भारत में AI ट्रैफिक कैमरों की गलती से गलत चालान जारी
गिटार को पीछे बैठा व्यक्ति और पगड़ी को खुला सिर पहचाना गया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 4:55 · 3 मिनट का पाठ
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भारत में ट्रैफिक नियमों के स्वचालित कार्यान्वयन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संचालित ट्रैफिक कैमरों का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन इस तकनीक में बड़ी खामियां सामने आ रही हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सिस्टम की गलतियों के कारण मोटरसाइकिल और कार चालकों को बड़ी संख्या में गलत चालान भेजे गए हैं।
इन कैमरों द्वारा वस्तुओं की गलत पहचान किए जाने के मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में कैमरे ने गिटार को पीछे बैठे व्यक्ति (पिलियन) के रूप में पहचाना, जिसके कारण जुर्माना लगाया गया। इसी तरह, व्यक्ति द्वारा पहनी गई पगड़ी को सिस्टम ने खुले सिर (बिना हेलमेट) के रूप में पहचाना, जिसे ट्रैफिक नियम का उल्लंघन माना गया।
इस तकनीक की सटीकता को लेकर वाहन चालकों की शिकायतों में भारी उछाल आया है। इन घटनाओं ने सिस्टम की जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वाहन चालकों को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए तकनीक के विकास के साथ-साथ उसकी सटीकता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
दूसरी ओर, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के तहत 'IndiaAI Mission' द्वारा देश में स्वदेशी AI क्षमताओं को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने हाल ही में तीन स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल लॉन्च किए हैं: EKA-1, Dhīr 2B और Dhīr 5B। इन मॉडलों का अनावरण आईटी सचिव एस. कृष्णन और अन्य उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।
Soket Labs Technology and Research द्वारा विकसित EKA-1 मॉडल में 26.3 बिलियन पैरामीटर्स हैं और इसे लगभग 7.5 ट्रिलियन टोकन पर प्रशिक्षित किया गया है। यह अंग्रेजी सहित सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं को कवर करता है। Soket के CEO अभिषेक अपरवल ने बताया कि यह मॉडल विशेष रूप से भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह मॉडल मोबाइल डेटा या वाई-फाई के बिना भी स्मार्टफोन जैसे लोकल डिवाइस पर काम कर सकता है।
ZenteiQ AiTech Innovations द्वारा विकसित Dhīr 2B और Dhīr 5B ओपन-सोर्स मॉडल हैं, जो अंग्रेजी और 10 भारतीय भाषाओं का समर्थन करते हैं। ZenteiQ के CEO प्रो. शशिकुमार ने बताया कि ये मॉडल GPU और TPU जैसे विभिन्न कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म पर चल सकते हैं। अपनी हल्की आर्किटेक्चर के कारण यह क्लाउड कनेक्टिविटी के बिना मोबाइल फोन पर भी कार्य कर सकता है, जिससे डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सुधार होता है। इन मॉडलों का उपयोग रक्षा, सरकारी, औद्योगिक और शैक्षिक क्षेत्रों में, विशेष रूप से जहां कनेक्टिविटी कम हो, वहां किया जा सकेगा।
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय AI कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुसंधान व्यय के लिए मिली सब्सिडी के कारण इन मॉडलों का विकास संभव हो पाया है। सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, ऐसे स्वदेशी मॉडल भारत की तकनीकी और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि AIKosh जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से ये मॉडल शोधकर्ताओं, छात्रों और आम जनता के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि और अधिक प्रयोग किए जा सकें।
IndiaAI मिशन भारत सरकार की एक परियोजना है जिसका उद्देश्य देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमताओं को बढ़ाना और स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) तैयार करना है।
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