कारगिल के जवान को वॉर इंजरी पेंशन देने का केंद्र को आदेश
कारगिल में तैनाती के दौरान बीमारी का सामना करने वाले नरेंद्र कुमार को पेंशन देने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
29 अक्टूबर 2026, सुबह 3:46 · अपडेट सुबह 9:16 · 3 मिनट का पाठ
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि भारतीय सेना के सेवानिवृत्त जवान नरेंद्र कुमार को 'वॉर इंजरी पेंशन' का भुगतान किया जाए। नरेंद्र कुमार को 'रुमेटॉइड अर्थराइटिस' नामक बीमारी तब हुई थी जब वे कारगिल में तैनात थे। सुप्रीम कोर्ट ने अवलोकन किया कि सरकार अपनी नीति की व्याख्या इस तरह नहीं कर सकती जो उसके स्पष्ट लिखित विवरण के विरुद्ध हो या जो अनुचित और भेदभावपूर्ण परिणामों की ओर ले जाए।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) और हाईकोर्ट के पिछले आदेशों के खिलाफ की गई अपील को खारिज कर दिया। पिछले आदेशों में कुमार को डिसेबिलिटी पेंशन के बजाय वॉर इंजरी पेंशन देने का आदेश दिया गया था।
नरेंद्र कुमार 1996 में सेना में शामिल हुए थे। 2003 से 2005 के दौरान 'ऑपरेशन रक्षक' के तहत कारगिल में तैनात रहने के दौरान उन्हें इस बीमारी का निदान हुआ था। 2013 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें डिसेबिलिटी पेंशन मिल रही थी, जिसके लिए उन्होंने एएफटी का रुख किया था। कुमार ने रक्षा मंत्रालय के 2001 के नीति पत्र का हवाला दिया था, जो सरकार द्वारा विशेष रूप से निर्दिष्ट कार्यों के दौरान होने वाली अक्षमता को कवर करता है।
एएफटी ने अप्रैल 2024 में कुमार के दावे को मंजूरी दी थी और कहा था कि यह बीमारी कारगिल में तैनाती के दौरान हुई थी। हाईकोर्ट ने भी अगस्त 2025 में इस निर्णय को बरकरार रखा था। हालांकि, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया था कि 2001 का नीति पत्र केवल 'ऑपरेशन सिंदूर' या 'ऑपरेशन स्नो लेपर्ड' जैसे विशेष रूप से निर्दिष्ट कार्यों के लिए है, जो जम्मू-कश्मीर में चल रहे 'ऑपरेशन रक्षक' जैसे कार्यों को कवर नहीं करता है।
सरकार ने यह भी तर्क दिया था कि यदि कुमार के नीति पत्र की व्याख्या को स्वीकार किया जाता है, तो जम्मू-कश्मीर में तैनात प्रत्येक सैनिक को इसका लाभ मिलेगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नीति पत्र की श्रेणी E(i) सरकार को युद्ध जैसी स्थितियों को कवर करने की सुविधा देने के लिए है। कोर्ट ने आगे कहा कि जब नीति के शब्द सीमित न हों, तो कोर्ट का काम उसके उपयोग को सीमित करना नहीं है, विशेष रूप से जब यह पेंशन के लाभों से संबंधित हो।
कोर्ट ने सरकार को भविष्य में स्पष्ट रहने के लिए कहा है कि जब कार्यों को निर्दिष्ट किया जाए, तो कौन से पेंशन लाभ किसे लागू होंगे, यह स्पष्ट शब्दों में घोषित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय को सेवाओं के प्रबंधन के लिए व्यापक और स्पष्ट नियम बनाने का भी सुझाव दिया है ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
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