यूपी के किसान अब विमानों के लिए हाइड्रोजन का उत्पादन करेंगे: गडकरी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि कृषि अवशेषों और पानी से हाइड्रोजन बनाकर विमान, कार और ट्रेनें चलाई जाएंगी।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, शाम 5:23 · 3 मिनट का पाठ
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश के किसान जल्द ही पानी और कृषि अवशेषों का उपयोग करके हाइड्रोजन का उत्पादन करेंगे। इस तरह उत्पादित हाइड्रोजन का उपयोग विमान, कार और रेलवे इंजन जैसे वाहनों को चलाने के लिए किया जाएगा। द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, गडकरी ने इस अभिनव योजना और ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की क्षमता के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
गडकरी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में किसानों द्वारा किया जाने वाला हाइड्रोजन उत्पादन परिवहन क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। इस प्रक्रिया में पानी और कृषि अवशेषों का उपयोग करके हाइड्रोजन प्राप्त किया जाएगा, जो भविष्य में विमान, कार और रेलवे इंजन जैसे विभिन्न वाहनों के लिए ईंधन के रूप में काम करेगा। इस योजना के माध्यम से कृषि अवशेषों का उचित उपयोग करके उन्हें मूल्यवान ऊर्जा स्रोत में परिवर्तित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही, केंद्रीय मंत्री ने इथेनॉल उत्पादन और वैकल्पिक ईंधन के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी क्षमता है। वर्तमान में जो राज्य ऊर्जा क्षेत्र में आयातक के रूप में जाना जाता है, वह भविष्य में ऊर्जा निर्यातक के रूप में भी उभर सकता है। यह परिवर्तन राज्य की आर्थिक स्थिति और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
गडकरी ने राज्य के अतीत के संदर्भ में भी बात की। उन्होंने उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश पहले 'बीमारू' राज्य के रूप में जाना जाता था। हालांकि, अब ऊर्जा क्षेत्र में इस तरह के नए प्रयासों और वैकल्पिक ईंधन के उपयोग से राज्य की छवि बदल रही है। कृषि अवशेषों से हाइड्रोजन बनाने की यह प्रक्रिया न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह किसानों के लिए आय के नए स्रोत भी पैदा कर सकती है।
इस योजना के तहत, कृषि अवशेषों का उपयोग करके हाइड्रोजन बनाने की पद्धति से परिवहन क्षेत्र में उपयोग होने वाले ईंधन के प्रकारों में बड़ा बदलाव आएगा। विमान, कार और रेलवे इंजन जैसे वाहन जो वर्तमान में पारंपरिक ईंधन पर निर्भर हैं, भविष्य में इस हाइड्रोजन द्वारा संचालित हो सकेंगे। इससे राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और आयात पर निर्भरता कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
गडकरी के इस बयान से स्पष्ट होता है कि भारत सरकार और केंद्रीय मंत्री वैकल्पिक ईंधन और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में किसानों की यह भूमिका देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक नया मोड़ ला सकती है, जहाँ कृषि और उद्योग एक-दूसरे के पूरक बनकर काम करेंगे। इस प्रक्रिया के माध्यम से राज्य न केवल अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि अन्य राज्यों या देशों के लिए ऊर्जा निर्यातक बनने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेगा।
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