केरल में श्रम कानूनों के कार्यान्वयन के लिए ड्राफ्ट रिपोर्ट में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की सिफारिश
बोनस की पात्रता बढ़ाने और श्रमिकों के कल्याण के लिए नए प्रावधानों का सुझाव दिया गया है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, शाम 5:53 · 3 मिनट का पाठ
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केरल राज्य में चार नए श्रम कानूनों के कार्यान्वयन के लिए तैयार की गई ड्राफ्ट रिपोर्ट बुधवार को श्रम मंत्री बिंदू कृष्णा द्वारा मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन को सौंपी गई। 'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार, इस रिपोर्ट में श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन में वृद्धि करने और बोनस एवं अन्य लाभों के लिए पात्रता का दायरा बढ़ाने की महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार को तालाबंदी (लॉकआउट) और छंटनी (ले-ऑफ) जैसे मामलों में अधिक निर्णय लेने की स्वतंत्रता देने के लिए भी सुझाव दिए गए हैं। केरल सरकार ने अभी तक इन चार श्रम कानूनों के लिए नियम बनाने बाकी हैं, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा पिछले वर्ष नवंबर में घोषित किया गया था।
इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए 22 अक्टूबर को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी, जिसमें श्रम कानूनों के कार्यान्वयन के लिए व्यावहारिक सिफारिशें देने हेतु एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया था। इस समिति में श्रम आयुक्त संयोजक के रूप में, कानून विभाग के अतिरिक्त सचिव, सात ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधि और श्रम विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया था। इस समिति ने 10 दिनों तक विभिन्न चर्चाओं और जांच के बाद अपनी रिपोर्ट श्रम मंत्री को सौंपी है। रिपोर्ट में श्रमिकों के कल्याण, रोजगार सुरक्षा, वेतन और अन्य लाभ सुनिश्चित करने के लिए कानूनों में सुधार की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशों में श्रमिक के परिवार की परिभाषा में बदलाव शामिल है। वर्तमान में परिवार में तीन सदस्यों को गिना जाता है, जिसे बढ़ाकर पांच सदस्य करने का प्रस्ताव है, जिसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाएगा। इस बदलाव से न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की गणना में बदलाव आएगा, जिसके परिणामस्वरूप श्रमिकों को अधिक वेतन मिल सकेगा। इसके अलावा, जोखिम भरे व्यवसायों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए मुफ्त चिकित्सा जांच का प्रावधान भी सुझाया गया है। महिला श्रमिकों के लिए रात के समय काम करने की शर्तों में सख्त सुरक्षा दिशानिर्देशों को शामिल किया गया है, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
श्रम मंत्री बिंदू कृष्णा ने कहा कि श्रम कानूनों के कार्यान्वयन के दौरान श्रमिकों के अधिकारों और हितों का पूर्ण संरक्षण किया जाएगा। समिति ने केरल में श्रम कानूनों को लेकर चिंताओं और ट्रेड यूनियनों द्वारा की गई प्रस्तुतियों की भी जांच की थी। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा की अध्यक्षता में गठित एक विशेषज्ञ समिति ने भी इसी वर्ष जनवरी में कानूनी सुधारों पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए इन चार श्रम कानूनों में वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति (OSHWC) संहिता शामिल हैं। इन नए कानूनों ने पहले के 29 पुराने कानूनों का स्थान लिया है।
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