एयरलाइन स्टाफ के दुर्व्यवहार के खिलाफ शिकायत के लिए दायर याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की
कोर्ट ने टिप्पणी की है कि नियम बनाना सक्षम अधिकारियों का नीतिगत विषय है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 2:51 · 2 मिनट का पाठ
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दिल्ली हाई कोर्ट ने एयरलाइन स्टाफ द्वारा यात्रियों के साथ किए जाने वाले दुर्व्यवहार, अभद्रता, उत्पीड़न, लापरवाही और अन्य गलत कृत्यों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने और जांच करने के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियम, विनियम और दिशानिर्देश तैयार करना सरकार और सक्षम अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में आता है और यह पूरी तरह से एक नीतिगत मामला है।
इस मामले में एक महिला ने याचिका दायर कर नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को निर्देश देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि इंडिगो एयरलाइंस के एक कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव ने उनसे बातचीत के दौरान अश्लील, अपमानजनक और लिंग-आधारित भाषा का इस्तेमाल किया था। महिला ने तर्क दिया कि एयरलाइन के समक्ष कई बार शिकायत करने के बावजूद संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई। इस पर इंडिगो की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि मौजूदा सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CARs) में यात्रियों द्वारा किए जाने वाले दुर्व्यवहार के लिए तो कड़े प्रावधान हैं, लेकिन एयरलाइन स्टाफ द्वारा किए जाने वाले दुर्व्यवहार के खिलाफ कोई प्रभावी ढांचा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार और DGCA पर भी इस मुद्दे पर निष्क्रियता का आरोप लगाया था। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि एयरलाइन कर्मचारियों के किसी भी अनियंत्रित व्यवहार को उचित दीवानी या आपराधिक कानूनी उपायों के जरिए हल किया जा सकता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में जो व्यवस्था है, वह पर्याप्त है।
यह संस्था देश में हवाई यात्रा के मानक तय करने और उनकी निगरानी करने का काम करती है। पूर्व के समय में भी इस संस्था ने यात्रियों की सुरक्षा और एयरलाइन संचालन के नियमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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