दिल्ली में BS-VI वाहनों के लिए नियमों पर स्टे देने से अदालत का इनकार
दिल्ली सरकार द्वारा अन्य राज्यों के BS-VI के अलावा अन्य वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ याचिका पर 27 नवंबर को सुनवाई होगी।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, शाम 4:40 · अपडेट शाम 7:53 · 5 मिनट का पाठ
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली सरकार द्वारा अन्य राज्यों में पंजीकृत और भारत स्टेज-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानकों का पालन न करने वाले वाहनों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने वाले शासनादेश पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन सांघी और जस्टिस संजय शर्मा की पीठ ने बताया कि फरीदाबाद स्थित वकील गुरुमुख दास कोहली द्वारा इन प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका पर अब 27 नवंबर को समान याचिका के साथ सुनवाई की जाएगी।
दिल्ली सरकार के विंटर एक्शन प्लान के तहत ये नियम रविवार से लागू हुए हैं, जो 31 जनवरी, 2027 तक प्रभावी रहेंगे। इन उपायों में यह निर्देश भी शामिल है कि जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) नहीं है, उन्हें ईंधन स्टेशनों से ईंधन देने की मनाही है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने शुक्रवार को इन प्रतिबंधों की घोषणा की थी और यात्रियों से अनुरोध किया था कि वे राजधानी में आने से पहले जांच कर लें कि उनके वाहनों में निर्धारित उत्सर्जन मानक हैं या नहीं।
याचिकाकर्ता गुरुमुख दास कोहली ने अपनी याचिका में बताया कि उनके पास हरियाणा में पंजीकृत BS-IV पेट्रोल वाहन है। उन्होंने तर्क दिया कि यह प्रतिबंध वाहनों के वास्तविक उत्सर्जन के बजाय उनके पंजीकरण स्थल के आधार पर भेदभाव करता है। उन्होंने आगे तर्क दिया कि तीन महीने का यह व्यापक प्रतिबंध प्रतिदिन के वायु गुणवत्ता स्तर को ध्यान में रखे बिना लागू किया गया है और यह कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के साथ सुसंगत नहीं है, जो प्रदूषण के स्तर के आधार पर प्रतिबंधों का प्रावधान करता है।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने प्रस्तावित BS-VI वाहन प्रतिबंधों से वकीलों, न्यायाधीशों और अदालत के कर्मचारियों को छूट देने की मांग की थी। DHCBA के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील एन. हरिहर ने एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन सांघी और दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर ताराजीत सिंह संधू को पत्र लिखकर इस मामले की ओर ध्यान आकर्षित किया था। एसोसिएशन ने बताया कि बड़ी संख्या में वकील नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद जैसे पड़ोसी शहरों से प्रतिदिन यात्रा करते हैं।
एसोसिएशन ने तर्क दिया कि दिल्ली में रहने की लागत बहुत अधिक होने के कारण कई वकीलों, न्यायाधीशों और अदालत के कर्मचारियों के लिए राजधानी में रहना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ये व्यक्ति न्याय प्रदान करने वाली आवश्यक सेवा प्रदान करते हैं और इसलिए उन्हें इन प्रतिबंधों से छूट मिलनी चाहिए। पत्र में यह भी ध्यान दिलाया गया कि BS-VI उत्सर्जन मानक दिल्ली में 2020 में पेश किए गए थे, जबकि परिवहन विभाग और सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न आदेशों के माध्यम से पिछले उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों को निर्दिष्ट जीवनकाल तक चलाने की अनुमति दी थी — जो डीजल वाहनों के लिए 10 वर्ष और पेट्रोल वाहनों के लिए 15 वर्ष तक है।
दूसरी ओर, दिल्ली उच्च न्यायालय ने बौद्धिक संपदा विवादों में 'फोरम शॉपिंग' के खिलाफ भी चेतावनी दी है। अदालत ने राजधानी के साथ केवल अल्प या नगण्य संबंध रखने वाले बौद्धिक संपदा के दावों को स्वीकार करने के प्रति आगाह किया है।
इसी बीच, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने अभिनेता इमरान खान की 'लीव इंडिया नोटिस' के खिलाफ निलंबन की अवधि बढ़ा दी है। अमेरिकी नागरिक और OCI कार्ड धारक इमरान खान को FRRO द्वारा 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का जो नोटिस दिया गया था, उस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें बिना शर्त माफी मांगने और भविष्य में विरोध प्रदर्शनों में भाग न लेने की गारंटी देने का निर्देश दिया है। इमरान खान को 10 अक्टूबर को मुंबई पुलिस द्वारा अगस्त क्रांति मैदान के पास पकड़ा गया था, जब वे चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने वाले SIR विरोधी प्रदर्शनों में शामिल थे। अदालत ने इमरान खान को इमिग्रेशन अधिकारियों के निर्णय की प्रतीक्षा करने तक भारत में रहने की अनुमति दी है और इस मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को रखी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के त्योहारों के दौरान घरेलू एयरफेयर की कीमतों पर सीमा लगाने की मांग करने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की विनती को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि हवाई किराया सामान्य किराए से 700 प्रतिशत बढ़ गया है। जस्टिस विक्रम नाथ द्वारा इस विनती को खारिज कर दिया गया था। केंद्र सरकार ने पहले सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि भारतीय विमानन अधिनियम, 2024 के तहत नए विमानन नियमों के लिए प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है, जो हवाई किराए को नियंत्रित करने के लिए संभावित रूप से दो सप्ताह में प्रकाशित होंगे। अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित है।
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