अफ्रीकी देश सौर ऊर्जा के लिए भारत से निवेश और तकनीक चाहते हैं
ज़िम्बाब्वे का लक्ष्य 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी को 49 प्रतिशत तक बढ़ाना है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 12:12 · अपडेट दोपहर 12:22 · 3 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
अफ्रीकी देश सौर ऊर्जा क्षेत्र में तकनीक के आदान-प्रदान, निवेश और क्षमता निर्माण के माध्यम से भारत के साथ सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं। रिन्यूएबल एनर्जी समिट और एक्सपो 2026 के इतर एएनआई (ANI) से बात करते हुए ज़िम्बाब्वे के ऊर्जा और बिजली विकास मंत्री जुलाई मोयो और लाइबेरिया के ऊर्जा उप-मंत्री चार्ल्स उमेह ने नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विस्तार में भारत-अफ्रीका सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
ज़िम्बाब्वे के मंत्री जुलाई मोयो ने बताया कि उनका देश 2030 तक बिजली उत्पादन में गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा की हिस्सेदारी को 49 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है, जो वर्तमान में 20 प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य में हाइड्रोपावर (जलविद्युत) भी शामिल होगा, जो पहले से ही देश के बिजली उत्पादन में लगभग 35 प्रतिशत योगदान देता है, लेकिन अतिरिक्त क्षमता का अधिकांश हिस्सा सौर ऊर्जा से आएगा।
मोयो ने कहा, “हम गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा को वर्तमान के 20 प्रतिशत के बहुत निचले स्तर से बढ़ाकर 49 प्रतिशत तक ले जाना चाहते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि इस विस्तार में हाइड्रोपावर शामिल होगा और यह “मुख्य रूप से” सौर ऊर्जा के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा।
ज़िम्बाब्वे ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) के साथ तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य सामुदायिक जागरूकता और प्रशिक्षण बढ़ाना, चिनहोई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में सौर नवाचार अनुसंधान को समर्थन देना और कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की क्षमताओं पर जोर देते हुए मोयो ने कहा कि भारत ने सौर उत्पादन और ग्रिड प्रबंधन में महत्वपूर्ण क्षमताएं विकसित की हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि, “औद्योगिक उत्पादन से लेकर नेशनल ग्रिड में सौर ऊर्जा को समाहित करने के लिए AI के उपयोग तक, भारत सौर ऊर्जा इकोसिस्टम में बहुत उन्नत है।”
हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नवीकरणीय ऊर्जा को पारंपरिक स्रोतों को पूरी तरह से बदलने के बजाय उनके पूरक के रूप में कार्य करना चाहिए। बैटरी स्टोरेज की सीमाओं और हाइड्रोपावर उत्पादन पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा रिप्लेसमेंट के बजाय विस्तार होना चाहिए।”
दूसरी ओर, लाइबेरिया अपनी सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय निवेश को आकर्षित करना चाहता है। चार्ल्स उमेह ने बताया कि लाइबेरिया ने अपना पहला 20 मेगावाट (MW) यूटिलिटी-स्केल सोलर फोटोवोल्टिक प्रोजेक्ट शुरू किया है। अब वे इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर (IPP) मॉडल के माध्यम से भविष्य की परियोजनाओं में भारतीय कंपनियों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
निवेशकों को आकर्षित करने के लिए लाइबेरिया नवीकरणीय ऊर्जा और सोलर फोटोवोल्टिक उत्पादों पर ड्यूटी-फ्री (शुल्क मुक्त) विशेषाधिकार दे रहा है। उमेह ने कहा, “यह एक बड़ा अवसर है जहां भारतीय कंपनियां आ सकती हैं और लाइबेरिया की संभावनाओं को तलाश सकती हैं। और हाँ, लाइबेरिया व्यापार के लिए खुला है।”
नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स के लिए वित्तीय सुलभता को एक मुख्य चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि लाइबेरिया उन इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स को प्रोत्साहित कर रहा है जिनके पास इस क्षेत्र में निवेश करने की वित्तीय क्षमता है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद तेहरान में उग्र विरोध
ईरानियों ने डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के विशाल पोस्टरों को जलाकर बदले की मांग की
हांगकांग के लोकतंत्र कार्यकर्ता जोशुआ वोंग को विदेशी मिलीभगत के लिए 10 साल की जेल
नेशनल सिक्योरिटी लॉ के तहत दूसरी बार दोषी ठहराए गए 30 वर्षीय कार्यकर्ता को सजा
दक्षिण अफ्रीका में स्थानीय चुनाव: भ्रष्टाचार और खराब सेवाओं के बीच ANC के सामने चुनौती
खराब सार्वजनिक सेवाओं और बढ़ती अपराध दर के कारण अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के समर्थन में बड़ी गिरावट की संभावना