अवैध रेत खनन मामले में पूर्व मंत्री दुराईमुरुगन के खिलाफ मामला दर्ज
DVAC की रिपोर्ट में राज्य के खजाने को ₹1,427 करोड़ के नुकसान का अनुमान
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 12:58 · अपडेट सुबह 1:08 · 4 मिनट का पाठ
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तमिलनाडु में करोड़ों रुपये के अवैध रेत खनन घोटाले के मामले में सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने DMK के महासचिव और पूर्व मंत्री दुराईमुरुगन सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। DVAC के अनुसार, इस मामले में दुराईमुरुगन को पहला आरोपी बनाया गया है, जो उस समय जल संसाधन विभाग के मंत्री थे। उनके साथ तत्कालीन इंजीनियर-इन-चीफ ए. मुथैया और रामामूर्ति, जल संसाधन विभाग के 14 अधिकारियों और 10 निजी व्यक्तियों या फर्मों को भी आरोपी बनाया गया है।
इस घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और दो अन्य पक्षों द्वारा की गई शिकायतों के आधार पर की गई थी। जांच में प्राथमिक सबूत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। शिकायतकर्ताओं ने 2021 से 2024 के बीच तमिलनाडु के 28 क्वारी साइटों पर नदी की रेत के खनन में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का आरोप लगाया था। इस दौरान खुली निविदा प्रक्रिया के बजाय सीमित निविदाओं के माध्यम से अनुबंध दिए गए थे। इसके अलावा, स्वीकृत मात्रा से अधिक रेत का खनन किया गया और रेत के परिवहन के लिए 'परमिट स्लिप' के नाम पर फर्जी वाउचर बनाकर उन्हें असली दस्तावेजों के रूप में इस्तेमाल किया गया।
DVAC ने एक बयान में कहा कि जब 28 में से चार नदी रेत खनन स्थलों का मूल्यांकन किया गया, तो राज्य के खजाने को ₹1,427 करोड़ का नुकसान हुआ पाया गया। जांच के हिस्से के रूप में विभिन्न टीमों ने राज्य के 34 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें 825 आपत्तिजनक दस्तावेज, 11 इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और बैंक लॉकर की तीन चाबियां बरामद हुईं। शुक्रवार तड़के तिरुचि और पुदुकोट्टई जिलों में सरकारी अधिकारियों के आवासों और कुछ ठेकेदारों तथा व्यापारियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की गई।
इस मामले में ED ने पहले तमिलनाडु सरकार को पत्र लिखकर ₹4,730 करोड़ के रेत खनन घोटाले के बारे में सूचित किया था। ED ने बताया कि रेत के खनन और बिक्री की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं। अवैध रूप से खनन की गई रेत की मात्रा का मूल्यांकन करने के लिए IIT कानपुर और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के विशेषज्ञों की मदद ली गई थी। ED ने आरोप लगाया था कि जांच अवधि के दौरान कुल ₹4,730 करोड़ मूल्य की रेत का अवैध खनन हुआ होगा, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल ₹36.45 करोड़ की आय दिखाई गई थी। PMLA, 2002 के तहत एजेंसी ने ₹136.6 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की है, जिसमें ₹128.34 करोड़ की चल संपत्ति और अवैध खनन में इस्तेमाल की जाने वाली 209 रेत खनन मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा, ठेकेदारों शनमुगम रामचंद्रन और करुप्पेय्या रेतिनम तथा अन्य आरोपियों के बैंक खातों में जमा ₹2.25 करोड़ की राशि भी जब्त की गई है।
मद्रास उच्च न्यायालय में पेश की गई एक रिपोर्ट में ED ने कहा कि उनके पास ड्रोन, लिडार (LIDAR) सर्वे, बाथिमेट्रिक सर्वे और सैटेलाइट इमेजरी प्रोसेसिंग जैसे तकनीकी अध्ययनों के आधार पर विश्वसनीय वैज्ञानिक सबूत हैं, जो साबित करते हैं कि विभिन्न जिला कलेक्टरों के अधिकार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन हुआ था। ED ने यह जानकारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 66(2) के तहत कानूनी जिम्मेदारी का पालन करते हुए तत्कालीन पुलिस महानिदेशक के साथ साझा की थी।
दुराईमुरुगन तमिलनाडु की राजनीति के जाने-माने नेता हैं और DMK पार्टी के महासचिव के रूप में सेवा दे रहे थे। वे इससे पहले तमिलनाडु सरकार में मंत्री के रूप में विभिन्न विभागों में कार्यरत रहे हैं।
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