भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में हर पांच में से एक व्यक्ति गरीब, विश्व बैंक की रिपोर्ट
वर्ष 2023-24 में ग्रामीण गरीबी 19.3 प्रतिशत और शहरी गरीबी 8.6 प्रतिशत दर्ज की गई
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, सुबह 2:10 · 5 मिनट का पाठ
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एबीपी अस्मिता की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व बैंक द्वारा जारी किए गए हालिया आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी का स्तर शहरी क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत के गांवों में आज भी हर पांच में से एक व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहा है, जो देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच आर्थिक अंतर को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।
विश्व बैंक ने अप्रैल 2026 में जो डेटा जारी किया है, उसके अनुसार वर्ष 2023-24 के दौरान ग्रामीण भारत में गरीबी का स्तर 19.3 प्रतिशत दर्ज किया गया था। इसके मुकाबले शहरी भारत में यह स्तर काफी कम यानी 8.6 प्रतिशत रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि शहरों की तुलना में गांवों में गरीबी का स्तर दोगुने से भी अधिक है।
गरीबी के इन आंकड़ों की गणना के लिए प्रतिदिन 4.20 डॉलर की आय को गरीबी रेखा माना गया है। यदि इन आंकड़ों को सरल रूप में समझें तो, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक 100 लोगों में से लगभग 19 लोग गरीब हैं। जबकि शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक 100 लोगों में से केवल 9 लोग ही गरीबी रेखा के नीचे हैं। इसका अर्थ यह है कि शहरों में हर 12 व्यक्तियों में से 1 व्यक्ति गरीब है, जबकि गांवों में यह अनुपात हर 5 व्यक्तियों में से 1 व्यक्ति का है।
एबीपी अस्मिता की रिपोर्ट के अनुसार, गांवों में गरीबी का स्तर इतना ऊंचा होने का मुख्य कारण बेरोजगारी है। ग्रामीण भारत के अधिकांश लोग अभी भी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। कृषि पर इस निर्भरता और रोजगार के सीमित विकल्पों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी अधिक देखी जाती है।
इसके विपरीत शहरी क्षेत्रों में स्थिति अलग है। शहरों में नौकरियां, विभिन्न व्यवसाय और कामकाज के अन्य अवसर अधिक मात्रा में उपलब्ध होते हैं। इन अवसरों के कारण शहरी आबादी बेहतर वेतन प्राप्त कर सकती है, जिसके परिणामस्वरूप शहरों में गरीबी का स्तर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी कम है।
हालांकि, विश्व बैंक के आंकड़े एक सकारात्मक पहलू भी दर्शाते हैं। पिछले 12 वर्षों में भारत में गरीबी के स्तर में बड़ी गिरावट देखी गई है। प्रतिदिन 4.20 डॉलर की गरीबी रेखा के आधार पर देखा जाए तो, वर्ष 2011-12 में भारत में गरीबी का स्तर 57.7 प्रतिशत था। वर्ष 2023-24 तक यह आंकड़ा घटकर 16.1 प्रतिशत पर आ गया है।
गरीबी में इस कमी के बावजूद, अभी भी एक बड़ा वर्ग संघर्ष कर रहा है। वर्ष 2023-24 के डेटा के अनुसार, देश के लगभग 232 मिलियन लोग, जो लगभग 23.2 करोड़ लोग होते हैं, अभी भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि गरीबी घटने के बावजूद, करोड़ों लोग अपनी दैनिक बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अत्यधिक गरीबी की स्थिति का विश्लेषण करने पर पता चला है कि, प्रतिदिन 3 डॉलर की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा के अनुसार भारत में गरीबी का स्तर वर्ष 2011-12 में 27.1 प्रतिशत था। वर्ष 2023-24 में यह स्तर घटकर केवल 2.6 प्रतिशत रह गया है, जो अत्यधिक गरीबी में हुई बड़ी कमी को दर्शाता है।
इस रिपोर्ट में शिक्षा और गरीबी के बीच सीधा संबंध भी बताया गया है। वर्ष 2023 के डेटा के अनुसार, जो लोग बिल्कुल अनपढ़ थे, उनमें गरीबी का स्तर 21.3 प्रतिशत दर्ज किया गया था। जबकि जिन लोगों ने माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की थी, उनमें गरीबी का स्तर घटकर केवल 7.4 प्रतिशत रह गया था। यह अंतर साबित करता है कि शिक्षा गरीबी दूर करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
एबीपी अस्मिता की रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी को केवल कम आय से नहीं जोड़ा जा सकता। रिपोर्ट में 'बहुआयामी गरीबी' (Multidimensional Poverty) की अवधारणा के बारे में बताया गया है। अक्सर ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है कि परिवार की आय अच्छी हो, लेकिन उनके पास पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल, अच्छी शिक्षा, पीने का शुद्ध पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न हों। जब आय के साथ इन बुनियादी सुविधाओं का अभाव हो, तो उसे बहुआयामी गरीबी कहा जाता है।
हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2023 में भारत की लगभग 15.5 प्रतिशत आबादी इस बहुआयामी गरीबी में जी रही थी। यह बात संकेत देती है कि गरीबी की सही समझ पाने के लिए केवल लोगों की आय पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
सारांश में, विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में ग्रामीण भारत में 19.3% और शहरी क्षेत्रों में 8.6% लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं। 2011-12 के 57.7% से घटकर 2023-24 में 16.1% हुआ गरीबी का स्तर सुधार की ओर संकेत करता है, लेकिन 23.2 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा के नीचे होना और ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी एवं शिक्षा का अभाव अभी भी चिंता का बड़ा विषय है।
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