ष 2015 में मटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया शुरू किया गया था। IPC इस कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ऐसी घटनाओं की जानकारी प्राप्त करता है। नियमों के अनुसार, गंभीर प्रतिकूल घटनाओं की जानकारी 15 दिनों के भीतर IPC को देना अनिवार्य है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, यदि किसी घटना से मरीज की मृत्यु हो जाती है, जान का खतरा पैदा होता है, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है या स्थायी विकलांगता जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसे गंभीर घटना माना जाता है। अमेरिका में मेडिकल डिवाइस से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं की जानकारी के लिए MAUDE नामक एक सार्वजनिक डेटाबेस है, जिसमें उपकरण का ब्रांड, निर्माता, मॉडल और घटना का विवरण उपलब्ध होता है।
मटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया मेडिकल उपकरणों के उपयोग से होने वाले प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी के लिए एक व्यवस्था थी। इस कार्यक्रम के तहत उपकरणों की सुरक्षा और उनकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए डेटा एकत्र किया जाता था।
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