यदि पहले से मतदाता हों, तो फॉर्म 6 क्यों भरना पड़ता है? सुप्रीम कोर्ट का सवाल
चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
29 अक्टूबर 2026, सुबह 2:46 · अपडेट सुबह 12:58 · 2 मिनट का पाठ
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दिल्ली में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं आए हैं, उन्हें नए मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 क्यों भरने के लिए मजबूर किया जा रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह प्रश्न पूछा है। लाइव लॉ और बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने पारदर्शिता के अभाव संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाए।
कोर्ट ने अवलोकन किया कि फॉर्म 6 पहली बार पंजीकरण के लिए है, जबकि फॉर्म 8 नाम या पता सुधारने के लिए है। यदि किसी व्यक्ति का पता बदल गया है, तो उसे फॉर्म 8 के माध्यम से सुधार करने का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है? जस्टिस जोयमाल्या बागची ने कहा कि मताधिकार एक अत्यंत महत्वपूर्ण अधिकार है और इसे इतनी आसानी से छीना नहीं जा सकता। उन्होंने प्रक्रिया में मौजूद 'स्ट्रक्चरल विसंगति' के बारे में भी बात की।
याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण के अनुसार, ड्राफ्ट लिस्ट से लगभग 43 लाख लोगों को बाहर किया गया है। ये लोग पुरानी सूची में थे लेकिन पता बदलने या अन्य कारणों से एन्युमरेशन फॉर्म नहीं भर सके थे। चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील दमशेशद्री नायडू ने कहा कि SIR एक निरंतर विकसित होने वाली प्रक्रिया है और चिंताओं को दूर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
इस समाचार का स्रोत
- BBC हिंदी
- The Times of India
- The Times of India
- Hindustan Times
- Hindustan Times
- BBC ગુજરાતી
- Hindustan Times
- The Hindu
- The Economic Times
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