अरुणाचल प्रदेश में भूस्खलन में मारे गए अग्निवीर समुद्र सिंह की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़
डीएनए टेस्ट के जरिए पहचान होने के बाद राजस्थान के केसरपुर गांव में सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, रात 10:24 · 4 मिनट का पाठ
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राजस्थान के अलवर जिले के केसरपुर गांव के निवासी अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर, जो अरुणाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा में लापता हो गए थे, के पार्थिव शरीर की पुष्टि के बाद गांव में अत्यंत भावुक वातावरण में उन्हें अंतिम विदाई दी गई। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी के पशुपानी क्षेत्र में बादल फटने और भारी बारिश के कारण विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन हुआ था, जिसमें समुद्र सिंह गुर्जर सहित कई जवान लापता हो गए थे।
समुद्र सिंह 14 अगस्त 2026 को आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद से लापता थे। इस दुर्घटना में भारतीय सेना की 5 ग्रेनेडियर्स के हवलदार उपेन्द्र यादव और अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर सहित कुल पांच जवान लापता हुए थे। सेना द्वारा लंबे समय तक निरंतर रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसके अंत में जवानों के पार्थिव शरीर बरामद हुए।
भूस्खलन और बाढ़ की तीव्रता के कारण शवों की स्थिति ऐसी थी कि शुरुआत में उनकी पहचान करना अत्यंत कठिन हो रहा था। इस स्थिति को देखते हुए सेना द्वारा डीएनए (DNA) टेस्ट कराया गया। जब डीएनए रिपोर्ट का मिलान हुआ और समुद्र सिंह की पहचान की पुष्टि हुई, तब सेना ने उन्हें आधिकारिक तौर पर शहीद घोषित किया। इस लंबी प्रक्रिया के बाद ही उनके परिजनों को अपने पुत्र को अंतिम विदाई देने का अवसर मिला।
समुद्र सिंह के सम्मान में सेना के जवानों और ग्रामीणों द्वारा एक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में ग्रामीण और युवा शामिल हुए। बड़ी संख्या में युवक बाइक पर सवार होकर इस यात्रा में शामिल हुए। यात्रा के दौरान डीजे पर देशभक्ति के गीत बज रहे थे और पूरा क्षेत्र 'समुद्र सिंह अमर रहो' के नारों से गूंज उठा था।
अंतिम यात्रा के दौरान एक अनोखा दृश्य देखा गया, जिसमें ग्रामीण जेसीबी (JCB) मशीन पर चढ़कर पुष्प वर्षा कर रहे थे। लोगों ने फूल बरसाकर अपने गांव के वीर सपूत को भावुक आंखों से विदाई दी। हजारों लोगों की उपस्थिति में वातावरण अत्यंत शोकग्रस्त और गर्वपूर्ण था।
इस प्राकृतिक आपदा में समुद्र सिंह के अलावा चार अन्य जवानों ने भी बलिदान दिया था। इनमें उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के निवासी हवलदार उपेन्द्र यादव शामिल हैं। इसके अलावा, बिहार के भोजपुर के निवासी कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश के औरैया के निवासी विनोद कुमार यादव और बिहार के वैशाली के निवासी आदित्य कुमार नामक तीन अग्निवीर जवानों ने भी वीरगति प्राप्त की। इस प्रकार, दिबांग घाटी में आई इस विनाशकारी आपदा में सेना के कुल पांच जवानों ने अपनी जान गंवाई थी।
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में आई इस आपदा के बाद जवान लंबे समय तक लापता रहे, जिससे सेना और उनके परिवारों में भारी चिंता थी। हालांकि, निरंतर खोज और वैज्ञानिक जांच के बाद पहचान सुनिश्चित हुई।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति और शहीद के सम्मान के बीच, ग्रामीणों में एक बात को लेकर भारी आक्रोश देखा गया। अंतिम संस्कार और यात्रा के दौरान पुलिस तथा प्रशासनिक तंत्र के उच्च अधिकारियों की अनुपस्थिति पर ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त की। अधिकारियों के घटनास्थल पर न पहुंचने के कारण लोगों ने विरोध दर्ज कराया। एक तरफ गांव अपने वीर जवान की शहादत पर गर्व महसूस कर रहा था, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता चर्चा का विषय बनी रही।
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